29 अगस्त 2026
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नवजात बेचने की कोशिश: SSB ने बिहार के गलगलिया में पश्चिम बंगाल की महिला को गिरफ्तार किया, दो माह का शिशु बचाया

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नवजात बेचने की कोशिश: SSB ने बिहार के गलगलिया में पश्चिम बंगाल की महिला को गिरफ्तार किया, दो माह का शिशु बचाया

सारांश

SSB की संयुक्त टीम ने बिहार के गलगलिया बस स्टैंड पर समय रहते कार्रवाई कर दो महीने के शिशु को ₹2.5 लाख में बेचे जाने से बचाया। पश्चिम बंगाल की रिंकू यादव गिरफ्तार; राजस्थान के अज्ञात खरीदार की तलाश जारी। डीएनए जांच की संभावना।

मुख्य बातें

SSB की 41वीं बटालियन ने 29 अगस्त 2026 को बिहार के गलगलिया बस स्टैंड पर अभियान चलाया।
पश्चिम बंगाल के बागडोगरा की रिंकू यादव (37) को कथित तौर पर ₹2.5 लाख में शिशु बेचने की कोशिश में गिरफ्तार किया गया।
बचाए गए शिशु लड़के का जन्म 19 जून 2026 को हुआ था।
महिला का दावा है कि बच्चा उसका अपना है; पुलिस ने डीएनए जांच की संभावना जताई है।
राजस्थान के एक अज्ञात व्यक्ति को बच्चा सौंपा जाना था; पुलिस उसकी पहचान कर रही है।
मामला गलगलिया पुलिस थाने को सौंपा गया; AHTU और राहत ऑर्गनाइजेशन ने अभियान में सहयोग किया।

सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 41वीं बटालियन ने 29 अगस्त 2026 को बिहार के किशनगंज जिले के गलगलिया बस स्टैंड पर एक महिला को कथित तौर पर अपने दो महीने के शिशु को बेचने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया। बचाए गए बच्चे का जन्म 19 जून 2026 को हुआ था और उसे सुरक्षित हिरासत में ले लिया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

एक वरिष्ठ SSB अधिकारी के अनुसार, शिशु को बेचे जाने की सूचना मिलने पर 41वीं बटालियन SSB की ए और जी कंपनी की संयुक्त टीम ने भटगांव-गलगलिया बस स्टैंड पर अभियान चलाया। इस अभियान में SSB रानीडांगा की एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और किशनगंज की गैर-सरकारी संस्था राहत ऑर्गनाइजेशन ने भी सहयोग किया।

गिरफ्तार महिला की पहचान रिंकू यादव (37 वर्ष) के रूप में हुई है, जो पश्चिम बंगाल के बागडोगरा के हाथखोला इलाके की निवासी और अर्जुन यादव की पत्नी है। प्रारंभिक पूछताछ में महिला ने स्वीकार किया कि वह बच्चे को ₹2.5 लाख में बेचने वाली थी।

कथित सौदे का ब्यौरा

पूछताछ के अनुसार, रिंकू यादव को राजस्थान के एक अज्ञात व्यक्ति को बच्चा सौंपना था। महिला ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण उसने यह कदम उठाने की योजना बनाई। यह सौदा भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित बस स्टैंड पर होने वाला था, जो इस मामले को सीमा-पार तस्करी के संभावित कोण से भी जोड़ता है।

महिला लगातार दावा कर रही है कि बच्चा उसका अपना है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, 'महिला लगातार दावा कर रही है कि बच्चा उसका है। इसकी पुष्टि की जाएगी। हमने बागडोगरा के अधिकारियों से संपर्क किया है। जरूरत पड़ने पर डीएनए जांच भी कराई जा सकती है।'

जांच की स्थिति

महिला और शिशु को आगे की जांच के लिए गलगलिया पुलिस थाने को सौंप दिया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित सौदे में कोई अन्य व्यक्ति या नेटवर्क भी शामिल था या नहीं।

गौरतलब है कि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भले ही डीएनए जांच से यह साबित हो जाए कि बच्चा महिला का अपना है, तब भी यह न्यायिक निर्णय होगा कि शिशु को उसकी हिरासत में लौटाया जाए या नहीं — क्योंकि दोबारा बेचे जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में बाल तस्करी के मामलों पर सुरक्षा एजेंसियों की नज़र लगातार बनी हुई है। SSB की AHTU इकाइयाँ इस क्षेत्र में मानव तस्करी रोकने के लिए सक्रिय रूप से काम करती हैं। यह घटना पश्चिम बंगाल-बिहार सीमावर्ती इलाके में बाल संरक्षण की चुनौतियों को एक बार फिर सामने लाती है।

आगे क्या होगा

पुलिस राजस्थान के उस अज्ञात व्यक्ति की पहचान करने की कोशिश कर रही है जिसे बच्चा सौंपा जाना था। शिशु की कस्टडी और महिला के खिलाफ आरोपों का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद अदालत करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अंतर-राज्यीय नेटवर्क की संभावना है। SSB की AHTU की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि बच्चा खरीदने वाला राजस्थानी व्यक्ति अभी भी अज्ञात है — और जब तक वह पकड़ा नहीं जाता, नेटवर्क की जड़ें बरकरार रहेंगी।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गलगलिया में नवजात बिक्री मामले में क्या हुआ?
SSB की 41वीं बटालियन ने 29 अगस्त 2026 को बिहार के किशनगंज जिले के गलगलिया बस स्टैंड पर रिंकू यादव नामक महिला को दो महीने के शिशु को ₹2.5 लाख में बेचने की कोशिश करते गिरफ्तार किया। बच्चे को सुरक्षित बचा लिया गया और मामला गलगलिया पुलिस को सौंप दिया गया।
गिरफ्तार महिला रिंकू यादव कौन है?
रिंकू यादव (37 वर्ष) पश्चिम बंगाल के बागडोगरा स्थित हाथखोला इलाके की निवासी और अर्जुन यादव की पत्नी है। उसने पूछताछ में कथित तौर पर स्वीकार किया कि आर्थिक तंगी के कारण उसने बच्चे को बेचने की योजना बनाई थी।
क्या बच्चा सच में महिला का अपना है?
महिला का दावा है कि बच्चा उसका अपना है, लेकिन पुलिस इसकी पुष्टि के लिए बागडोगरा अधिकारियों से संपर्क कर रही है। जरूरत पड़ने पर डीएनए जांच कराई जा सकती है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बच्चे का उसका होना साबित हो जाने पर भी हिरासत का निर्णय अदालत करेगी।
इस मामले में और कौन शामिल हो सकता है?
पूछताछ के अनुसार, राजस्थान का एक अज्ञात व्यक्ति बच्चे को खरीदने वाला था। पुलिस यह जांच कर रही है कि इस कथित सौदे में कोई बड़ा नेटवर्क भी शामिल था या नहीं। फिलहाल वह व्यक्ति अज्ञात है।
SSB की AHTU क्या है और इसने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) SSB की विशेष इकाई है जो सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव तस्करी रोकने का काम करती है। इस मामले में SSB रानीडांगा की AHTU और NGO राहत ऑर्गनाइजेशन ने संयुक्त अभियान में सहयोग कर शिशु को बचाने में अहम भूमिका निभाई।
राष्ट्र प्रेस
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