एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026: धर्मेंद्र प्रधान का नवीन पटनायक पर पलटवार, बोले- तथ्य छिपाकर ओडिशा को गुमराह करना अस्वीकार्य
सारांश
मुख्य बातें
संबलपुर से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 29 अगस्त 2026 को खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 — जिसे एमएमडीआर संशोधन विधेयक के नाम से जाना जाता है — को लेकर ओडिशा के नेता प्रतिपक्ष और बीजू जनता दल (बीजेडी) अध्यक्ष नवीन पटनायक के विरोध पर तीखा पलटवार किया। प्रधान ने सवाल उठाया कि तथ्यों को छिपाकर और भय का वातावरण बनाकर ओडिशा की जनता को भ्रमित करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने पटनायक से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस कानून का समर्थन करने का आग्रह किया।
मुख्य घटनाक्रम
यह राजनीतिक टकराव तब और तेज हुआ जब नवीन पटनायक ने ओडिशा के भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसदों से एमएमडीआर संशोधनों को चुनौती देने और कानून वापस लेने की माँग की। पटनायक ने इस कानून को ओडिशा के हितों के लिए नुकसानदायक बताते हुए राज्य के संभावित राजस्व नुकसान पर गंभीर चिंता जताई।
इसके जवाब में धर्मेंद्र प्रधान ने एमएमडीआर संशोधन कानून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का ऐतिहासिक निर्णय करार दिया। उनका कहना है कि यह कानून खनन क्षेत्र में अधिक पारदर्शिता और नीतिगत निश्चितता लाएगा तथा ओडिशा जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों के आर्थिक हितों की रक्षा सुनिश्चित करेगा।
राजस्व के आँकड़े और राज्य का हिस्सा
प्रधान ने स्पष्ट किया कि खनन से होने वाले लगभग 90 प्रतिशत कर और वैधानिक भुगतान सीधे राज्यों को प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि संशोधित व्यवस्था के अंतर्गत भी ओडिशा को नीलामी प्रीमियम, रॉयल्टी और जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) से मिलने वाला योगदान निर्बाध रूप से जारी रहेगा।
उन्होंने एक महत्वपूर्ण आँकड़ा साझा किया — राज्य का खनन राजस्व लगभग ₹5,000 करोड़ से बढ़कर ₹50,000 करोड़ तक पहुँच चुका है। प्रधान ने इसे मोदी सरकार की पारदर्शी ई-नीलामी नीति और खनन क्षेत्र में किए गए संरचनात्मक सुधारों का प्रत्यक्ष परिणाम बताया।
डीएमएफ से ओडिशा को लाभ
प्रधान ने DMF के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, 2015 से अब तक ओडिशा को DMF के ज़रिये ₹37,000 करोड़ से अधिक की राशि प्राप्त हुई है, जो ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के बुनियादी विकास में खर्च हुई है। गौरतलब है कि यह राशि उन्हीं खनन सुधारों की देन है जिन्हें पटनायक अब चुनौती दे रहे हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
प्रधान ने यह भी तर्क दिया कि खनिजों पर अत्यधिक और दोहराए जाने वाले करों से लौह अयस्क, कोयला और सीमेंट जैसे आवश्यक कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर उद्योग, बुनियादी ढाँचे और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'संशोधित व्यवस्था एक अधिक पूर्वानुमानित खनन कर व्यवस्था बनाने और खनिज उत्पादक राज्यों के वैध राजस्व को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।'
उन्होंने यह भी बताया कि ओडिशा के सांसदों ने राज्य के व्यापक हित, औद्योगिक विकास और युवाओं के रोजगार को ध्यान में रखते हुए संसद में इस विधेयक का समर्थन किया है।
आगे क्या होगा
प्रधान ने नवीन पटनायक से सीधे आग्रह किया कि वे नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में दलीय राजनीति से ऊपर उठें और तथ्यों के आधार पर इस ऐतिहासिक कानून का समर्थन करें। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब ओडिशा में BJP और BJD के बीच खनिज नीति पर वैचारिक मतभेद तेज होते जा रहे हैं। इस बहस का असर आने वाले समय में राज्य की खनन नीति और राजस्व व्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।