29 अगस्त 2026
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गणेशोत्सव 2025: पुणे पुलिस ने 1 से 14 सितंबर तक धारा 37 लागू की, 5 से अधिक लोगों की सभा के लिए अनुमति अनिवार्य

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गणेशोत्सव 2025: पुणे पुलिस ने 1 से 14 सितंबर तक धारा 37 लागू की, 5 से अधिक लोगों की सभा के लिए अनुमति अनिवार्य

सारांश

गणेशोत्सव से ठीक पहले पुणे पुलिस ने 14 दिनों के लिए धारा 37 लागू कर दी है। 5 या अधिक लोगों की सभा के लिए पुलिस आयुक्त की अनुमति अनिवार्य होगी। हथियार, भड़काऊ सामग्री और अपराधियों की सोशल मीडिया रील — सब पर रोक। उल्लंघन पर धारा 135 के तहत कार्रवाई तय है।

मुख्य बातें

पुणे पुलिस ने 29 अगस्त को प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया, जो 1 सितंबर से 14 सितंबर 2025 तक प्रभावी रहेगा।
महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम 1951 की धारा 37(1) , 37(2) और 37(3) के तहत 5 या अधिक लोगों की सभा या जुलूस के लिए पुलिस आयुक्त की पूर्व अनुमति अनिवार्य।
विस्फोटक, ज्वलनशील पदार्थ, तलवार, भाला, लाठी, डंडा और आक्रामक सामग्री रखना पूरी तरह प्रतिबंधित।
पुतला दहन, भड़काऊ बैनर-पोस्टर और सोशल मीडिया पर अपराधियों की रील डालकर दहशत फैलाना भी वर्जित।
उल्लंघन पर धारा 135 के तहत कानूनी कार्रवाई; आदेश समाप्ति के बाद भी जाँच जारी रह सकती है।
ड्यूटी पर सरकारी कर्मचारी, निजी सुरक्षा रक्षक और 3.5 फीट तक लाठी रखने वाले गुरखा-चौकीदार को छूट।

पुणे पुलिस आयुक्तालय ने 29 अगस्त को एक व्यापक प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया, जो 1 सितंबर की रात 12.01 बजे से 14 सितंबर की रात 12 बजे तक — यानी पूरे 14 दिनों तक — पूरे पुणे शहर पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में प्रभावी रहेगा। यह आदेश महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम 1951 की धारा 37(1), 37(2) और 37(3) के तहत जारी किया गया है, और इसका सीधा उद्देश्य गणेशोत्सव, दहीहंडी तथा अन्य आगामी धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के दौरान कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

आदेश की पृष्ठभूमि और कारण

आने वाले दिनों में पुणे में दहीहंडी, वीर गोगादेव जयंती, गणेशोत्सव और कई अन्य धार्मिक-सामाजिक आयोजन होने हैं। इसी अवधि में विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से मोर्चे, धरने, प्रदर्शन, बंद और अनशन की भी संभावना रहती है। इसके अतिरिक्त, अतिक्रमण हटाने जैसी प्रशासनिक कार्रवाइयों के दौरान विरोध या तनाव उत्पन्न होने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने पहले से ही यह कदम उठाया है।

मुख्य प्रतिबंध: क्या-क्या है वर्जित

आदेश के अंतर्गत प्रतिबंधित अवधि में विस्फोटक, ज्वलनशील पदार्थ या ज्वलनशील तरल पदार्थ साथ रखना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। इसके अलावा पत्थर, हथियार, फेंकने वाले हथियार या किसी भी प्रकार की आक्रामक सामग्री रखने, जमा करने या तैयार करने पर रोक रहेगी। तलवार, भाला, बंदूक, लाठी, डंडा, सोटा या शारीरिक चोट पहुँचाने में सक्षम किसी भी वस्तु को लेकर चलने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

किसी व्यक्ति या नेता के चित्र, प्रतिमा या प्रतीकात्मक पुतले का सार्वजनिक प्रदर्शन या दहन भी वर्जित रहेगा। ऐसे पोस्टर, बैनर, चित्र या अन्य सामग्री — जो सार्वजनिक नैतिकता, सुरक्षा या कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हो — उनके प्रदर्शन और प्रसार पर भी रोक लगाई गई है।

