30 जून 2026
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यूपी सीट बंटवारे पर राजीव राय का राजेंद्र पाल गौतम को करारा जवाब: 'पहचान बनाने के लिए दे रहे बयान'

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यूपी सीट बंटवारे पर राजीव राय का राजेंद्र पाल गौतम को करारा जवाब: 'पहचान बनाने के लिए दे रहे बयान'

सारांश

कांग्रेस के नए यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सपा के साथ बराबर सीट-बंटवारे की वकालत की, तो सपा सांसद राजीव राय ने उन्हें आड़े हाथों लिया — कहा, 'पहले उन्हें यूपी में कोई नहीं जानता था।' 2022 में महज 2 सीट जीतने वाली कांग्रेस की यह माँग गठबंधन के भीतर तनाव का नया संकेत है।

मुख्य बातें

सपा सांसद राजीव राय ने 30 जून 2026 को कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के बराबर सीट-बंटवारे के बयान की आलोचना की।
गौतम ने माँग की थी कि अप्रैल 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और सपा के बीच बराबर सीटें बँटें।
राय ने कहा कि गठबंधन की बातचीत मीडिया के ज़रिए नहीं, बल्कि दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच होनी चाहिए।
2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 403 में से केवल 2 सीटें जीती थीं।
गौतम ने हाल ही में अजय कुमार लल्लू की जगह यूपी कांग्रेस प्रभारी का पद संभाला है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद राजीव राय ने 30 जून 2026 को कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के सीट-बंटवारे संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। राय ने आरोप लगाया कि गौतम महज अपनी पहचान स्थापित करने और मीडिया में बने रहने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं।

विवाद की जड़: गौतम का बराबर सीट-बंटवारे का आग्रह

कांग्रेस के नए यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने एक मीडिया साक्षात्कार में कहा था, 'मैं व्यक्तिगत रूप से चाहूंगा कि हिस्सेदारी बराबर हो। बातचीत के बाद शीर्ष नेतृत्व इस पर फैसला करेगा। मुझे पहले से कोई घोषणा करने का अधिकार नहीं है, लेकिन हम निश्चित रूप से बराबर हिस्सेदारी की वकालत करेंगे।' गौतम का यह बयान अप्रैल 2027 में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र समाजवादी पार्टी के साथ 403 सीटों की बराबर-बराबर हिस्सेदारी की माँग के रूप में देखा जा रहा है।

राजीव राय का पलटवार

सपा सांसद राय ने गौतम के बयान को 'गैर-ज़िम्मेदाराना' करार देते हुए कहा, 'वह नए हैं। उत्तर प्रदेश में पहले उन्हें कोई नहीं जानता था, इसलिए अपनी पहचान बनाने के लिए वह ऐसे बयान दे रहे हैं। मैं उनसे यह भी गुज़ारिश करूंगा कि गैर-ज़िम्मेदाराना बातें करने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी उत्तर प्रदेश में सरकार बदलना है।'

राय ने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन के भीतर सीट-बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दे मीडिया के ज़रिए नहीं, बल्कि दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधी बातचीत से तय होने चाहिए।

इंडिया गठबंधन की एकजुटता पर जोर

राय ने कहा, 'हमें इंडिया गठबंधन को मज़बूत करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। मीडिया के ज़रिए बात करने से न तो गठबंधन मज़बूत होगा और न ही सरकार में कोई बदलाव आएगा।' उन्होंने जोड़ा कि यदि गौतम की पार्टी को कोई बात करनी है, तो कांग्रेस नेतृत्व को सपा नेतृत्व से सीधे संपर्क करना चाहिए या गौतम को औपचारिक रूप से अधिकृत किया जाना चाहिए।

यह ऐसे समय में आया है जब संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 को लोकसभा में हराने के बाद इंडिया गठबंधन के प्रति जनता की अपेक्षाएँ बढ़ी हैं। राय ने इसका उल्लेख करते हुए कहा कि इस जीत के बाद गठबंधन की ज़िम्मेदारी और बड़ी हो गई है।

गौतम की पृष्ठभूमि और मायावती प्रकरण

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को यूपी का प्रभारी नियुक्त किया, जिन्होंने अजय कुमार लल्लू की जगह ली है। इससे पहले गौतम ने कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती के आवास पर अचानक दौरा किया था, लेकिन वे उनसे मिल नहीं पाए थे। राय ने उस घटना का हवाला देते हुए भी कहा कि उस वक्त भी गौतम को उत्तर प्रदेश में कोई नहीं जानता था।

2022 का संदर्भ और 2027 की चुनौती

2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 403 में से केवल 2 सीटें जीती थीं। ऐसे में बराबर सीट-बंटवारे की माँग को राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस की कमज़ोर ज़मीनी स्थिति को देखते हुए महत्वाकांक्षी मान रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित इस राज्य में अगले विधानसभा चुनाव अप्रैल 2027 के आसपास प्रस्तावित हैं, जिसके लिए इंडिया गठबंधन की रणनीति अभी तक औपचारिक रूप से तय नहीं हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वह इंडिया गठबंधन के भीतर उस बड़े तनाव को उजागर करती है जहाँ छोटे साझेदार बड़ी हिस्सेदारी चाहते हैं, बिना उसके अनुरूप संगठनात्मक बल के। 2027 से पहले यदि यह सार्वजनिक बयानबाज़ी जारी रही, तो गठबंधन की विश्वसनीयता मतदाताओं के सामने कमज़ोर पड़ सकती है — जो BJP के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक उपहार होगा।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजीव राय और राजेंद्र पाल गौतम के बीच विवाद किस बात पर है?
विवाद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए सीट-बंटवारे को लेकर है। कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सपा के साथ बराबर सीटें माँगी हैं, जिस पर सपा सांसद राजीव राय ने आपत्ति जताई और कहा कि ऐसे बयान मीडिया में नहीं, शीर्ष नेतृत्व के बीच दिए जाने चाहिए।
राजेंद्र पाल गौतम कौन हैं और उन्हें यूपी प्रभारी क्यों बनाया गया?
राजेंद्र पाल गौतम आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री हैं, जिन्हें पिछले हफ्ते कांग्रेस ने अजय कुमार लल्लू की जगह उत्तर प्रदेश का नया प्रभारी नियुक्त किया। 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के मद्देनज़र यह बदलाव किया गया।
2022 के यूपी चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा था?
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 403 सीटों में से केवल 2 सीटें जीती थीं। यही कारण है कि सपा, कांग्रेस की बराबर सीट-बंटवारे की माँग को व्यावहारिक नहीं मान रही।
इंडिया गठबंधन में यूपी के लिए सीट-बंटवारा कब तय होगा?
अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। सपा सांसद राजीव राय के अनुसार, यह फैसला दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधी बातचीत से होना चाहिए। यूपी विधानसभा चुनाव अप्रैल 2027 के आसपास प्रस्तावित हैं।
गौतम का मायावती के घर दौरा किस संदर्भ में था?
पिछले महीने राजेंद्र पाल गौतम कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती के आवास पर अचानक पहुँचे थे, लेकिन वे उनसे मिल नहीं पाए। सपा सांसद राय ने इस प्रकरण का हवाला देते हुए कहा कि उस वक्त भी गौतम को यूपी में कोई नहीं जानता था।
राष्ट्र प्रेस
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