राम मंदिर चढ़ावा विवाद: साधु-संतों ने कहा — दोषियों पर चलेगा बुलडोजर, होगी कड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद पर साधु-संतों ने मंगलवार, 30 जून को कड़ा रुख अपनाया और स्पष्ट किया कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार के बयान के समर्थन में एकाधिक धर्माचार्यों ने मुखर होकर जाँच प्रक्रिया में पूर्ण विश्वास जताया।
हिमांशु दास की प्रतिक्रिया
संत हिमांशु दास ने कहा, 'आलोक कुमार ने जो कहा, वह सराहनीय है और पूरी तरह सच है। ट्रस्ट अपना काम कर रहा है। उसने सभी पहलुओं की जांच के निर्देश दिए हैं और जांच जारी है। जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह कोई भी हो, उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह धन केवल मंदिर का नहीं, बल्कि 'समस्त सनातन समाज की आस्था से जुड़ा' है।
महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज का बयान
महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने कहा कि भगवान राम के भक्तों को जाँच पर पूरा भरोसा है और सच्चाई सामने आ रही है। उन्होंने कहा, 'जिसने भी चोरी की है और उसके पीछे जो भी मास्टरमाइंड है, उसे भी बख्शा नहीं जाएगा।' महाराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि 'चोरों के घरों पर बुलडोजर चलेगा और उन्हें जेल भी भेजा जाएगा।' उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जिस तरह काशी विश्वनाथ मंदिर में नए नियम लागू हैं, उसी प्रकार राम मंदिर में भी नए नियम और नए सदस्य शामिल किए जाएंगे।
महंत सीताराम दास का रुख
साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास ने बताया कि ट्रस्ट, SIT की जाँच में पूरा सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा, 'SIT के निर्देश पर आरोपियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं और उनसे धन भी बरामद किया गया है।' महंत ने स्पष्ट किया कि दोषियों की संपत्तियाँ जब्त की जाएंगी और उन्हें रामलला को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि SIT के गठन का निर्देश स्वयं ट्रस्ट ने ही दिया था।
जाँच की स्थिति और आगे की राह
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर प्रबंधन को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। SIT की जाँच जारी है और अब तक आरोपियों से धन बरामद होने की पुष्टि हुई है। संतों का एकमत संदेश है कि रामलला के धन से जुड़ी किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में ट्रस्ट की ओर से मंदिर प्रबंधन में संरचनात्मक बदलाव और नए नियमों की घोषणा संभव है।