15 अगस्त 2026
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एमएमडीआर संशोधन के खिलाफ नवीन पटनायक की माँग — ओडिशा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए सरकार

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एमएमडीआर संशोधन के खिलाफ नवीन पटनायक की माँग — ओडिशा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए सरकार

सारांश

नवीन पटनायक ने एमएमडीआर संशोधन को ओडिशा की वित्तीय स्वायत्तता पर सीधा हमला बताते हुए विधानसभा का विशेष सत्र और सर्वदलीय बैठक की माँग की है। उनका कहना है कि खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने का अधिकार छिनने से राज्य के पास केवल खनन का बोझ बचेगा, फायदा नहीं।

मुख्य बातें

नवीन पटनायक ने 14 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर ओडिशा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की माँग की।
एमएमडीआर संशोधन की धारा 9डी राज्यों को खनिज-युक्त भूमि पर स्वतंत्र रूप से कर या उपकर लगाने से रोकती है।
धारा 13 में संशोधन केंद्र सरकार को खनिज कराधान पर राज्यों की शक्ति सीमित करने वाले नियम बनाने का विशेष अधिकार देता है।
पटनायक ने तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने और विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया।
बीजद सांसदों ने राज्यसभा में इस विधेयक का पहले ही कड़ा विरोध किया था।

ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता और बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने 14 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर माँग की कि 'माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल' (एमएमडीआर संशोधन) के विरोध में ओडिशा विधानसभा का विशेष सत्र तत्काल बुलाया जाए। पटनायक के अनुसार यह संशोधन राज्य की वित्तीय स्वायत्तता और प्राकृतिक संसाधनों पर उसके संवैधानिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा है।

मुख्य घटनाक्रम

नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री माझी को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि बीजद सांसदों ने राज्यसभा में इस विधेयक का कड़ा विरोध किया था और इसे राज्य के वित्तीय अधिकारों का उल्लंघन बताया था। उन्होंने माझी से यह भी आग्रह किया कि वे ओडिशा के संघीय अधिकारों की रक्षा के लिए तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाएं।

पटनायक ने विशेष सत्र की माँग करते हुए कहा कि इसमें इस संशोधन अधिनियम का विरोध करने और राज्य की शक्तियों को केंद्र सरकार द्वारा हड़पे जाने के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया जाए।

संशोधन में क्या है आपत्तिजनक

पटनायक के अनुसार यह संशोधन धारा 2 के तहत खदानों के नियमन के अलावा 'खनिज-युक्त भूमि' को भी केंद्र सरकार के नियंत्रण में लाता है, जो राज्य की भूमि और वित्तीय अधिकार क्षेत्र में सीधा हस्तक्षेप है।

धारा 9डी के तहत संशोधन राज्यों को खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर कोई भी कर, उपकर (सेस) या इसी तरह का शुल्क लगाने से स्पष्ट रूप से रोकता है — चाहे वह मात्रा, मूल्य या रॉयल्टी पर आधारित हो — सिवाय उन शर्तों के जो केंद्र सरकार ने निर्धारित की हों। इसी तरह धारा 13 में संशोधन केंद्र को ऐसे नियम बनाने का विशेष अधिकार देता है जो खनिजों पर कर लगाने की राज्य सरकारों की शक्ति को सीमित करते हैं।

ओडिशा पर आर्थिक असर

पटनायक ने चेतावनी दी कि इन प्रावधानों का ओडिशा जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों पर विशेष रूप से प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिससे भारी राजस्व हानि होगी और राज्य के विकास एजेंडे में बाधा आएगी। उन्होंने कहा, "ओडिशा की प्राकृतिक संपदा यहाँ के लोगों की है, और खनन कार्यों से मिलने वाला राजस्व राज्य भर में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, सामाजिक कल्याण योजनाओं और बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए बहुत ज़रूरी है।"

