29 अगस्त 2026
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एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026: धर्मेंद्र प्रधान का नवीन पटनायक पर पलटवार, बोले- तथ्य छिपाकर ओडिशा को गुमराह करना अस्वीकार्य

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एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026: धर्मेंद्र प्रधान का नवीन पटनायक पर पलटवार, बोले- तथ्य छिपाकर ओडिशा को गुमराह करना अस्वीकार्य

सारांश

एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 पर BJP और BJD आमने-सामने हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने नवीन पटनायक पर तथ्य छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा कि ओडिशा का खनन राजस्व ₹5,000 करोड़ से ₹50,000 करोड़ तक पहुँचा है और DMF से ₹37,000 करोड़ से अधिक राज्य को मिल चुके हैं।

मुख्य बातें

धर्मेंद्र प्रधान ने 29 अगस्त 2026 को एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 पर नवीन पटनायक के विरोध का तीखा खंडन किया।
प्रधान के अनुसार ओडिशा का खनन राजस्व ₹5,000 करोड़ से बढ़कर ₹50,000 करोड़ हो चुका है।
2015 से अब तक ओडिशा को जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) के माध्यम से ₹37,000 करोड़ से अधिक प्राप्त हुए हैं।
खनन से लगभग 90% कर और वैधानिक भुगतान राज्यों को मिलते हैं; संशोधन के बाद भी यह व्यवस्था जारी रहेगी।
नवीन पटनायक ने ओडिशा के BJP सांसदों से कानून वापस लेने की माँग की है, जिसे प्रधान ने 'भ्रामक अभियान' करार दिया।

संबलपुर से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 29 अगस्त 2026 को खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 — जिसे एमएमडीआर संशोधन विधेयक के नाम से जाना जाता है — को लेकर ओडिशा के नेता प्रतिपक्ष और बीजू जनता दल (बीजेडी) अध्यक्ष नवीन पटनायक के विरोध पर तीखा पलटवार किया। प्रधान ने सवाल उठाया कि तथ्यों को छिपाकर और भय का वातावरण बनाकर ओडिशा की जनता को भ्रमित करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने पटनायक से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस कानून का समर्थन करने का आग्रह किया।

मुख्य घटनाक्रम

यह राजनीतिक टकराव तब और तेज हुआ जब नवीन पटनायक ने ओडिशा के भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसदों से एमएमडीआर संशोधनों को चुनौती देने और कानून वापस लेने की माँग की। पटनायक ने इस कानून को ओडिशा के हितों के लिए नुकसानदायक बताते हुए राज्य के संभावित राजस्व नुकसान पर गंभीर चिंता जताई।

इसके जवाब में धर्मेंद्र प्रधान ने एमएमडीआर संशोधन कानून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का ऐतिहासिक निर्णय करार दिया। उनका कहना है कि यह कानून खनन क्षेत्र में अधिक पारदर्शिता और नीतिगत निश्चितता लाएगा तथा ओडिशा जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों के आर्थिक हितों की रक्षा सुनिश्चित करेगा।

राजस्व के आँकड़े और राज्य का हिस्सा

प्रधान ने स्पष्ट किया कि खनन से होने वाले लगभग 90 प्रतिशत कर और वैधानिक भुगतान सीधे राज्यों को प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि संशोधित व्यवस्था के अंतर्गत भी ओडिशा को नीलामी प्रीमियम, रॉयल्टी और जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) से मिलने वाला योगदान निर्बाध रूप से जारी रहेगा।

उन्होंने एक महत्वपूर्ण आँकड़ा साझा किया — राज्य का खनन राजस्व लगभग ₹5,000 करोड़ से बढ़कर ₹50,000 करोड़ तक पहुँच चुका है। प्रधान ने इसे मोदी सरकार की पारदर्शी ई-नीलामी नीति और खनन क्षेत्र में किए गए संरचनात्मक सुधारों का प्रत्यक्ष परिणाम बताया।

डीएमएफ से ओडिशा को लाभ

प्रधान ने DMF के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, 2015 से अब तक ओडिशा को DMF के ज़रिये ₹37,000 करोड़ से अधिक की राशि प्राप्त हुई है, जो ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के बुनियादी विकास में खर्च हुई है। गौरतलब है कि यह राशि उन्हीं खनन सुधारों की देन है जिन्हें पटनायक अब चुनौती दे रहे हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