सोशल मीडिया पर भी सख्ती

उल्लेखनीय है कि इस बार पुणे पुलिस ने सोशल मीडिया को भी आदेश के दायरे में लिया है। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अपराधियों की रील बनाकर सोशल मीडिया पर डालकर दहशत फैलाने या किसी को धमकी देने जैसी गतिविधियाँ प्रतिबंधित रहेंगी। किसी अपराधी की छवि को ऑनलाइन बढ़ावा देने या उसके माध्यम से भय का वातावरण निर्मित करने पर भी पुलिस कार्रवाई कर सकती है। यह प्रावधान डिजिटल उकसावे पर पुलिस की बढ़ती सतर्कता को दर्शाता है।

सभा पर अनुमति अनिवार्य

सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(3) के तहत है — 5 या अधिक लोगों की किसी भी सभा या जुलूस के लिए पुणे शहर पुलिस आयुक्त की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। बिना अनुमति भीड़ जुटाने या जुलूस निकालने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

छूट और उल्लंघन पर दंड

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी और जिन्हें अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार हथियार रखना आवश्यक है, वे इस आदेश के दायरे से बाहर रहेंगे। इसके अलावा 3.5 फीट तक की लाठी रखने वाले निजी सुरक्षा रक्षक, गुरखा और चौकीदार को भी छूट दी गई है। प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम 1951 की धारा 135 के तहत कार्रवाई की जाएगी। आदेश की अवधि समाप्त होने के बाद भी उल्लंघन से संबंधित जाँच, दंड और जब्ती की प्रक्रिया जारी रखी जा सकती है। यह आदेश संकेत देता है कि गणेशोत्सव के बाद भी पुलिस की निगरानी बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका दायरा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है — सोशल मीडिया पर अपराधियों की 'रील' पर रोक एक नई और महत्वपूर्ण मिसाल है, जो डिजिटल उकसावे को भी भौतिक खतरे जितना गंभीर मानती है। दूसरी ओर, 5 से अधिक लोगों की सभा के लिए पूर्व अनुमति की शर्त राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के लिए व्यावहारिक बाधा बन सकती है, खासकर जब गणेशोत्सव के साथ-साथ विभिन्न जनहित आंदोलन भी इसी अवधि में प्रस्तावित हों। यह देखना होगा कि अनुमति प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और समयबद्ध रहती है — वरना प्रतिबंध, सुरक्षा से ज़्यादा नागरिक स्वतंत्रता पर असर डालने का ज़रिया बन सकता है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे पुलिस ने धारा 37 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश क्यों जारी किया?
गणेशोत्सव, दहीहंडी और वीर गोगादेव जयंती जैसे आगामी धार्मिक-सामाजिक आयोजनों तथा राजनीतिक मोर्चों-प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुणे पुलिस ने यह कदम उठाया है। अतिक्रमण हटाने जैसी कार्रवाइयों के दौरान संभावित तनाव को रोकना भी इसका उद्देश्य है।
पुणे में धारा 37 कब से कब तक लागू रहेगी?
यह आदेश 1 सितंबर 2025 की रात 12.01 बजे से 14 सितंबर 2025 की रात 12 बजे तक — यानी पूरे 14 दिनों के लिए — पुणे शहर पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में प्रभावी रहेगा।
क्या गणेशोत्सव के दौरान पुणे में जुलूस या सभा निकाल सकते हैं?
5 या अधिक लोगों की किसी भी सभा या जुलूस के लिए पुणे शहर पुलिस आयुक्त की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। बिना अनुमति के ऐसा करने पर महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 135 के तहत कार्रवाई हो सकती है।
पुणे पुलिस के इस आदेश में सोशल मीडिया पर क्या प्रतिबंध है?
आदेश के तहत अपराधियों की रील बनाकर सोशल मीडिया पर डालकर दहशत फैलाना या किसी को धमकी देना प्रतिबंधित है। किसी अपराधी की छवि को ऑनलाइन बढ़ावा देकर भय का वातावरण बनाने पर भी पुलिस कार्रवाई कर सकती है।
पुणे के प्रतिबंधात्मक आदेश से किन्हें छूट मिली है?
ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर हथियार रखने वाले कर्मी, तथा 3.5 फीट तक की लाठी रखने वाले निजी सुरक्षा रक्षक, गुरखा और चौकीदार इस आदेश के दायरे से बाहर रखे गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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