एमएमडीआर संशोधन के खिलाफ नवीन पटनायक की माँग — ओडिशा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए सरकार
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता और बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने 14 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर माँग की कि 'माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल' (एमएमडीआर संशोधन) के विरोध में ओडिशा विधानसभा का विशेष सत्र तत्काल बुलाया जाए। पटनायक के अनुसार यह संशोधन राज्य की वित्तीय स्वायत्तता और प्राकृतिक संसाधनों पर उसके संवैधानिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा है।
मुख्य घटनाक्रम
नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री माझी को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि बीजद सांसदों ने राज्यसभा में इस विधेयक का कड़ा विरोध किया था और इसे राज्य के वित्तीय अधिकारों का उल्लंघन बताया था। उन्होंने माझी से यह भी आग्रह किया कि वे ओडिशा के संघीय अधिकारों की रक्षा के लिए तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाएं।
पटनायक ने विशेष सत्र की माँग करते हुए कहा कि इसमें इस संशोधन अधिनियम का विरोध करने और राज्य की शक्तियों को केंद्र सरकार द्वारा हड़पे जाने के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया जाए।
संशोधन में क्या है आपत्तिजनक
पटनायक के अनुसार यह संशोधन धारा 2 के तहत खदानों के नियमन के अलावा 'खनिज-युक्त भूमि' को भी केंद्र सरकार के नियंत्रण में लाता है, जो राज्य की भूमि और वित्तीय अधिकार क्षेत्र में सीधा हस्तक्षेप है।
धारा 9डी के तहत संशोधन राज्यों को खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर कोई भी कर, उपकर (सेस) या इसी तरह का शुल्क लगाने से स्पष्ट रूप से रोकता है — चाहे वह मात्रा, मूल्य या रॉयल्टी पर आधारित हो — सिवाय उन शर्तों के जो केंद्र सरकार ने निर्धारित की हों। इसी तरह धारा 13 में संशोधन केंद्र को ऐसे नियम बनाने का विशेष अधिकार देता है जो खनिजों पर कर लगाने की राज्य सरकारों की शक्ति को सीमित करते हैं।
ओडिशा पर आर्थिक असर
पटनायक ने चेतावनी दी कि इन प्रावधानों का ओडिशा जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों पर विशेष रूप से प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिससे भारी राजस्व हानि होगी और राज्य के विकास एजेंडे में बाधा आएगी। उन्होंने कहा, "ओडिशा की प्राकृतिक संपदा यहाँ के लोगों की है, और खनन कार्यों से मिलने वाला राजस्व राज्य भर में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, सामाजिक कल्याण योजनाओं और बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए बहुत ज़रूरी है।"
उन्होंने आगे कहा, "अगर केंद्र सरकार खनिज-युक्त भूमि पर राज्य का अधिकार और उपकर लगाने का उसका हक छीन लेती है, तो ओडिशा के पास केवल प्रदूषण, विस्थापन और खनन का बोझ ही रह जाएगा, जबकि इसके फायदे यहाँ के लोगों से छीन लिए जाएंगे।"
राजनीति से ऊपर का मुद्दा
पटनायक ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह मुद्दा किसी एक दल की राजनीति से ऊपर है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ओडिशा की वित्तीय स्थिरता और भविष्य के विकास को प्रभावित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब खनिज-समृद्ध राज्यों और केंद्र के बीच राजस्व-साझेदारी का विवाद राष्ट्रीय स्तर पर गहरा रहा है।
गौरतलब है कि ओडिशा देश के प्रमुख लौह अयस्क, बॉक्साइट और क्रोमाइट उत्पादक राज्यों में से एक है, और खनन राजस्व राज्य के बजट का एक अहम हिस्सा है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री माझी की प्रतिक्रिया और सर्वदलीय बैठक की संभावना पर सबकी नज़र रहेगी।