सिंगरौली से अपहृत 2 वर्षीय बालिका 36 घंटे में झारखंड से बरामद, आरोपी गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से अपहृत 2 वर्षीय बालिका को पुलिस ने महज 36 घंटे के भीतर झारखंड से सकुशल बरामद कर लिया। 19 मई 2026 को सामने आए इस मामले में आरोपी को उसके गृह जिले लातेहार (झारखंड) से गिरफ्तार किया गया और बालिका को परिजनों के हवाले कर दिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता अपनी 2 वर्षीय पुत्री के साथ बैढ़न बस स्टैंड पर सो रहा था। देर रात नींद खुलने पर बच्ची वहाँ नहीं मिली। आसपास व्यापक तलाश के बाद भी बच्ची का पता न चलने पर किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाने की आशंका जताई गई। सूचना मिलते ही थाना बैढ़न में प्रकरण दर्ज कर तत्काल जाँच शुरू की गई।
विशेष एसआईटी और सघन अभियान
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सिंगरौली षियाज केएम के निर्देशन में विशेष एसआईटी गठित की गई। उप पुलिस अधीक्षक रोशनी पटेल के नेतृत्व में 150 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की 10 विशेष टीमें बालिका की तलाश में लगाई गईं। बैढ़न, विंध्यनगर, मोरवा, बरगवां और माड़ा क्षेत्रों में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, अस्पताल, बाँध, नदियों और सुनसान स्थानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया गया। पुलिस अधीक्षक ने अपहृता एवं आरोपी की सूचना देने पर ₹10,000 के इनाम की घोषणा भी की।
तकनीकी साक्ष्य और सुराग
पुलिस ने लगभग 200 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का विश्लेषण किया। तकनीकी जाँच में एक संदिग्ध व्यक्ति को बालिका के साथ बैढ़न से बिलौजी और फिर माजन मोड़ की ओर जाते हुए देखा गया। बालिका के फोटो पम्पलेट सार्वजनिक स्थानों, ऑटो और बसों में चस्पा कर सोशल मीडिया तथा समाचार पत्रों के माध्यम से प्रसारित किए गए। प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं सीमावर्ती राज्यों के पुलिस थानों को रेडियो संदेश भेजा गया।
झारखंड में आरोपी की गिरफ्तारी
बस चालकों, परिचालकों और ऑटो चालकों से पूछताछ के आधार पर पुलिस को पता चला कि संदिग्ध लातेहार (झारखंड) का निवासी है और बालिका को लेकर अपने गाँव चला गया है। इस सूचना पर विशेष पुलिस टीमें तत्काल झारखंड रवाना हुईं। आरोपी को उसके निवास स्थान से गिरफ्तार कर लिया गया और 2 वर्षीय बालिका को सकुशल बरामद कर परिजनों को सौंप दिया गया।
आगे की कार्रवाई
आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की विधिक कार्यवाही जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस त्वरित कार्रवाई में सीसीटीवी तकनीक, जनसहयोग और अंतर-राज्यीय समन्वय की अहम भूमिका रही। यह मामला बाल अपहरण के विरुद्ध पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया का उदाहरण बनकर सामने आया है।