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लिंगमपल्ली रेलवे स्टेशन से अगवा एक माह की बच्ची बरामद, ₹1.5 लाख में बिक्री; 5 गिरफ्तार

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लिंगमपल्ली रेलवे स्टेशन से अगवा एक माह की बच्ची बरामद, ₹1.5 लाख में बिक्री; 5 गिरफ्तार

सारांश

हैदराबाद के लिंगमपल्ली रेलवे स्टेशन से अगवा एक माह की बच्ची को साइबराबाद पुलिस ने तीन दिनों की गहन जाँच के बाद बरामद किया। बच्ची को ₹1.5 लाख में कोलकाता की एक महिला को बेचा जा चुका था। पाँच आरोपी गिरफ्तार, माँ को बच्ची सौंपी गई।

मुख्य बातें

साइबराबाद पुलिस ने 3 जुलाई 2026 को एक माह की नवजात बच्ची को सकुशल बरामद किया।
बच्ची का अपहरण 30 जून को लिंगमपल्ली रेलवे स्टेशन से उसकी माँ की गोद से किया गया था।
बच्ची को कोलकाता की रहनुमा अली को ₹1.50 लाख में ऑनलाइन भुगतान के ज़रिए बेचा गया।
अंतर-राज्यीय गिरोह के पाँच सदस्य गिरफ्तार — तेलंगाना और कोलकाता से।
श्रीनिवास की अगुवाई में तीन टीमों ने तीन दिनों तक सीसीटीवी फुटेज खंगाल कर मामला सुलझाया।
मामला बीएनएस धारा 137(2), 97, 3(5) और जेजे एक्ट धारा 84 के तहत दर्ज।

साइबराबाद पुलिस ने 3 जुलाई 2026 को एक माह की नवजात बच्ची को सकुशल बरामद कर उसकी माँ को सौंप दिया — यह वही बच्ची थी जिसे 30 जून को हैदराबाद के लिंगमपल्ली रेलवे स्टेशन से अगवा किया गया था और बाद में कोलकाता की एक निसंतान महिला को ₹1.5 लाख में बेच दिया गया था। पुलिस ने इस अंतर-राज्यीय शिशु तस्करी गिरोह के पाँच सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

अपहरण की रात क्या हुआ

कर्नाटक के बीदर जिले की निवासी मालन शांता बाई, जो एक सर्कस दल के साथ काम करती हैं, अपने साथियों के साथ लिंगमपल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर फुटपाथ पर सो रही थीं। उनकी एक माह की बेटी उनकी गोद में सो रही थी। पुलिस के अनुसार, 30 जून की रात कुछ अज्ञात व्यक्ति बच्ची को उठाकर ले गए। बच्ची के रोने की आवाज़ सुनकर माँ की नींद खुली और उन्होंने पीछा करने की कोशिश की, लेकिन आरोपी एक ऑटो-रिक्शा में सवार होकर फरार हो गए।

कैसे रची गई साजिश

जाँच में सामने आया कि कोलकाता की रहनुमा अली (आयु 30 वर्ष) ने हैदराबाद में रहने वाली अपनी मौसी निम्मी जहान उर्फ सीमा अली से पैसे देकर एक बच्चा दिलाने को कहा था। सीमा ने अपनी सहेली सादेक्वा मकसूद उर्फ नाजिया को यह बात बताई, जिसने अपने मंगेतर मोहम्मद जुबेर को इसमें शामिल किया। जुबेर ने अपने साथी मोहम्मद इरफान — जो एक ऑटो चालक है और पहले भी चोरी के एक मामले में आरोपी रह चुका है — से संपर्क कर अपहरण की योजना बनाई। दोनों तेलंगाना के विकाराबाद के रहने वाले हैं।

बच्ची को अगवा करने के बाद आरोपी उसे नाजिया के घर ले गए। 1 जुलाई को रहनुमा अली अपनी मौसी सरवरी के साथ कोलकाता से हैदराबाद फ्लाइट से आईं और बच्ची की कस्टडी ली। जुबेर को ऑनलाइन माध्यम से ₹1.50 लाख का भुगतान किया गया।

