15 अगस्त 2026
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बड़वानी में सरकारी देरी पर CM मोहन यादव का एक्शन: 7 अधिकारी सस्पेंड, जन-विश्वास अभियान में सुनाई फटकार

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बड़वानी में सरकारी देरी पर CM मोहन यादव का एक्शन: 7 अधिकारी सस्पेंड, जन-विश्वास अभियान में सुनाई फटकार

सारांश

बड़वानी में जन-विश्वास अभियान के मंच से CM मोहन यादव ने वर्षों की सरकारी लापरवाही का हिसाब लिया — एक ही दिन में 7 अधिकारी निलंबित। म्यूटेशन के लिए 6 साल, आवास किश्त के लिए घर बनने तक का इंतज़ार — यही वे मामले थे जिन्होंने कार्रवाई को अपरिहार्य बना दिया।

मुख्य बातें

CM मोहन यादव ने 14 अगस्त को बड़वानी में 'मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान' के तहत 7 अधिकारियों को निलंबित करने के आदेश दिए।
तहसीलदार आशा परमार और पटवारी मांगीलाल नरगावे व ललित बोरसे को जमीन म्यूटेशन में 6 साल की देरी के लिए निलंबित किया गया।
PM आवास योजना (शहरी) में देरी पर दो पूर्व CMO मायाराम सोलंकी , जगदीश धाकड़ और AE राजू डावर निलंबित; एसके सिन्हा को कारण बताओ नोटिस।
संबल योजना में अप्रैल 2019 से लंबित सहायता न मिलने पर जनपद पंचायत CEO सौरभ सिंह ठाकुर निलंबित।
'मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना' और पशुधन बीमा भुगतान में देरी की जाँच के आदेश भी जारी।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार, 14 अगस्त को बड़वानी में आयोजित जिला-स्तरीय शिकायत निवारण कार्यक्रम में नागरिकों को सरकारी सेवाएँ और योजनाओं का लाभ समय पर न देने के लिए सात अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए। यह कार्रवाई 'मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान' के तहत हुई, जिसमें यादव ने सीधे शिकायतकर्ताओं से बातचीत कर लंबित मामलों की समीक्षा की।

मुख्य घटनाक्रम

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जमीन के म्यूटेशन (नाम-अंतरण), आवास सहायता, कल्याणकारी भुगतान और पशुधन बीमा से जुड़े कई मामलों की समीक्षा की। शिकायतकर्ताओं की व्यथाएँ सुनने के बाद उन्होंने लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

राजपुर तहसील के शिकायतकर्ता अजय-लाल ने बताया कि उन्होंने 2016 में अपने पिता की मृत्यु के बाद जमीन के म्यूटेशन के लिए आवेदन किया था, लेकिन यह प्रक्रिया 2022 में जाकर पूरी हुई। इसके अलावा उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पंजीकरण और भुगतान में भी देरी का सामना करना पड़ा। इस पर यादव ने तत्कालीन तहसीलदार आशा परमार और पटवारी मांगीलाल नरगावेललित बोरसे को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया। उल्लेखनीय है कि परमार अभी धार जिले में डिप्टी कलेक्टर के पद पर तैनात हैं।

आवास योजना में देरी पर तीन और अधिकारी निलंबित

एक अन्य मामले में शिकायतकर्ता रूपेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने 2019 में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत आवेदन किया था। जियो-टैगिंग 2022 में पूरी हुई और किश्त की प्रक्रिया 2023 में शुरू हुई, फिर भी पहली किश्त उन्हें 10 अगस्त को मिली — जब उनका घर पहले ही बन चुका था। इस लापरवाही पर मुख्यमंत्री ने दो पूर्व मुख्य नगर पालिका अधिकारियों मायाराम सोलंकी और जगदीश धाकड़, तथा असिस्टेंट इंजीनियर राजू डावर को निलंबित किया। साथ ही इंदौर में शहरी प्रशासन के संयुक्त निदेशक एसके सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

