राम मंदिर चढ़ावा विवाद: साधु-संतों ने कहा — दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, SIT जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं को लेकर उठे विवाद पर 30 जून 2026 को साधु-संतों ने एकजुट होकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। संतों ने स्पष्ट किया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट विशेष जांच दल (SIT) के साथ पूरा सहयोग कर रहा है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी स्थिति में नहीं बख्शा जाएगा।
हिमांशु दास की प्रतिक्रिया
हिमांशु दास ने मंगलवार को बातचीत में कहा, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार का बयान 'सराहनीय और पूरी तरह सच' है। उन्होंने कहा, "ट्रस्ट अपना काम कर रहा है। उसने सभी पहलुओं की जांच के निर्देश दिए हैं और जांच जारी है। जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह कोई भी हो, उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।"
हिमांशु दास ने यह भी जोड़ा, "यह मंदिर का धन है, रामलला सरकार का धन है — यह समस्त सनातन समाज की आस्था से जुड़ा धन है। इसलिए दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई अवश्यंभावी है।"
महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज का आह्वान
महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने कहा कि भगवान राम के भक्तों को जांच पर पूरा भरोसा है और सच्चाई सामने आ रही है। उन्होंने कहा, "जिसने भी चोरी की है और उसके पीछे जो भी मास्टरमाइंड है, उसे भी बख्शा नहीं जाएगा।"
उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि दोषियों के घरों पर बुलडोजर चलेगा और उन्हें जेल भेजा जाएगा। महामंडलेश्वर ने यह भी कहा कि जिस प्रकार काशी विश्वनाथ मंदिर में नए नियम लागू हैं, उसी तर्ज पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भी नए नियम लागू किए जाएंगे और नए सदस्य शामिल होंगे।
साकेत भवन मंदिर के महंत का बयान
साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास ने कहा कि ट्रस्ट ने ही SIT के गठन के निर्देश दिए थे और वह जांच के हर पहलू में सहयोग कर रहा है। उन्होंने बताया, "SIT के निर्देश पर आरोपियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं और उनसे धन भी बरामद किया गया है।"
महंत सीताराम दास ने स्पष्ट किया कि दोषियों की संपत्तियां जब्त की जाएंगी और उन्हें रामलला को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "सभी के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई की जाएगी — बुलडोजर का भी इस्तेमाल होगा।"
आगे क्या होगा
SIT की जांच जारी है और आरोपियों से धन की बरामदगी हो चुकी है। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे की राशि में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। संतों के अनुसार, जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन में संरचनात्मक सुधार किए जाएंगे।