नवीन पटनायक का MMDR संशोधन पर कड़ा विरोध: 'ओडिशा की वित्तीय स्वायत्तता खतरे में'
सारांश
मुख्य बातें
बीजू जनता दल (BJD) के अध्यक्ष और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 19 अगस्त 2026 को हाल ही में पारित माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट (MMDR एक्ट) में संशोधन का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह कदम ओडिशा की वित्तीय स्वायत्तता को गंभीर नुकसान पहुँचाएगा। एक वीडियो संदेश के ज़रिए उन्होंने राज्य की जनता से इस 'खतरनाक साजिश' के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।
मुख्य घटनाक्रम
पटनायक ने आरोप लगाया कि MMDR संशोधन संसद में बिना पर्याप्त चर्चा के पारित किया गया। उनके अनुसार, राज्यसभा में केवल BJD सांसदों ने ही इस संशोधन का विरोध किया। उन्होंने ओडिशा के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक और विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का आग्रह किया है।
पटनायक ने अपने 24 वर्षों के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि जब 2000 में उनकी सरकार सत्ता में आई थी, तब राज्य को ओवरड्राफ्ट पर निर्भर रहना पड़ता था। उनके दावे के अनुसार, 2024 में सत्ता परिवर्तन के समय राज्य ₹50,000 करोड़ का राजस्व अधिशेष छोड़कर गया था।
खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकार का सवाल
पटनायक ने रेखांकित किया कि ओडिशा में क्रोमाइट, बॉक्साइट, लौह अयस्क, कोयला और मैंगनीज का देश का सबसे बड़ा भंडार है। उनका तर्क है कि प्रस्तावित संशोधन से खनिज संसाधनों पर राज्य का नियंत्रण कमज़ोर होगा और खनन कर से प्राप्त होने वाला राजस्व हर साल हज़ारों करोड़ रुपये घट जाएगा।
उन्होंने कहा, 'हम अपने लोगों की भलाई के लिए अपनी खदानों से टैक्स क्यों नहीं वसूल सकते? हमारे लोग धूल और धुएँ का सामना करेंगे जबकि दिल्ली हमारे संसाधनों से अमीर बनेगी। हम ऐसा नहीं होने देंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि इस राजस्व का उपयोग स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, सड़क, पुल और बिजली के बुनियादी ढाँचे के लिए किया जाता रहा है।
BJP सांसदों पर निशाना
पटनायक ने 2024 के लोकसभा चुनाव में ओडिशा से निर्वाचित 20 भाजपा सांसदों की आलोचना करते हुए कहा कि उनमें से किसी ने भी इस संशोधन के विरोध में आवाज़ नहीं उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 में सरकार बदलने के बाद ओडिशा केंद्र की 'दया' पर निर्भर हो गया है।
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक हमेशा राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता के प्रबल समर्थक रहे थे। नवीन पटनायक ने उनकी विरासत का हवाला देते हुए कहा कि ओडिशा के लोग राज्य को कमज़ोर करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं करेंगे।
आम जनता पर असर
आलोचकों का कहना है कि यदि खनन कर से राजस्व में कमी आई, तो इसका सीधा असर राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं, किसानों को मिलने वाली सहायता और सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे पर पड़ेगा। पटनायक ने चेताया कि यह नुकसान आने वाली पीढ़ियों को भुगतना होगा और 'जेन-जी' के भविष्य पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा।
आगे क्या होगा
पटनायक ने ओडिशा की जनता से राज्य के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा, 'यह धरती हमारी है। ये खदानें हमारी हैं। अपनी आखिरी साँस तक, ओडिशा और उसके लोगों के अधिकारों के लिए मेरी लड़ाई जारी रहेगी।' मुख्यमंत्री को लिखे पत्र पर सरकार की प्रतिक्रिया और विशेष विधानसभा सत्र की माँग पर अगले कुछ दिनों में राजनीतिक स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।