संबल योजना में देरी पर भी कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने 'संबल योजना' के तहत अंतिम संस्कार सहायता और अनुग्रह राशि देने में देरी के लिए जनपद पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी सौरभ सिंह ठाकुर को भी निलंबित करने का आदेश दिया। एक शिकायतकर्ता ने अप्रैल 2019 में सहायता के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसे मदद नहीं मिली, जबकि प्राथमिकता सूची में नीचे मौजूद 16 लाभार्थियों को पहले ही सहायता दी जा चुकी थी।

इसके अतिरिक्त यादव ने 'मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना' और पशुधन बीमा के तहत भुगतान में देरी की जाँच के भी आदेश दिए।

सीएम की चेतावनी

मुख्यमंत्री यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोगों को अपने हक के लाभों के लिए एक सरकारी दफ्तर से दूसरे दफ्तर के चक्कर नहीं लगवाए जाने चाहिए और शिकायतों के निपटारे में कोई भी अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं है। शुक्रवार देर रात जारी सरकारी बयान के अनुसार कुल मिलाकर एक तहसीलदार, दो पटवारी, दो मुख्य नगर पालिका अधिकारी, एक असिस्टेंट इंजीनियर और एक जनपद पंचायत सीईओ को निलंबित किया गया।

आगे क्या होगा

निलंबित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जाँच शुरू होने की संभावना है। एसके सिन्हा को जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब आने के बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई तय होगी। यह अभियान राज्य के अन्य जिलों में भी जारी रहने के संकेत हैं, जिससे सरकारी सेवाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ये व्यक्तिगत विफलताएँ नहीं — प्रणालीगत खामियाँ हैं। सार्वजनिक कार्यक्रम में की गई कार्रवाई दृश्यमान जवाबदेही तो देती है, पर विभागीय जाँच और दोषसिद्धि के बिना निलंबन अक्सर अस्थायी साबित होते हैं। यह अभियान तभी सार्थक होगा जब निलंबन के बाद की प्रक्रिया भी उतनी ही पारदर्शी हो।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान क्या है?
यह मध्य प्रदेश सरकार का एक जिला-स्तरीय शिकायत निवारण कार्यक्रम है, जिसमें मुख्यमंत्री सीधे नागरिकों से मिलकर उनकी शिकायतें सुनते हैं और लंबित सरकारी सेवाओं पर तत्काल कार्रवाई करते हैं। 14 अगस्त को बड़वानी में आयोजित इस कार्यक्रम में CM मोहन यादव ने 7 अधिकारियों को निलंबित किया।
बड़वानी में किन अधिकारियों को निलंबित किया गया और क्यों?
तहसीलदार आशा परमार, पटवारी मांगीलाल नरगावे और ललित बोरसे को जमीन म्यूटेशन में 6 साल की देरी के लिए; मायाराम सोलंकी, जगदीश धाकड़ और राजू डावर को PM आवास योजना की किश्त में देरी के लिए; और सौरभ सिंह ठाकुर को संबल योजना के तहत 2019 से लंबित सहायता न देने के लिए निलंबित किया गया।
PM आवास योजना में देरी का शिकायतकर्ता का मामला क्या था?
शिकायतकर्ता रूपेश शर्मा ने 2019 में PM आवास योजना (शहरी) के तहत आवेदन किया था। जियो-टैगिंग 2022 में और किश्त प्रक्रिया 2023 में शुरू हुई, फिर भी पहली किश्त 10 अगस्त को मिली — जब घर पहले ही बन चुका था।
एसके सिन्हा को कारण बताओ नोटिस क्यों जारी किया गया?
इंदौर में शहरी प्रशासन के संयुक्त निदेशक एसके सिन्हा को PM आवास योजना (शहरी) की किश्त जारी करने में हुई देरी की प्रशासनिक जिम्मेदारी के संदर्भ में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनके जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
इस कार्रवाई से आम नागरिकों पर क्या असर होगा?
यह कार्रवाई सरकारी सेवाओं में जवाबदेही का संदेश देती है और लंबित योजनाओं — जैसे म्यूटेशन, आवास किश्त, संबल सहायता — को प्राथमिकता से निपटाने का दबाव बनाती है। हालाँकि विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक सुधार के लिए प्रणालीगत बदलाव भी आवश्यक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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