नेपाल बाढ़ राहत: भारत ने भेजी डॉक्टरों-पैरामेडिक्स की टीम, 10 टन सहायता सामग्री काठमांडू रवाना
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय ने 28 अगस्त को जानकारी दी कि नई दिल्ली से काठमांडू के लिए तीसरी विशेष राहत उड़ान रवाना हुई, जिसमें 10 टन से अधिक मानवीय सहायता सामग्री के साथ-साथ डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों की एक विशेष टीम भी सवार है। बुधवार को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत लगातार अपने राहत प्रयास तेज कर रहा है।
सहायता सामग्री में क्या शामिल है
इस उड़ान में भेजी गई सामग्री में पोर्टेबल जनरेटर सेट, डिग्निटी किट, खाद्य पैकेट और जल शोधन की गोलियाँ शामिल हैं। इसके अलावा 11 सदस्यीय चिकित्सा दल — जिसमें डॉक्टर और पैरामेडिकल कर्मी हैं — तथा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए एक रेकी टीम भी इस उड़ान में रवाना हुई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पुष्टि की कि भारत-नेपाल के चल रहे राहत एवं बचाव प्रयासों में भारत अपना सहयोग जारी रखेगा।
84 भारतीय नागरिक बचाए गए, 96 सुरक्षित नेपाल पहुँचे
नई दिल्ली में आयोजित द्विसाप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि अब तक 84 भारतीय नागरिकों को बचाया जा चुका है, जिनमें त्रिशुली-1 जलविद्युत परियोजना में कार्यरत 63 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि चीन की सीमा में फँसे 96 भारतीय नागरिक सड़क मार्ग से सुरक्षित रूप से नेपाल पहुँच गए हैं।
तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री स्वदेश लौटे
इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने तमिलनाडु के उन 21 तीर्थयात्रियों से मुलाकात की, जो बाढ़ से बचाए जाने के बाद काठमांडू से दिल्ली हवाई अड्डे पहुँचे थे। ये सभी नागरिक विभिन्न ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। जयशंकर ने एक्स पर लिखा कि उनकी आपबीती सुनकर वे अत्यंत भावुक हो गए और इस बचाव अभियान के लिए नेपाली सेना व नेपाल सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के समन्वय प्रयासों की भी सराहना की।
नियंत्रण कक्ष और बेली ब्रिज की तैनाती
भारत ने राहत कार्यों को सुचारू बनाने के लिए विदेश मंत्रालय में एक चौबीसों घंटे कार्यरत नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। बचाव और राहत कार्यों में सहायता के लिए बेली ब्रिज की भी तैनाती की गई है। विदेश मंत्रालय के अधिकारी उन राज्य सरकारों के संपर्क में हैं जहाँ से लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए हैं।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में बाढ़ का कहर अभी पूरी तरह थमा नहीं है और राहत एवं पुनर्निर्माण कार्य जारी हैं। भारत की ओर से लगातार तीसरी विशेष उड़ान भेजा जाना दोनों देशों के बीच गहरे पड़ोसी संबंधों को रेखांकित करता है। आने वाले दिनों में और राहत सामग्री भेजे जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।