यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस का बड़ा फेरबदल, राजेंद्र पाल गौतम बने यूपी प्रभारी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 26 जून 2026 को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को धार देते हुए राजेंद्र पाल गौतम को राज्य का नया एआईसीसी प्रभारी नियुक्त किया। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी. वेणुगोपाल द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
नेतृत्व परिवर्तन का विवरण
गौतम ने अजय कुमार लल्लू की जगह ली है, जो अब तक उत्तर प्रदेश के एआईसीसी प्रभारी थे। वेणुगोपाल के हस्ताक्षर वाले आधिकारिक नोट में कहा गया है, 'कांग्रेस अध्यक्ष ने तत्काल प्रभाव से संजय दत्त (हरियाणा), लालजी देसाई (ओडिशा) और राजेंद्र पाल गौतम (उत्तर प्रदेश) को इन राज्यों का एआईसीसी प्रभारी नियुक्त किया है।' पार्टी ने एक साथ ओडिशा और हरियाणा के लिए भी नए प्रभारी घोषित किए। वेणुगोपाल ने निवर्तमान प्रभारियों — अविनाश पांडे, बीके हरिप्रसाद और अजय कुमार लल्लू — के योगदान की सराहना की।
यूपी चुनाव 2027 की पृष्ठभूमि
भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित उत्तर प्रदेश में अप्रैल 2027 के आसपास विधानसभा की 403 सीटों के लिए मतदान होना है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पार्टी के पास प्रदेश में संगठनात्मक पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती है। गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस केवल 2 सीटें जीत सकी थी, जो उसके इतिहास के सबसे कमज़ोर प्रदर्शनों में से एक है।
राम मंदिर ट्रस्ट विवाद और यूपी राजनीति
यह संगठनात्मक बदलाव ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस ने अयोध्या राम मंदिर दान और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों में कथित अनियमितताओं को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (यूपीसीसी) के अध्यक्ष अजय राय और यूपी कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने नई दिल्ली में एआईसीसी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि भक्तों द्वारा दान किए गए फंड और राम मंदिर परियोजना से जुड़ी संपत्तियों का गलत प्रबंधन हुआ है, और उन्होंने ट्रस्ट के कामकाज की गहन जांच (ऑडिट) की माँग की।
जांच पर कांग्रेस की माँगें
अजय राय ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी अपर्याप्त है और उसके लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है। उन्होंने जांच टीम में कथित तौर पर विवादित अधिकारियों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए। राय ने माँग की कि जांच 7 से 10 दिनों के भीतर पूरी हो और इसकी निगरानी हाई कोर्ट के किसी मौजूदा जज द्वारा की जाए। उनका आरोप है कि चंदा संग्रह, जमीन के लेन-देन और चढ़ावे के प्रबंधन — कई स्तरों पर गड़बड़ियाँ हुईं और यह संसाधनों के 'व्यवस्थित एवं संगठित दुरुपयोग' का मामला है।
आगे की राह
नए प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के सामने 403 विधानसभा सीटों पर पार्टी को पुनर्जीवित करने और BJP के मज़बूत जनाधार से मुकाबले की दोहरी चुनौती है। विशेषज्ञों का मानना है कि राम मंदिर ट्रस्ट विवाद को पार्टी एक राजनीतिक मुद्दे के रूप में भुनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन प्रदेश में संगठनात्मक ढाँचे को मज़बूत किए बिना यह रणनीति सीमित असर दिखा सकती है।