उत्तराखंड 'शुद्धिकरण' विवाद: राजेंद्र पाल गौतम बोले — पुलिस दबाव में न आए, महेंद्र भट्ट पर भी हो मुकदमा
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 29 अगस्त को उत्तराखंड में हुए कथित 'शुद्धिकरण' प्रकरण, सोनिया गांधी की पुस्तक के प्रकाशन से कथित इनकार और आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संविधान के अनुच्छेद 17 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम के तहत अस्पृश्यता पर प्रतिबंध है, और इस मामले में उत्तराखंड पुलिस को बिना किसी दबाव के तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
शुद्धिकरण विवाद और कानूनी माँग
गौतम ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उत्तराखंड पुलिस सरकार के दबाव में नहीं आएगी। उनके अनुसार, कानून यह कहता है कि यदि पुलिस को फोन पर भी इस प्रकार की शिकायत मिले, तो तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक सरकार इस मामले में निष्क्रिय रही, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
गौतम ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के महेंद्र भट्ट पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस तरह भट्ट ने कथित शुद्धिकरण का समर्थन किया है, उसे देखते हुए उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
सोनिया गांधी की पुस्तक प्रकरण
सोनिया गांधी की पुस्तक के प्रकाशन से कथित इनकार के मुद्दे पर गौतम ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि मीडिया हो या प्रकाशक, सभी पर दबाव है। उन्होंने दावा किया कि मीडिया पर सरकारी दबाव की बात किसी से छुपी नहीं है। हालाँकि, उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि नवंबर तक यह पुस्तक प्रकाशित होकर आ जाएगी और कई प्रकाशन संस्थान इसे प्रकाशित करने के लिए आगे आए हैं।
उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर गौतम ने कहा कि पार्टी की ओर से जल्द ही इस पर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 403 सीटों पर कांग्रेस की तैयारी जारी है और पार्टी मजबूती से चुनाव लड़ेगी। गौतम ने दावा किया कि इस बार उत्तर प्रदेश में सरकार बदलेगी।
सपा का पक्ष
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष महंत शुभम गिरि ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी में महारैली के बाद वहाँ शुद्धिकरण किया गया, जो अत्यंत गलत है। शुभम गिरि ने कहा कि इस तरह की मानसिकता नहीं होनी चाहिए और BJP को इस मामले में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि भाजपा में भी कई दलित नेता हैं।
आगे क्या होगा
यह मामला उत्तराखंड में राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। विपक्षी दलों की माँग है कि पुलिस संविधान और कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करे। सोनिया गांधी की पुस्तक के प्रकाशन और उत्तर प्रदेश चुनाव की सीट-बंटवारे की घोषणा आने वाले हफ्तों में राजनीतिक हलचल को और तेज कर सकती है।