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पुणे रेलवे स्टेशन से एक वर्षीय बच्ची का अपहरण, 16 घंटे में दो महिलाओं समेत तीन गिरफ्तार

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पुणे रेलवे स्टेशन से एक वर्षीय बच्ची का अपहरण, 16 घंटे में दो महिलाओं समेत तीन गिरफ्तार

सारांश

पुणे रेलवे स्टेशन के दत्त मंदिर के पास सोई मां की एक वर्षीय बेटी का अपहरण और 16 घंटे में रिकवरी — यह केस दिखाता है कि सीसीटीवी निगरानी और तेज समन्वय कैसे रेलवे परिसरों में बच्चों की तस्करी की कोशिशों को नाकाम कर सकता है। तीन आरोपी दौंड स्टेशन पर पकड़े गए।

मुख्य बातें

पुणे रेलवे स्टेशन से 30 मई की रात एक वर्षीय बच्ची लीला का अपहरण।
बंडगार्डन पुलिस ने महज 16 घंटे में तीन आरोपियों को दौंड स्टेशन से गिरफ्तार किया।
आरोपी — द्रुपदा गायकवाड़ (35) , राधा आदिवासी (20) और लकी आदिवासी (21) — जालना के निवासी।
जांच में 70 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज ने अहम भूमिका निभाई।
मुख्य आरोपी के कथित तौर पर संतान पैदा करने में असमर्थ होने की बात सामने आई।

पुणे रेलवे स्टेशन से अपहृत एक वर्षीय बच्ची को बंडगार्डन पुलिस ने महज 16 घंटे के भीतर सुरक्षित बरामद करते हुए दो महिलाओं समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। 70 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपियों का पीछा करते हुए उन्हें दौंड रेलवे स्टेशन पर धर दबोचा। बच्ची को उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया है।

कैसे हुआ अपहरण

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता शिवानी अमोल भोसले (21) पुणे जिले के शिरूर तालुका स्थित मालठण गांव की निवासी हैं और मजदूरी का काम करती हैं। पारिवारिक विवाद के बाद वह 30 मई को अपनी एक वर्षीय बेटी लीला के साथ पुणे रेलवे स्टेशन पहुंची थीं। शहर में कोई रिश्तेदार या ठिकाना न होने के कारण उन्होंने रेलवे आरक्षण कार्यालय के सामने स्थित दत्त मंदिर के पास खुले स्थान पर रात बिताने का निर्णय लिया।

रात करीब 9:30 बजे जब शिवानी की नींद खुली, तो बेटी वहां नहीं थी। आसपास तलाश के बाद भी बच्ची का सुराग न मिलने पर उन्होंने बंडगार्डन पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

सीसीटीवी ने खोला राज

वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संतोष पंधारे ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विशेष जांच टीम गठित की और तीन अलग-अलग टीमें मैदान में उतारीं। जांच अधिकारियों ने लगातार 12 घंटे तक पुणे रेलवे स्टेशन और आसपास के 70 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली।

फुटेज में दो महिलाएं और एक पुरुष बच्ची को लेकर प्लेटफॉर्म नंबर 4 से पनवेल-नांदेड़-पनवेल ट्रेन में चढ़ते दिखाई दिए। इसके आधार पर पुलिस ने दौंड और कुर्डुवाड़ी रेलवे स्टेशनों की ओर टीमें रवाना कीं।

दौंड स्टेशन पर दबोचे गए आरोपी

सहायक पुलिस निरीक्षक अभिजीत चौगुले के नेतृत्व में पुलिसकर्मी ज्ञानेश्वर बडे और मनोज भोकारे की टीम दौंड रेलवे स्टेशन पहुंची। रविवार दोपहर करीब 2:25 बजे तीनों संदिग्धों को स्टेशन परिसर में पकड़ लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान द्रुपदा लक्ष्मण गायकवाड़ (35), राधा लकी आदिवासी (20) और लकी संदीप आदिवासी (21) के रूप में हुई है, जो जालना जिले के सुंदरनगर क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं।

बंडगार्डन पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक (अपराध) नीलकंठ जगताप ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने पुणे रेलवे स्टेशन से बच्ची को ले जाने की बात स्वीकार कर ली। इसके बाद तीनों को अपहरण के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।

अपहरण के पीछे का कथित मकसद

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मुख्य महिला आरोपी द्रुपदा गायकवाड़ को कथित तौर पर कुछ समय पहले बिजली का झटका लगा था, जिसके कारण वह स्थायी रूप से संतान पैदा करने की क्षमता खो चुकी थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला ने अपनी मां और बेटी के साथ मिलकर रेलवे स्टेशन से किसी बच्चे के अपहरण की योजना बनाई थी।

आगे की जांच

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अपहरण के पीछे वास्तविक मकसद क्या था और क्या इस घटना के पीछे किसी बड़े गिरोह या बाल-तस्करी रैकेट का हाथ है। मामले की आगे की जांच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर असली सवाल यह है कि क्या आरोपियों का संबंध किसी बड़े नेटवर्क से है, या यह अकेला 'भावनात्मक अपहरण' है जैसा पुलिस का प्रारंभिक आकलन सुझाता है। GRP और RPF की महिला-बच्चा सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी पुनर्विचार ज़रूरी है। सीसीटीवी कवरेज ने काम किया — पर रोकथाम हमेशा रिकवरी से बेहतर है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे रेलवे स्टेशन से बच्ची का अपहरण कब और कैसे हुआ?
30 मई की रात करीब 9:30 बजे, जब शिवानी भोसले अपनी एक वर्षीय बेटी लीला के साथ रेलवे आरक्षण कार्यालय के सामने दत्त मंदिर के पास खुले स्थान पर सो रही थीं, उसी दौरान बच्ची को अगवा कर लिया गया। नींद खुलने पर मां को बेटी गायब मिली।
पुलिस ने आरोपियों तक कैसे पहुंच बनाई?
बंडगार्डन पुलिस ने पुणे रेलवे स्टेशन और आसपास के 70 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की 12 घंटे तक फुटेज खंगाली। फुटेज में आरोपी प्लेटफॉर्म नंबर 4 से पनवेल-नांदेड़-पनवेल ट्रेन में बच्ची के साथ चढ़ते दिखे, जिसके बाद टीम ने उन्हें दौंड स्टेशन पर पकड़ा।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान द्रुपदा लक्ष्मण गायकवाड़ (35), राधा लकी आदिवासी (20) और लकी संदीप आदिवासी (21) के रूप में हुई है। तीनों जालना जिले के सुंदरनगर क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं।
अपहरण का कथित मकसद क्या था?
पुलिस के प्रारंभिक खुलासे के अनुसार, मुख्य आरोपी द्रुपदा गायकवाड़ को कथित तौर पर बिजली के झटके के बाद संतान पैदा करने की क्षमता खो देने के कारण उसने अपनी मां और बेटी के साथ मिलकर बच्चे के अपहरण की योजना बनाई थी। हालांकि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह या रैकेट तो शामिल नहीं है।
क्या बच्ची सुरक्षित है?
हां, एक वर्षीय बच्ची लीला को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है और उसे उसकी मां शिवानी भोसले के सुपुर्द कर दिया गया है। बच्ची को कोई शारीरिक नुकसान नहीं हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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