छिंदवाड़ा में CMHO, तहसीलदार और पटवारी निलंबित; CM मोहन यादव ने जन-विश्वास अभियान की शुरुआत की
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 7 अगस्त को छिंदवाड़ा से मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान की शुरुआत करते हुए तीन अधिकारियों — मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी (CMHO), तहसीलदार और एक पटवारी — को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इन अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतें मिलने पर मुख्यमंत्री ने मौके पर ही कार्रवाई का आदेश दिया, जो प्रशासनिक जवाबदेही के प्रति उनके कड़े रुख का संकेत है।
अभियान की शुरुआत और निलंबन का संदर्भ
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने छिंदवाड़ा को मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान की प्रारंभिक स्थली चुना। अभियान के उद्घाटन के दौरान ही उन्हें जिले के कुछ अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतें प्राप्त हुईं, जिस पर उन्होंने बिना देर किए CMHO, तहसीलदार और पटवारी को निलंबित करने का आदेश जारी किया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मुहिम चला रही है।
जन-विश्वास अभियान: क्या है यह पहल
इस अभियान के तहत मंत्रालय से लेकर जिला स्तर तक के सभी वरिष्ठ अधिकारी अब प्रत्येक शुक्रवार को कार्यालय छोड़कर फील्ड में जाएंगे और आमजन से सीधे संवाद करेंगे। मुख्यमंत्री यादव ने स्पष्ट किया कि इस दिन अपरिहार्य स्थिति को छोड़कर किसी भी स्तर पर कोई बैठक आयोजित नहीं होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, 'मैं स्वयं भी इस अभियान का हिस्सा बन रहा हूं।' उन्होंने जोड़ा कि सभी जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं के शीघ्र समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे।
अभियान के उद्देश्य
मुख्यमंत्री यादव ने अभियान के पाँच प्रमुख लक्ष्य गिनाए — क्षेत्र में जाकर जनता से सीधा संवाद, शिकायतों का शत-प्रतिशत निराकरण, फील्ड की वास्तविक स्थितियों का फीडबैक, पर्यवेक्षण तंत्र को सुदृढ़ करना और प्रशासन की पारदर्शी एवं संवेदनशील छवि का निर्माण। जिला कलेक्टर एक सप्ताह पूर्व भ्रमण क्षेत्र चिन्हित करेंगे और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सूचित करेंगे।
क्या होगा आगे
अभियान के अंतर्गत भोपाल से लेकर संभाग और जिला स्तर तक सभी वरिष्ठ अधिकारी, मंत्रीगण और स्थानीय जनप्रतिनिधि प्रत्येक शुक्रवार फील्ड में उपस्थित रहेंगे। निलंबित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जाँच की प्रक्रिया भी शुरू होने की संभावना है। यह अभियान आने वाले हफ्तों में पूरे मध्य प्रदेश में विस्तारित होगा, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही की एक नई परंपरा स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।