29 जून 2026
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: आलोक कुमार बोले — ट्रस्ट सच्चाई सामने लाने को प्रतिबद्ध, SIT जांच जारी

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: आलोक कुमार बोले — ट्रस्ट सच्चाई सामने लाने को प्रतिबद्ध, SIT जांच जारी

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में ट्रस्ट ने आंतरिक जांच, SIT अनुरोध, एफआईआर और दो प्रमुख पदाधिकारियों के इस्तीफे जैसे ठोस कदम उठाए हैं। VHP अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि ₹80 लाख की रिकवरी हो चुकी है और आठ नामजद आरोपियों की जांच जारी है।

मुख्य बातें

VHP के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने 29 जून को वीडियो संदेश जारी कर ट्रस्ट की प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रारंभिक आंतरिक जांच में करीब ₹80 लाख की रिकवरी हुई और कुछ लोगों की संलिप्तता सामने आई।
ट्रस्ट के अनुरोध पर SIT गठित हुई; रिपोर्ट के बाद 8 नामजद आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज।
तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने निष्पक्ष जांच के लिए अपने पदों से इस्तीफा दिया।
आलोक कुमार ने विपक्षी नेताओं के पुराने मामलों का हवाला देते हुए इस्तीफे की माँग को खारिज किया।

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा विवाद में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने सोमवार, 29 जून को स्पष्ट किया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मामले की निष्पक्ष और शीघ्र जांच सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की सर्वोच्च प्राथमिकता सच्चाई को सार्वजनिक करना और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई कराना है।

मुख्य घटनाक्रम

आलोक कुमार ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए बताया कि घटना प्रकाश में आने के तुरंत बाद ट्रस्ट ने प्रारंभिक आंतरिक जांच कराई, जिसमें कुछ व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आई और करीब ₹80 लाख की रिकवरी की गई। उन्होंने कहा, 'राम जन्मभूमि के सभी ट्रस्टी इस घटना की पूरी जांच को लेकर गंभीर हैं और इसके लिए सक्रिय रूप से व्यवस्था कर रहे हैं।'

प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों के बाद ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मामले की SIT जांच का अनुरोध किया। जब SIT अयोध्या पहुंची, तो ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने स्वयं जांच में सहयोग की पेशकश की और कहा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए — उन्होंने जांच अधिकारियों से पहले उनसे ही पूछताछ करने की बात कही।

एफआईआर और इस्तीफे

आलोक कुमार ने बताया कि SIT की शुरुआती रिपोर्ट आने के बाद ट्रस्ट की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसमें SIT द्वारा चिन्हित आठ व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। एफआईआर में अन्य संभावित आरोपियों की जांच का प्रावधान भी रखा गया है।

जब यह सवाल उठा कि पदाधिकारियों के पद पर रहते हुए जांच प्रभावित हो सकती है, तो चंपत राय और ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया। आलोक कुमार के अनुसार, इन कदमों से यह स्पष्ट होता है कि ट्रस्ट निष्पक्ष जांच के पक्ष में है।

विपक्ष पर पलटवार

विपक्षी दलों की ओर से उठाई जा रही माँगों पर प्रतिक्रिया देते हुए आलोक कुमार ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का उल्लेख किया और कहा कि उन पर आरोप लगने और गिरफ्तारी के बाद भी उन्होंने पद नहीं छोड़ा था। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और बोफोर्स मामले का भी हवाला दिया। इसके साथ ही उन्होंने नेशनल हेराल्ड मामले का संदर्भ देते हुए कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर टिप्पणी की और कहा कि पद छोड़ने की माँग करने वालों को अपने आचरण पर भी विचार करना चाहिए।

ट्रस्ट की प्रतिबद्धता

आलोक कुमार ने अपने वीडियो संदेश के अंत में दोहराया कि राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से उठाए गए समस्त कदम — आंतरिक जांच, SIT अनुरोध, एफआईआर और इस्तीफे — यह प्रमाणित करते हैं कि संस्था पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अयोध्या में राम मंदिर के प्रति देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था और ध्यान केंद्रित है, जिससे इस विवाद का राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर व्यापक असर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में SIT की विस्तृत रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया इस मामले की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

एफआईआर और स्वैच्छिक इस्तीफे — संस्थागत जवाबदेही की दिशा में सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन असली परीक्षा SIT की अंतिम रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता से होगी। ₹80 लाख की रिकवरी प्रारंभिक है; कुल चढ़ावे की तुलना में यह राशि कितनी है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। आलोक कुमार का विपक्ष पर पलटवार राजनीतिक रूप से समझ में आता है, लेकिन यह तर्क मूल प्रश्न — मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता की व्यवस्था कितनी मज़बूत है — से ध्यान हटा देता है। श्रद्धालुओं की आस्था और करोड़ों रुपये के चढ़ावे की जवाबदेही के लिए केवल जांच नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संस्थागत सुधार की ज़रूरत है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में अनियमितता का मामला सामने आया है, जिसमें प्रारंभिक जांच में कुछ व्यक्तियों की संलिप्तता पाई गई और करीब ₹80 लाख की रिकवरी हुई। इस मामले में SIT जांच चल रही है और आठ नामजद आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है।
SIT जांच में अब तक क्या हुआ है?
ट्रस्ट के अनुरोध पर SIT गठित की गई और जब वह अयोध्या पहुंची तो तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने स्वयं सहयोग की पेशकश की। SIT की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर आठ नामजद व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है और अन्य संभावित आरोपियों की जांच भी जारी है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा क्यों दिया?
जब यह सवाल उठा कि पदाधिकारियों के पद पर रहते हुए जांच प्रभावित हो सकती है, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा ने स्वेच्छा से अपने पद छोड़ दिए ताकि निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ हो सके। VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने इसे ट्रस्ट की पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
विपक्ष की माँगों पर ट्रस्ट का क्या रुख है?
VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने विपक्ष की माँगों को खारिज करते हुए अरविंद केजरीवाल, पीवी नरसिम्हा राव और नेशनल हेराल्ड मामले का हवाला दिया। उनका कहना है कि पद छोड़ने की माँग करने वालों को अपने आचरण पर भी विचार करना चाहिए।
इस मामले में आगे क्या होने की उम्मीद है?
SIT की विस्तृत अंतिम रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया आगे की दिशा तय करेगी। एफआईआर में नामजद आठ आरोपियों के अलावा अन्य संभावित संलिप्त व्यक्तियों की भी जांच होनी है, और ट्रस्ट ने सभी आरोपों की विस्तृत जांच की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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