यूपी सीट बंटवारे पर राजीव राय का राजेंद्र पाल गौतम को करारा जवाब: 'पहचान बनाने के लिए दे रहे बयान'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद राजीव राय ने 30 जून 2026 को कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के सीट-बंटवारे संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। राय ने आरोप लगाया कि गौतम महज अपनी पहचान स्थापित करने और मीडिया में बने रहने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं।
विवाद की जड़: गौतम का बराबर सीट-बंटवारे का आग्रह
कांग्रेस के नए यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने एक मीडिया साक्षात्कार में कहा था, 'मैं व्यक्तिगत रूप से चाहूंगा कि हिस्सेदारी बराबर हो। बातचीत के बाद शीर्ष नेतृत्व इस पर फैसला करेगा। मुझे पहले से कोई घोषणा करने का अधिकार नहीं है, लेकिन हम निश्चित रूप से बराबर हिस्सेदारी की वकालत करेंगे।' गौतम का यह बयान अप्रैल 2027 में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र समाजवादी पार्टी के साथ 403 सीटों की बराबर-बराबर हिस्सेदारी की माँग के रूप में देखा जा रहा है।
राजीव राय का पलटवार
सपा सांसद राय ने गौतम के बयान को 'गैर-ज़िम्मेदाराना' करार देते हुए कहा, 'वह नए हैं। उत्तर प्रदेश में पहले उन्हें कोई नहीं जानता था, इसलिए अपनी पहचान बनाने के लिए वह ऐसे बयान दे रहे हैं। मैं उनसे यह भी गुज़ारिश करूंगा कि गैर-ज़िम्मेदाराना बातें करने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी उत्तर प्रदेश में सरकार बदलना है।'
राय ने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन के भीतर सीट-बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दे मीडिया के ज़रिए नहीं, बल्कि दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधी बातचीत से तय होने चाहिए।
इंडिया गठबंधन की एकजुटता पर जोर
राय ने कहा, 'हमें इंडिया गठबंधन को मज़बूत करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। मीडिया के ज़रिए बात करने से न तो गठबंधन मज़बूत होगा और न ही सरकार में कोई बदलाव आएगा।' उन्होंने जोड़ा कि यदि गौतम की पार्टी को कोई बात करनी है, तो कांग्रेस नेतृत्व को सपा नेतृत्व से सीधे संपर्क करना चाहिए या गौतम को औपचारिक रूप से अधिकृत किया जाना चाहिए।
यह ऐसे समय में आया है जब संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 को लोकसभा में हराने के बाद इंडिया गठबंधन के प्रति जनता की अपेक्षाएँ बढ़ी हैं। राय ने इसका उल्लेख करते हुए कहा कि इस जीत के बाद गठबंधन की ज़िम्मेदारी और बड़ी हो गई है।
गौतम की पृष्ठभूमि और मायावती प्रकरण
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को यूपी का प्रभारी नियुक्त किया, जिन्होंने अजय कुमार लल्लू की जगह ली है। इससे पहले गौतम ने कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती के आवास पर अचानक दौरा किया था, लेकिन वे उनसे मिल नहीं पाए थे। राय ने उस घटना का हवाला देते हुए भी कहा कि उस वक्त भी गौतम को उत्तर प्रदेश में कोई नहीं जानता था।
2022 का संदर्भ और 2027 की चुनौती
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 403 में से केवल 2 सीटें जीती थीं। ऐसे में बराबर सीट-बंटवारे की माँग को राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस की कमज़ोर ज़मीनी स्थिति को देखते हुए महत्वाकांक्षी मान रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित इस राज्य में अगले विधानसभा चुनाव अप्रैल 2027 के आसपास प्रस्तावित हैं, जिसके लिए इंडिया गठबंधन की रणनीति अभी तक औपचारिक रूप से तय नहीं हुई है।