गणेशोत्सव 2025: पुणे पुलिस ने 1 से 14 सितंबर तक धारा 37 लागू की, 5 से अधिक लोगों की सभा के लिए अनुमति अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
पुणे पुलिस आयुक्तालय ने 29 अगस्त को एक व्यापक प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया, जो 1 सितंबर की रात 12.01 बजे से 14 सितंबर की रात 12 बजे तक — यानी पूरे 14 दिनों तक — पूरे पुणे शहर पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में प्रभावी रहेगा। यह आदेश महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम 1951 की धारा 37(1), 37(2) और 37(3) के तहत जारी किया गया है, और इसका सीधा उद्देश्य गणेशोत्सव, दहीहंडी तथा अन्य आगामी धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के दौरान कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
आदेश की पृष्ठभूमि और कारण
आने वाले दिनों में पुणे में दहीहंडी, वीर गोगादेव जयंती, गणेशोत्सव और कई अन्य धार्मिक-सामाजिक आयोजन होने हैं। इसी अवधि में विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से मोर्चे, धरने, प्रदर्शन, बंद और अनशन की भी संभावना रहती है। इसके अतिरिक्त, अतिक्रमण हटाने जैसी प्रशासनिक कार्रवाइयों के दौरान विरोध या तनाव उत्पन्न होने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने पहले से ही यह कदम उठाया है।
मुख्य प्रतिबंध: क्या-क्या है वर्जित
आदेश के अंतर्गत प्रतिबंधित अवधि में विस्फोटक, ज्वलनशील पदार्थ या ज्वलनशील तरल पदार्थ साथ रखना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। इसके अलावा पत्थर, हथियार, फेंकने वाले हथियार या किसी भी प्रकार की आक्रामक सामग्री रखने, जमा करने या तैयार करने पर रोक रहेगी। तलवार, भाला, बंदूक, लाठी, डंडा, सोटा या शारीरिक चोट पहुँचाने में सक्षम किसी भी वस्तु को लेकर चलने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
किसी व्यक्ति या नेता के चित्र, प्रतिमा या प्रतीकात्मक पुतले का सार्वजनिक प्रदर्शन या दहन भी वर्जित रहेगा। ऐसे पोस्टर, बैनर, चित्र या अन्य सामग्री — जो सार्वजनिक नैतिकता, सुरक्षा या कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हो — उनके प्रदर्शन और प्रसार पर भी रोक लगाई गई है।
सोशल मीडिया पर भी सख्ती
उल्लेखनीय है कि इस बार पुणे पुलिस ने सोशल मीडिया को भी आदेश के दायरे में लिया है। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अपराधियों की रील बनाकर सोशल मीडिया पर डालकर दहशत फैलाने या किसी को धमकी देने जैसी गतिविधियाँ प्रतिबंधित रहेंगी। किसी अपराधी की छवि को ऑनलाइन बढ़ावा देने या उसके माध्यम से भय का वातावरण निर्मित करने पर भी पुलिस कार्रवाई कर सकती है। यह प्रावधान डिजिटल उकसावे पर पुलिस की बढ़ती सतर्कता को दर्शाता है।
सभा पर अनुमति अनिवार्य
सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(3) के तहत है — 5 या अधिक लोगों की किसी भी सभा या जुलूस के लिए पुणे शहर पुलिस आयुक्त की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। बिना अनुमति भीड़ जुटाने या जुलूस निकालने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
छूट और उल्लंघन पर दंड
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी और जिन्हें अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार हथियार रखना आवश्यक है, वे इस आदेश के दायरे से बाहर रहेंगे। इसके अलावा 3.5 फीट तक की लाठी रखने वाले निजी सुरक्षा रक्षक, गुरखा और चौकीदार को भी छूट दी गई है। प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम 1951 की धारा 135 के तहत कार्रवाई की जाएगी। आदेश की अवधि समाप्त होने के बाद भी उल्लंघन से संबंधित जाँच, दंड और जब्ती की प्रक्रिया जारी रखी जा सकती है। यह आदेश संकेत देता है कि गणेशोत्सव के बाद भी पुलिस की निगरानी बनी रहेगी।