उन्होंने आगे कहा, "अगर केंद्र सरकार खनिज-युक्त भूमि पर राज्य का अधिकार और उपकर लगाने का उसका हक छीन लेती है, तो ओडिशा के पास केवल प्रदूषण, विस्थापन और खनन का बोझ ही रह जाएगा, जबकि इसके फायदे यहाँ के लोगों से छीन लिए जाएंगे।"

राजनीति से ऊपर का मुद्दा

पटनायक ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह मुद्दा किसी एक दल की राजनीति से ऊपर है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ओडिशा की वित्तीय स्थिरता और भविष्य के विकास को प्रभावित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब खनिज-समृद्ध राज्यों और केंद्र के बीच राजस्व-साझेदारी का विवाद राष्ट्रीय स्तर पर गहरा रहा है।

गौरतलब है कि ओडिशा देश के प्रमुख लौह अयस्क, बॉक्साइट और क्रोमाइट उत्पादक राज्यों में से एक है, और खनन राजस्व राज्य के बजट का एक अहम हिस्सा है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री माझी की प्रतिक्रिया और सर्वदलीय बैठक की संभावना पर सबकी नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका सार संघवाद की उस बुनियादी बहस से जुड़ा है जो खनिज-समृद्ध राज्यों — ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ — में वर्षों से सुलग रही है। एमएमडीआर संशोधन की धारा 9डी और धारा 13 मिलकर राज्यों की राजकोषीय स्वायत्तता को उस क्षेत्र में काटती हैं जहाँ उनकी सबसे बड़ी आय है। असली सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री माझी — जो केंद्र में सत्तारूढ़ दल के सहयोगी हैं — विशेष सत्र की माँग को स्वीकार करने का राजनीतिक साहस दिखाएंगे, या राज्य के हित और गठबंधन की मजबूरी के बीच चुप्पी साध लेंगे। यह द्वंद्व ही इस खबर का असली केंद्र है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमएमडीआर संशोधन बिल क्या है और ओडिशा को इससे क्यों आपत्ति है?
'माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल' खनिज नियमन के दायरे को बढ़ाकर 'खनिज-युक्त भूमि' को भी केंद्र सरकार के नियंत्रण में लाता है। ओडिशा को आपत्ति है क्योंकि इससे राज्य की खनिज राजस्व पर कर लगाने की स्वतंत्र शक्ति सीमित हो जाती है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढाँचे के वित्तपोषण के लिए महत्वपूर्ण है।
नवीन पटनायक ने विशेष विधानसभा सत्र की माँग क्यों की?
पटनायक चाहते हैं कि ओडिशा विधानसभा एमएमडीआर संशोधन के विरोध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करे, जिससे केंद्र पर राजनीतिक दबाव बने। उनका तर्क है कि यह मुद्दा दलगत राजनीति से ऊपर है और राज्य के सभी दलों को एकजुट होकर संघीय अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।
धारा 9डी और धारा 13 में संशोधन से राज्यों पर क्या असर पड़ेगा?
धारा 9डी के तहत राज्य खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर केंद्र की अनुमति के बिना कोई कर, उपकर या शुल्क नहीं लगा सकते। धारा 13 में संशोधन केंद्र को ऐसे नियम बनाने का अधिकार देता है जो राज्यों की कराधान शक्ति को और सीमित कर सकते हैं।
क्या बीजद ने संसद में इस बिल का विरोध किया था?
हाँ, पटनायक के अनुसार बीजद सांसदों ने राज्यसभा में इस विधेयक का कड़ा विरोध किया था और इसे राज्य के वित्तीय अधिकारों का उल्लंघन बताया था।
मुख्यमंत्री माझी से पटनायक ने और क्या माँगें रखी हैं?
पटनायक ने माझी से तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया है ताकि ओडिशा के संघीय अधिकारों और खनिज राजस्व की रक्षा पर आम सहमति बनाई जा सके। इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करने की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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