4 जुलाई 2026
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मध्य प्रदेश में 711 वादे लंबित: उमंग सिंघार ने मोहन यादव सरकार को बताया 'घोषणाओं की सरकार'

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मध्य प्रदेश में 711 वादे लंबित: उमंग सिंघार ने मोहन यादव सरकार को बताया 'घोषणाओं की सरकार'

सारांश

मुख्यमंत्री कार्यालय की अपनी मॉनिटरिंग रिपोर्ट ने विपक्ष को हथियार दे दिया — 10 विभागों की 711 घोषणाएं लंबित, PWD में 191 में से 149 अधूरी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का सवाल: ढाई साल में जनता को वादे ज़्यादा मिले या पूरे हुए काम?

मुख्य बातें

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 4 जुलाई को मोहन यादव सरकार को 'घोषणाओं की सरकार' करार दिया।
मुख्यमंत्री कार्यालय की मॉनिटरिंग रिपोर्ट के अनुसार 10 प्रमुख विभागों की 711 घोषणाएं अब भी लंबित हैं।
विकास वादों में करीब 70 प्रतिशत अभी तक पूरे नहीं हुए।
लोक निर्माण विभाग में 191 में से 149 घोषणाएं अधूरी — सबसे खराब स्थिति।
पंचायत, नगरीय विकास, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य और जनजातीय कार्य विभागों में भी 70%+ घोषणाएं लंबित।
सिंघार ने कहा — जनता अब नए वादे नहीं, पुराने वादों का हिसाब चाहती है।

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 4 जुलाई को मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को 'घोषणाओं की सरकार' करार देते हुए आरोप लगाया कि 10 प्रमुख विभागों की 711 घोषणाएं अब भी अधूरी पड़ी हैं। उनके अनुसार, यह खुलासा स्वयं मुख्यमंत्री कार्यालय की मॉनिटरिंग रिपोर्ट से हुआ है, जो सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

मुख्य घटनाक्रम

सिंघार ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक विस्तृत बयान में कहा कि विकास के नाम पर किए गए करीब 70 प्रतिशत वादे आज तक पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, 'हर मंच से नए वादे किए जाते हैं, लेकिन पुराने वादों का हिसाब कोई नहीं देता। घोषणाएं होती हैं, फाइलें बनती हैं और फिर वही घोषणाएं वर्षों तक कागज़ों में दबी रह जाती हैं।'

यह ऐसे समय में आया है जब मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार अपने ढाई साल पूरे कर रही है और विपक्ष जनता के बीच जवाबदेही का मुद्दा उठाने की कोशिश में है।

सबसे खराब स्थिति किस विभाग की

नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, सर्वाधिक चिंताजनक स्थिति लोक निर्माण विभाग (PWD) की है, जहाँ 191 में से 149 घोषणाएं अब तक अधूरी हैं। इसके अलावा पंचायत, नगरीय विकास, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य और जनजातीय कार्य विभागों में भी 70 प्रतिशत से अधिक घोषणाएं लंबित बताई गई हैं।

गौरतलब है कि ये वे विभाग हैं जो सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े हैं — सड़क, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और ग्रामीण विकास। इन क्षेत्रों में अधूरी घोषणाओं का असर सबसे निचले स्तर पर महसूस होता है।

विपक्ष का सरकार पर हमला

सिंघार ने तीखे शब्दों में कहा कि 'सवाल यह है कि क्या सरकार के लिए घोषणा करना ही उपलब्धि बन गया है?' उन्होंने यह भी कहा कि 'विकास की पहचान घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीन पर पूरे हुए कामों से होती है।'

उन्होंने जनता की ओर से सरकार से माँग की कि मोहन यादव के ढाई साल के कार्यकाल का लेखा-जोखा दिया जाए — नए वादे नहीं, पुराने वादों का हिसाब।

आम जनता पर असर

आलोचकों का कहना है कि लोक निर्माण, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विभागों में अधूरी योजनाओं का सीधा खामियाजा ग्रामीण और आदिवासी समुदायों को भुगतना पड़ता है। जनजातीय कार्य विभाग में 70 प्रतिशत से अधिक लंबित घोषणाएं इस बात का संकेत हैं कि हाशिए पर रहने वाले वर्गों की प्राथमिकताएं कागज़ों से बाहर नहीं निकल पाईं।

क्या होगा आगे

विपक्ष के इस हमले के बाद राज्य सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना है कि वह लंबित घोषणाओं की स्थिति पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दे। मॉनिटरिंग रिपोर्ट के आधार पर उठाए गए इन सवालों का जवाब मोहन यादव सरकार को विधानसभा या अन्य मंचों पर देना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

आंतरिक निगरानी तंत्र के हैं। लोक निर्माण, स्वास्थ्य और जनजातीय कार्य जैसे विभागों में 70 प्रतिशत से अधिक लंबित घोषणाएं बताती हैं कि समस्या किसी एक विभाग की नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की व्यापक संस्कृति की है। ढाई साल में यदि आधे से भी कम वादे पूरे हुए हैं, तो सवाल केवल गति का नहीं, प्राथमिकता और जवाबदेही के ढाँचे का भी है। मध्य प्रदेश में 2028 के चुनावी चक्र को देखते हुए, यह रिपोर्ट विपक्ष के लिए एक दीर्घकालिक राजनीतिक हथियार बन सकती है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमंग सिंघार ने मोहन यादव सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि मोहन यादव सरकार के 10 प्रमुख विभागों की 711 घोषणाएं अब भी लंबित हैं, यानी करीब 70 प्रतिशत वादे अधूरे हैं। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री कार्यालय की अपनी मॉनिटरिंग रिपोर्ट के आधार पर उजागर किया।
मध्य प्रदेश में सबसे अधिक लंबित घोषणाएं किस विभाग में हैं?
सिंघार के अनुसार, सबसे खराब स्थिति लोक निर्माण विभाग (PWD) की है जहाँ 191 में से 149 घोषणाएं पूरी नहीं हुई हैं। पंचायत, नगरीय विकास, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य और जनजातीय कार्य विभागों में भी 70 प्रतिशत से अधिक घोषणाएं अधूरी बताई गई हैं।
यह मॉनिटरिंग रिपोर्ट क्या है जिसका जिक्र किया गया है?
यह मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा तैयार की गई एक आंतरिक निगरानी रिपोर्ट है जो विभिन्न विभागों में की गई घोषणाओं की पूर्णता की स्थिति को ट्रैक करती है। विपक्ष के अनुसार, इसी रिपोर्ट से 711 लंबित घोषणाओं का खुलासा हुआ है।
मोहन यादव सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में क्या हुआ?
नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, ढाई साल के कार्यकाल में जनता को पूरे हुए विकास कार्यों से अधिक अधूरी घोषणाएं मिलीं। उन्होंने माँग की कि सरकार नए वादे करने की बजाय पुराने वादों का हिसाब दे।
इन लंबित घोषणाओं का आम जनता पर क्या असर पड़ता है?
लोक निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा और जनजातीय कार्य जैसे विभागों में अधूरी योजनाओं का सीधा असर ग्रामीण और आदिवासी समुदायों पर पड़ता है। आलोचकों का कहना है कि इन क्षेत्रों में लंबित घोषणाएं हाशिए पर रहने वाले वर्गों की बुनियादी जरूरतों को प्रभावित करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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