नेपाल बाढ़: भारत ने भेजे 57.5 टन राहत सामग्री और सेना के बचाव दल, 108 नागरिक सुरक्षित
सारांश
मुख्य बातें
भोटे कोशी बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल को व्यापक मानवीय सहायता प्रदान की है — 29 अगस्त 2026 तक भारतीय वायु सेना (IAF) के तीन विमान कुल 57.5 टन राहत सामग्री पहुँचा चुके हैं और एक चौथा विमान काठमांडू के लिए रवाना होने वाला है। 26 अगस्त 2026 को नेपाल के भोटे कोशी क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ ने आवासीय बस्तियों, सड़कों, पुलों और बुनियादी ढाँचे को व्यापक नुकसान पहुँचाया, जिसमें सैकड़ों भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए।
राहत अभियान का घटनाक्रम
बाढ़ वाले दिन यानी 26 अगस्त को ही IAF के सी-130जे हरक्यूलिस विमान ने 10 टन आपातकालीन सामग्री — अस्थायी आश्रय, कंबल, स्वच्छता किट, सौर लैंप और दवाइयाँ — नेपाल पहुँचाई। अगले दिन 27 अगस्त को IAF के सी-17 ग्लोबमास्टर विमान ने 37.5 टन सामग्री पहुँचाई, जिसमें तंबू, कंबल, जल निकासी पंप, रसोई सेट, जेनरेटर, 8 टन दवाइयाँ और 1 टन खाद्य सामग्री शामिल थी।
28 अगस्त को एक और सी-130जे हरक्यूलिस विमान ने भारतीय सेना का 5 सदस्यीय सुरंग बचाव दल और 6 सदस्यीय चिकित्सा दल के साथ-साथ पोर्टेबल जेनरेटर, डिग्निटी किट और जल शोधन की गोलियाँ सहित 10 टन अतिरिक्त सामग्री भेजी। यह तकनीकी दल प्रभावित क्षेत्र में सुरंग बचाव कार्य में उसी दिन से जुट गया।
भारतीय नागरिकों की स्थिति
अब तक नेपाल में 108 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया जा चुका है और लगभग 50 नागरिकों से संपर्क फिर से स्थापित किया गया है। चीन में स्थानीय सरकारी सूत्रों के अनुसार, पिछले दो दिनों में 598 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल में प्रवेश कर चुके हैं। लगभग 900 भारतीय नागरिक अभी भी चीन की सीमा में हैं, लेकिन वे सुरक्षित हैं और उनसे संपर्क किया जा सकता है।
दुर्भाग्यवश, 275 से अधिक भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के 128 व्यक्ति अभी भी लापता हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें कई कैलाश मानसरोवर यात्रा से नेपाल के रास्ते लौट रहे तीर्थयात्री भी शामिल हैं।
कूटनीतिक प्रतिक्रिया
बाढ़ के दिन ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से फोन पर बात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और हर संभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया। 28 अगस्त को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने नेपाल के विदेश मंत्री से बातचीत की। विदेश मंत्रालय में एक चौबीसों घंटे चलने वाला नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है और काठमांडू तथा बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों में हेल्पलाइन सेवाएँ सक्रिय हैं।
आगे की तैयारी
चौथा विमान — एक सी-130जे हरक्यूलिस — भारतीय सेना का 13 सदस्यीय सुरंग बचाव दल विशेष उपकरणों के साथ काठमांडू ले जाने वाला है। साथ ही शवों की पहचान के लिए डीएनए नमूनों के विश्लेषण में सहायता हेतु 6 फोरेंसिक टीमों का 19 सदस्यीय दल भी भेजा जा रहा है। इसके अलावा, संपर्क बहाल करने और राहत कार्यों में सहायता के लिए बेली पुल और संबंधित तकनीकी दल की तैनाती की तैयारी है — एक बेली पुल पहले से ही नेपाल में मौजूद है।
भारत सरकार नेपाल की आवश्यकताओं के अनुरूप लक्षित सहायता जुटाना जारी रखेगी और दोनों देशों के बीच सभ्यतागत संबंधों की भावना के अनुरूप इस संकट की घड़ी में नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।