नेपाल बाढ़ रेस्क्यू: भारत की 11 सदस्यीय विशेष तकनीकी टीम रसुवा पहुँची, 934 लोग अब भी संपर्क से बाहर
सारांश
मुख्य बातें
भारत की एक 11 सदस्यीय विशेष तकनीकी टीम — जिसमें डॉक्टर, पैरामेडिक्स और टनल रेस्क्यू विशेषज्ञ शामिल हैं — 29 अगस्त 2026 को नेपाल के रसुवा जिले में त्रिशूली 3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पहुँची, जहाँ अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सुरंगों में फंसे लोगों का बचाव अभियान जारी है। नेपाल में भारतीय दूतावास ने शनिवार को पुष्टि की कि टीम ने जलविद्युत सुरंगों का मौके पर सर्वेक्षण शुरू कर दिया है।
बचाव अभियान की स्थिति
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, भारतीय टीम ने हेलीकॉप्टर से चिलिमे और लांगतांग इलाकों का प्रारंभिक हवाई सर्वेक्षण करने की योजना बनाई है, ताकि आगे की ज़रूरतों का आकलन कर बचाव अभियान को दिशा दी जा सके। इलाके में प्रतिकूल मौसम के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
पीएमओ ने बताया कि शुक्रवार रात से नेपाली सेना के 62 जवान और सशस्त्र पुलिस बल नेपाल तथा नेपाल पुलिस के 20 जवानों सहित कुल 82 नेपाली सुरक्षाकर्मियों की एक संयुक्त टीम सुरंग के प्रवेश द्वार को साफ करने और तलाशी अभियान में तेज़ी लाने के लिए लगातार तैनात है।
कितने लोग संपर्क से बाहर
नेपाल के निजी बिजली उत्पादकों के संगठन इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, नेपाल (आईपीपीएएन) के अनुसार, बाढ़ प्रभावित रसुवा और नुवाकोट जिलों में 11 जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े 934 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। इनमें रसुवा की छह परियोजनाओं से 730 और नुवाकोट की पाँच परियोजनाओं से 204 लोग शामिल हैं।
आईपीपीएएन ने यह भी बताया कि 26 अगस्त को भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ ने 675.6 मेगावाट की संयुक्त स्थापित क्षमता वाली 13 जलविद्युत परियोजनाओं को प्रभावित किया है। दोनों जिलों में जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचा है।
भारत-नेपाल सहयोग
स्थानीय विशेषज्ञता की सीमाओं के चलते बचाव अभियान धीमी गति से आगे बढ़ने के कारण नेपाल ने भारत और चीन दोनों से तकनीकी सहयोग का अनुरोध किया है। भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया कि भारत नेपाल के जारी राहत और बचाव प्रयासों का समर्थन करता रहेगा और बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की तलाश में नेपाली अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में है।
गौरतलब है कि भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव (वाणिज्य) ने हाल ही में अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना से बचाए गए भारतीय श्रमिकों से मुलाकात कर उनकी सुरक्षा और कुशलक्षेम की जानकारी ली।
आगे की चुनौतियाँ
यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ हर वर्ष बुनियादी ढाँचे को गंभीर नुकसान पहुँचाती हैं, और जलविद्युत परियोजनाओं में कार्यरत श्रमिक सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं। बचाव दलों के सामने अब सुरंग के भीतर की स्थिति का सटीक आकलन करना और प्रतिकूल मौसम के बीच अभियान को तेज़ करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।