पुलिस की कार्रवाई

शिकायत के आधार पर चंदानगर थाने में बीएनएस की धारा 137(2), 97 के साथ धारा 3(5) और जेजे एक्ट की धारा 84 के तहत मामला दर्ज किया गया। सेरिलिंगमपल्ली ज़ोन के आरसी पुरम डिवीजन के एसीपी सी. वाई. श्रीनिवास की अगुवाई में तीन विशेष टीमें गठित की गईं। इन टीमों ने तीन दिनों तक साइबराबाद, मलकाजगिरी और हैदराबाद पुलिस आयुक्तालय क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और सभी संभावित सुरागों की पड़ताल की।

पुलिस ने रहनुमा अली और उसके साथियों के कोलकाता भागने से पहले ही सभी पाँचों आरोपियों को धर दबोचा। साइबराबाद पुलिस आयुक्त डॉ. एम. रमेश ने शुक्रवार को बचाई गई बच्ची को उसकी माँ मालन शांता बाई को सौंपा।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार किए गए पाँच आरोपी हैं — मोहम्मद जुबेर और मोहम्मद इरफान (दोनों विकाराबाद, तेलंगाना); सादेक्वा मकसूद उर्फ नाजिया और निम्मी जहान अली उर्फ सीमा अली (दोनों कोलकाता मूल, हैदराबाद निवासी); तथा रहनुमा अली (कोलकाता), जिन्होंने शिशु को खरीदा था।

आगे की जाँच

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह गिरोह इससे पहले भी इस तरह की घटनाओं में शामिल रहा है। यह मामला रेलवे स्टेशनों पर असुरक्षित परिस्थितियों में रहने वाले प्रवासी मज़दूर परिवारों की कमज़ोरियों को भी उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह गिरोह पहले भी सक्रिय था और कितने और मामले अनसुलझे हैं। रेलवे स्टेशनों पर बेघर और प्रवासी परिवारों की सुरक्षा के लिए ठोस तंत्र की माँग अब और टाली नहीं जा सकती।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लिंगमपल्ली रेलवे स्टेशन से बच्ची का अपहरण कब और कैसे हुआ?
30 जून 2026 की रात हैदराबाद के लिंगमपल्ली रेलवे स्टेशन पर फुटपाथ पर सो रही माँ मालन शांता बाई की गोद से एक माह की बच्ची को अज्ञात व्यक्ति उठाकर ले गए। माँ की नींद बच्ची के रोने से खुली, लेकिन आरोपी ऑटो-रिक्शा में फरार हो गए।
अगवा बच्ची को किसे और कितने में बेचा गया?
पुलिस के अनुसार, बच्ची को कोलकाता की 30 वर्षीया रहनुमा अली को ₹1.50 लाख में ऑनलाइन भुगतान के ज़रिए बेचा गया। रहनुमा अली 1 जुलाई को अपनी मौसी के साथ हैदराबाद आकर बच्ची को ले गई थीं।
साइबराबाद पुलिस ने बच्ची को कैसे बरामद किया?
एसीपी सी. वाई. श्रीनिवास की अगुवाई में तीन विशेष टीमें बनाई गईं जिन्होंने साइबराबाद, मलकाजगिरी और हैदराबाद क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज तीन दिनों तक खंगाले। सभी पाँच आरोपियों को आरोपियों के कोलकाता भागने से पहले ही गिरफ्तार कर बच्ची को सुरक्षित बरामद किया गया।
इस मामले में कितने और कौन-से आरोपी गिरफ्तार हुए?
पाँच आरोपी गिरफ्तार हुए — मोहम्मद जुबेर और मोहम्मद इरफान (विकाराबाद, तेलंगाना), सादेक्वा मकसूद उर्फ नाजिया, निम्मी जहान अली उर्फ सीमा अली (कोलकाता मूल, हैदराबाद निवासी), और रहनुमा अली (कोलकाता)।
इस मामले में कौन-सी कानूनी धाराएँ लगाई गई हैं?
चंदानगर थाने में बीएनएस की धारा 137(2), 97 के साथ धारा 3(5) और जेजे एक्ट की धारा 84 के तहत मामला दर्ज किया गया है। जाँच जारी है और पुलिस गिरोह के अन्य संभावित मामलों की भी पड़ताल कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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