राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT जांच की निष्पक्षता पर कांग्रेस के राजेंद्र पाल गौतम के तीखे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (यूपीसीसी) के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 15 जुलाई 2026 को अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। गौतम ने स्पष्ट कहा कि इस जांच से उन्हें अधिक उम्मीद नहीं है, क्योंकि SIT के सदस्यों की नियुक्ति उसी सरकार ने की है जिसके कार्यकाल में मंदिर ट्रस्ट का गठन हुआ था।
SIT पर उठाए सवाल
गौतम ने कहा, 'जांच के लिए गठित SIT के सदस्यों की नियुक्ति उसी सरकार द्वारा की गई है, जिसके कार्यकाल में मंदिर ट्रस्ट का गठन हुआ और मंदिर निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी। ऐसे में जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले के तार राजनीतिक संगठनों से जुड़े हुए हैं, जिससे निष्पक्ष जांच की संभावना और कम हो जाती है।
राजनीतिक संगठनों पर आरोप
कांग्रेस नेता ने कहा, 'जिन लोगों ने धर्म और भगवान राम के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया, अगर उन्हीं से जुड़े किसी मामले में चढ़ावे की चोरी का आरोप सामने आता है तो जनता निष्पक्ष जांच की अपेक्षा करती है।' गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण सामने आने के बाद से ही विपक्षी दलों ने जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं।
ज्ञानवापी विवाद पर रुख
ज्ञानवापी विवाद में मध्यस्थता से समाधान न निकलने पर प्रतिक्रिया देते हुए गौतम ने कहा कि देश और संविधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान सभा में दिए गए उस भाषण का हवाला दिया, जिसमें अंबेडकर ने धर्म को देश से ऊपर रखने और व्यक्ति पूजा के खतरों के प्रति आगाह किया था।
सामाजिक सद्भाव की अपील
गौतम ने कहा, 'भारत में लंबे समय तक हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय के लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते आए हैं। जब से धर्म का इस्तेमाल राजनीति के लिए बढ़ा है, तब से समाज में विवाद और दूरी बढ़ी है।' उनके अनुसार, संविधान की भावना के अनुरूप सभी धर्मों और समुदायों के बीच समानता और आपसी सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
आगे क्या
SIT की संभावित अंतिम रिपोर्ट का इंतजार अभी जारी है। विपक्षी दलों की माँग है कि जांच की निगरानी किसी स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक समिति द्वारा की जाए, ताकि जनता का विश्वास बना रहे। यह प्रकरण आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।