13 अगस्त 2026
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हल्द्वानी मंच शुद्धिकरण विवाद: खड़गे ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा, नड्डा ने जांच का दिया भरोसा

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हल्द्वानी मंच शुद्धिकरण विवाद: खड़गे ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा, नड्डा ने जांच का दिया भरोसा

सारांश

हल्द्वानी की जनसभा के बाद मंच के कथित शुद्धिकरण का मामला राज्यसभा तक पहुँचा। खड़गे ने इसे दलित अपमान बताया, तो नड्डा ने BJP का पल्ला झाड़ते हुए जांच का वादा किया। सभापति राधाकृष्णन ने भी निंदा की और दोषियों पर कार्रवाई की माँग की।

मुख्य बातें

मल्लिकार्जुन खड़गे ने 13 अगस्त को राज्यसभा में बताया कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में उनके भाषण के बाद मंच का कथित शुद्धिकरण किया गया।
खड़गे ने इसे दलित अपमान और अस्पृश्यता का कृत्य बताते हुए कहा कि उन्होंने भाषण में किसी जाति या धर्म का नाम नहीं लिया था।
नेता सदन जेपी नड्डा ने घटना को 'दुखद' बताया और स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती।
नड्डा ने जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया; BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष भी मामले की समीक्षा करेंगे।
सभापति सीपी राधाकृष्णन ने अस्पृश्यता की निंदा करते हुए सरकार से दोषियों को दंडित करने का आग्रह किया।

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार, 13 अगस्त को राज्यसभा में एक अत्यंत संवेदनशील मामला उठाया — हल्द्वानी के रामलीला मैदान में उनके भाषण के बाद कथित तौर पर मंच का शुद्धिकरण किए जाने की घटना। नेता सदन जेपी नड्डा और सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया।

खड़गे ने सदन में क्या कहा

राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'बड़े दुख के साथ कहना पड़ता है कि मैंने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में सार्वजनिक सभा को संबोधित किया था। वहाँ लाखों लोग मौजूद थे। उस दौरान मैंने किसी समाज या किसी धर्म का नाम नहीं लिया, बल्कि केवल लोगों की समस्याओं के बारे में बात की। लेकिन मेरे भाषण के बाद भाजपा के लोगों ने मिलकर हवन किया और उस मंच का शुद्धीकरण करने का प्रयास किया। यही लोकतंत्र है। हमारे पास संविधान है।'

खड़गे ने आगे कहा, 'मैं एक दलित हूँ, लेकिन मैंने कभी किसी के सामने यह कहकर मदद या अपनी रक्षा की गुहार नहीं लगाई। मेरे अंदर लड़ने की शक्ति है और मैं लड़ता हूँ। लेकिन आप मुझे अछूत समझकर, शुद्धीकरण करके मेरा अपमान करते हैं। यह बहुत दुखद है।'

नड्डा की प्रतिक्रिया और जांच का आश्वासन

नेता सदन जेपी नड्डा ने खड़गे की भावनाओं को स्वीकार करते हुए कहा, 'माननीय खड़गे जी ने जो बात कही है, वह सच में बहुत दुखद विषय है — और यह दुखद सिर्फ कांग्रेस पार्टी के लिए नहीं, बल्कि हम सबके लिए है।' नड्डा ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस तरह की गतिविधियों का कभी समर्थन नहीं करती।

नड्डा ने सदन को आश्वस्त किया, 'जो भी बात हुई है, उसकी जांच जरूर होगी। जिसने भी यह किया है, वह गलत है और उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष इस मामले को गहराई से देखेंगे। साथ ही उन्होंने खड़गे से अनुरोध किया कि जब पार्टी ने स्पष्ट रूप से अपनी स्थिति बता दी है, तो इस मुद्दे का राजनीतिकरण न किया जाए।

सभापति की निंदा और सरकार से आग्रह

राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा, 'हम सभी, चाहे किसी भी राजनीतिक दल से हों, किसी भी विचारधारा से हों — अस्पृश्यता की निंदा करते हैं और हम सभी शुद्ध हैं। किसी को भी बार-बार हमें शुद्ध करने की जरूरत नहीं है।'

सभापति ने सरकार से स्पष्ट आग्रह किया कि जिन लोगों ने यह कृत्य किया है, उनकी जांच की जाए, उन्हें पकड़ा जाए और उचित दंड दिया जाए। उन्होंने कहा, 'इस मामले में कोई दो राय नहीं है।'

घटना की पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश में जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता के विरुद्ध संवैधानिक प्रावधानों की बात बार-बार होती है। हल्द्वानी में आयोजित जनसभा में खड़गे के भाषण के बाद मंच का कथित शुद्धिकरण न केवल एक राजनीतिक विवाद है, बल्कि यह सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों पर भी गंभीर प्रश्न उठाता है। यह ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में कई संवेदनशील मुद्दे उठाए जा रहे हैं।

आगे क्या होगा

नड्डा और सभापति राधाकृष्णन के आश्वासन के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि जांच कब और कैसे शुरू होती है तथा दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) इस मामले को लेकर सतर्क है और आगे की कार्रवाई पर नजर बनाए हुए है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जांच का वादा कागज पर रहेगा या जमीन पर उतरेगा। अस्पृश्यता निषेध कानून दशकों पुराना है, फिर भी इस तरह की घटनाएँ सार्वजनिक मंचों पर होती हैं — यह संस्थागत विफलता का संकेत है। नड्डा का 'राजनीतिकरण न करें' वाला आग्रह तब तक खोखला लगता है, जब तक दोषियों की पहचान और दंड सार्वजनिक न हो। खड़गे की पीड़ा व्यक्तिगत नहीं, प्रतीकात्मक है — और यही इस घटना को एक दलित नेता के अपमान से आगे, लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमले के रूप में स्थापित करती है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हल्द्वानी मंच शुद्धिकरण विवाद क्या है?
कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित किया था। उनके भाषण के बाद कथित तौर पर भाजपा से जुड़े लोगों ने हवन कर उस मंच का शुद्धिकरण किया, जिसे खड़गे ने दलित अपमान और अस्पृश्यता का कृत्य बताया।
राज्यसभा में इस मामले पर क्या हुआ?
13 अगस्त को राज्यसभा में खड़गे ने यह मुद्दा उठाया। नेता सदन जेपी नड्डा ने घटना को दुखद बताते हुए BJP का पल्ला झाड़ा और जांच का वादा किया। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने भी निंदा करते हुए सरकार से दोषियों पर कार्रवाई का आग्रह किया।
BJP ने इस घटना पर क्या रुख अपनाया?
नेता सदन जेपी नड्डा ने स्पष्ट कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस तरह की गतिविधियों का कभी समर्थन नहीं करती। उन्होंने घटना की भर्त्सना की और कहा कि BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष मामले को गहराई से देखेंगे तथा दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।
खड़गे ने इस घटना को किस रूप में देखा?
खड़गे ने इसे अपने दलित होने के कारण हुए अपमान के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि उन्होंने भाषण में किसी जाति या धर्म का नाम नहीं लिया था, फिर भी मंच का शुद्धिकरण कर उन्हें 'अछूत' की तरह व्यवहार किया गया, जो संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होने की संभावना है?
नड्डा और सभापति राधाकृष्णन दोनों ने जांच और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष इस मामले की समीक्षा करेंगे। हालाँकि जांच की समयसीमा और प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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