प्रधान ने यह भी तर्क दिया कि खनिजों पर अत्यधिक और दोहराए जाने वाले करों से लौह अयस्क, कोयला और सीमेंट जैसे आवश्यक कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर उद्योग, बुनियादी ढाँचे और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'संशोधित व्यवस्था एक अधिक पूर्वानुमानित खनन कर व्यवस्था बनाने और खनिज उत्पादक राज्यों के वैध राजस्व को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।'

उन्होंने यह भी बताया कि ओडिशा के सांसदों ने राज्य के व्यापक हित, औद्योगिक विकास और युवाओं के रोजगार को ध्यान में रखते हुए संसद में इस विधेयक का समर्थन किया है।

आगे क्या होगा

प्रधान ने नवीन पटनायक से सीधे आग्रह किया कि वे नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में दलीय राजनीति से ऊपर उठें और तथ्यों के आधार पर इस ऐतिहासिक कानून का समर्थन करें। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब ओडिशा में BJP और BJD के बीच खनिज नीति पर वैचारिक मतभेद तेज होते जा रहे हैं। इस बहस का असर आने वाले समय में राज्य की खनन नीति और राजस्व व्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ से ₹50,000 करोड़ तक का सफर और DMF से ₹37,000 करोड़ — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या संशोधित व्यवस्था में राज्यों की राजस्व वृद्धि की यही गति भविष्य में भी बनी रहेगी। नवीन पटनायक की चिंता महज़ विपक्षी राजनीति नहीं है — खनिज-समृद्ध राज्यों के अधिकारों और केंद्र के नियामक नियंत्रण के बीच का यह तनाव पुराना है। बहस को 'डर बनाम तथ्य' के सरलीकृत ढाँचे में समेटना उन वैध संरचनात्मक प्रश्नों को दबा देता है जो ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य वर्षों से उठाते आए हैं। जब तक संशोधन के दीर्घकालिक राजस्व प्रभाव का स्वतंत्र आकलन सार्वजनिक नहीं होता, दोनों पक्षों के दावे अधूरे रहेंगे।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 केंद्र सरकार द्वारा लाया गया एक कानून है जो खनन क्षेत्र में कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और पूर्वानुमानित बनाने का लक्ष्य रखता है। इसके तहत नीलामी प्रीमियम, रॉयल्टी और DMF योगदान की मौजूदा व्यवस्था जारी रखने का प्रावधान है।
नवीन पटनायक इस विधेयक का विरोध क्यों कर रहे हैं?
बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने इस कानून को ओडिशा के हितों के लिए नुकसानदायक बताया है और राज्य के संभावित राजस्व नुकसान पर चिंता जताई है। उन्होंने ओडिशा के BJP सांसदों से संशोधनों को चुनौती देने और कानून वापस लेने की माँग की है।
धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के राजस्व को लेकर क्या कहा?
प्रधान ने कहा कि ओडिशा का खनन राजस्व ₹5,000 करोड़ से बढ़कर ₹50,000 करोड़ तक पहुँच चुका है और 2015 से अब तक DMF के माध्यम से ₹37,000 करोड़ से अधिक राज्य को प्राप्त हुए हैं। उन्होंने इसे मोदी सरकार की ई-नीलामी नीति का परिणाम बताया।
एमएमडीआर संशोधन से आम उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ सकता है?
प्रधान के अनुसार, खनिजों पर अत्यधिक और दोहराए जाने वाले कर लौह अयस्क, कोयला और सीमेंट जैसे कच्चे माल की लागत बढ़ा सकते हैं, जिसका असर उद्योग, बुनियादी ढाँचे और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। संशोधित व्यवस्था इस जोखिम को कम करने का प्रयास करती है।
DMF यानी जिला खनिज फाउंडेशन से ओडिशा को क्या मिला है?
DMF खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए स्थापित एक कोष है। 2015 से अब तक ओडिशा को DMF के माध्यम से ₹37,000 करोड़ से अधिक की राशि प्राप्त हुई है, जो ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के बुनियादी विकास में उपयोग की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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