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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत संजय दास को SIT पर भरोसा, अभिषेक दास ने हनुमान प्रतिमा गायब होने का मुद्दा उठाया

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत संजय दास को SIT पर भरोसा, अभिषेक दास ने हनुमान प्रतिमा गायब होने का मुद्दा उठाया

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब दो मोर्चों पर है — एक SIT जांच जो दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने का वादा करती है, और दूसरा महंत अभिषेक दास का वह सवाल जो सबसे गहरा है: हनुमान जी की प्रतिमा गर्भगृह से गई कहाँ? संतों के अनुसार, जब तक यह प्रतिमा वापस नहीं आती, व्यवस्था दुरुस्त नहीं होगी।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT जांच का भरोसा दिया है।
हनुमानगढ़ी के महंत स्वामी संजय दास जी महाराज ने कहा — दोषी चाहे जितना प्रभावशाली हो, सलाखों के पीछे जाएगा।
महंत बाबा अभिषेक दास ने हनुमान जी की प्रतिमा को गर्भगृह से हटाए जाने को मौजूदा विवादों की मूल वजह बताया।
अभिषेक दास के अनुसार, जिस दिन हनुमान प्रतिमा गर्भगृह में पुनः स्थापित होगी, मंदिर की समस्त व्यवस्था सुचारू हो जाएगी।
SIT जांच 20 जून 2026 को जारी है; रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की राशि से जुड़े विवाद पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है और स्पष्ट किया है कि विशेष जांच दल (SIT) की जांच में सच्चाई सबके सामने आएगी। इस बीच, सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञान दास जी महाराज के उत्तराधिकारी स्वामी संजय दास जी महाराज ने SIT जांच पर पूरा भरोसा जताया है, जबकि महंत बाबा अभिषेक दास ने मंदिर परिसर से हनुमान जी की प्रतिमा हटाए जाने को मौजूदा विवादों की जड़ बताया है।

SIT जांच पर महंत संजय दास का भरोसा

स्वामी संजय दास ने कहा, 'मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हनुमानगढ़ी मंदिर का दौरा किया। एक SIT का गठन किया गया है और जांच प्रक्रिया चल रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो या कोई आम नागरिक ही क्यों न हो। चढ़ावे की राशि में चोरी करने वाले व्यक्ति पर जरूर कार्रवाई होगी और वह सलाखों के पीछे होगा।'

उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकरण में गलत बयानबाजी करने वालों को संयम बरतना चाहिए, क्योंकि SIT की जांच में स्वतः ही सच्चाई उजागर हो जाएगी। उनके अनुसार, इस मामले में किसी को अनावश्यक टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है।

हनुमान प्रतिमा का मुद्दा — अभिषेक दास की चिंता

महंत बाबा अभिषेक दास ने राम मंदिर विवाद को एक अलग कोण से देखा। उन्होंने कहा कि जिस दिन भगवान श्रीराम के साथ रहने वाले हनुमान जी की मूर्ति को गर्भगृह में पुनः स्थापित किया जाएगा, उस दिन से पूरी व्यवस्था फिर से सुचारू रूप से काम करने लगेगी।

उन्होंने सवाल उठाया कि अयोध्या के सभी महंत, संत और अधिकारी इस तथ्य से भली-भांति परिचित हैं कि हनुमान जी सदैव भगवान राम के साथ रहे हैं। उनके अनुसार, 'आज हनुमान जी की मूर्ति कहाँ चली गई है? अब न तो उनकी विधिवत पूजा हो रही है और न ही उचित देखभाल।'

गौरतलब है कि अभिषेक दास ने यह भी स्मरण दिलाया कि जब प्रभु श्रीराम टेंट में विराजमान थे, तब भी हनुमान जी उनके साथ स्थापित रहते थे। अस्थायी व्यवस्था के उस दौर में भी यह परंपरा अखंड रही।

मुख्य विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद श्रीराम मंदिर, अयोध्या में चढ़ावे की राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर उठा है। 20 जून 2026 को इस मामले में SIT जांच जारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हनुमानगढ़ी दौरे के बाद संतों और महंतों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और धार्मिक मसले राष्ट्रीय चर्चा में हैं।

संतों की माँग — पारदर्शी जांच

महंत बाबा अभिषेक दास ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर से जुड़े मौजूदा विवादों की गहन और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने इन विवादों को सीधे तौर पर मंदिर परिसर से हनुमान जी की प्रतिमा हटाए जाने से जोड़ा और कहा कि संतों तथा धार्मिक परंपराओं से जुड़ी व्यवस्थाएं भी उसी दिन सुचारू होंगी जब यह प्रतिमा पुनः गर्भगृह में स्थापित होगी।

SIT की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इस पूरे प्रकरण में आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या जांच मंदिर ट्रस्ट के भीतर की संरचनात्मक खामियों तक पहुँचती है या केवल व्यक्तिगत दोष तक सीमित रहती है। मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता का अभाव पहले भी चर्चा में रहा है, और यह विवाद उसी पुरानी चुनौती को नए रूप में सामने लाता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
यह विवाद अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की राशि के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया गया है और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
SIT जांच में अब तक क्या हुआ है?
SIT का गठन हो चुका है और जांच प्रक्रिया 20 जून 2026 तक जारी है। महंत संजय दास के अनुसार, जांच पूरी होने पर दोषियों को उनके प्रभाव की परवाह किए बिना सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
हनुमान प्रतिमा का मुद्दा राम मंदिर विवाद से कैसे जुड़ा है?
महंत बाबा अभिषेक दास ने आरोप लगाया है कि राम मंदिर के गर्भगृह से हनुमान जी की प्रतिमा हटा दी गई है और न तो उनकी पूजा हो रही है और न ही उचित देखभाल। उनके अनुसार, मंदिर के मौजूदा विवाद इसी से जुड़े हैं।
महंत अभिषेक दास के अनुसार समाधान क्या है?
महंत बाबा अभिषेक दास का मानना है कि जिस दिन हनुमान जी की प्रतिमा को गर्भगृह में पुनः स्थापित किया जाएगा, मंदिर की समस्त व्यवस्था और धार्मिक परंपराएं फिर से सुचारू हो जाएंगी।
महंत संजय दास कौन हैं और उनकी भूमिका क्या है?
स्वामी संजय दास जी महाराज सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञान दास जी महाराज के उत्तराधिकारी हैं। उन्होंने SIT जांच पर भरोसा जताते हुए सभी पक्षों से गलत बयानबाजी बंद करने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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