29 अगस्त 2026
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एमएमडीआर संशोधन बिल: नवीन पटनायक ने ओडिशा के BJP सांसदों को लिखा कड़ा पत्र, ₹12,000 करोड़ सालाना नुकसान का दावा

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एमएमडीआर संशोधन बिल: नवीन पटनायक ने ओडिशा के BJP सांसदों को लिखा कड़ा पत्र, ₹12,000 करोड़ सालाना नुकसान का दावा

सारांश

नवीन पटनायक ने ओडिशा के BJP सांसदों को कड़े शब्दों में चेताया — एमएमडीआर संशोधन बिल 2026 को 10 मिनट में पास कराना ओडिशा के साथ विश्वासघात है। 44% राष्ट्रीय खनिज संपदा वाले राज्य को सालाना ₹12,000 करोड़ से अधिक के नुकसान और अपने संसाधनों पर नियंत्रण खोने का खतरा है।

मुख्य बातें

नवीन पटनायक ने 29 अगस्त 2026 को ओडिशा के सभी BJP सांसदों को एमएमडीआर संशोधन बिल के समर्थन पर कड़ा पत्र लिखा।
एमएमडीआर संशोधन बिल 2026 लोकसभा में 13 अगस्त को 10 मिनट से भी कम की चर्चा में पारित हुआ।
पटनायक के अनुसार इस कानून से ओडिशा को प्रतिवर्ष ₹12,000 करोड़ से अधिक का राजस्व नुकसान होगा।
ओडिशा के पास भारत की लगभग 44 प्रतिशत खनिज संपदा है — इस कानून से राज्य का खनिजों पर नियंत्रण कमज़ोर होने की आशंका।
पटनायक ने सांसदों से संशोधन को चुनौती देने और वापस लेने की माँग करने की अपील की।

ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता और बीजू जनता दल (BJD) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने 29 अगस्त 2026 को ओडिशा से निर्वाचित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सभी सांसदों को एक कड़ा पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2026 — जिसे 13 अगस्त को लोकसभा में 10 मिनट से भी कम की चर्चा में पारित किया गया — के समर्थन पर गहरी नाराज़गी जताई है। पटनायक के अनुसार यह कानून ओडिशा के लिए प्रतिवर्ष ₹12,000 करोड़ से अधिक के राजस्व नुकसान का कारण बनेगा।

पत्र में क्या कहा पटनायक ने

नवीन पटनायक ने अपने पत्र में सांसदों को याद दिलाया कि संसद भारतीय लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और ओडिशा की जनता ने उन्हें राज्य के हितों की रक्षा के लिए चुना है। उन्होंने लिखा कि 13 अगस्त का दिन ओडिशा के लिए 'काला दिन' था, जब राज्य के सांसदों के समर्थन से यह विधेयक पारित हुआ।

पटनायक ने तर्क दिया कि एक ऐसे विधेयक को, जिसके प्रावधानों का ओडिशा की जनता पर दूरगामी और व्यापक असर पड़ने वाला है, महज़ दस मिनट की चर्चा में पास करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।

ओडिशा की खनिज संपदा पर संकट

पटनायक ने रेखांकित किया कि ओडिशा के पास भारत की लगभग 44 प्रतिशत खनिज संपदा है। दशकों से राज्य ने अपने खनिज संसाधनों के ज़रिये देश के इस्पात, बिजली, खनन और बुनियादी ढाँचा क्षेत्रों के विकास में अहम भूमिका निभाई है।

उनके अनुसार इस संशोधन के लागू होने से न केवल राज्य को सालाना ₹12,000 करोड़ से अधिक का नुकसान होगा, बल्कि समय के साथ यह राशि लाखों करोड़ रुपये तक पहुँच सकती है। इससे भी बड़ी चिंता यह है कि राज्य का अपने खनिजों और खनिज भूमि पर नियंत्रण एक झटके में छिन जाएगा।

युवाओं और विस्थापितों पर असर

पटनायक ने कहा कि यह कानून ओडिशा के बच्चों और युवाओं के साथ अन्याय है, जिनका भविष्य राज्य के संसाधनों और अवसरों से सीधे जुड़ा है। साथ ही, यह उन लोगों के साथ भी अन्याय है जो खनन की वजह से प्रदूषण, विस्थापन और पर्यावरण क्षरण जैसी कठिनाइयाँ झेलते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में खनन-प्रभावित समुदायों के पुनर्वास और पर्यावरणीय मुआवज़े के मुद्दे पहले से ही विवाद का विषय रहे हैं।

सांसदों से अपील और ऐतिहासिक दायित्व

पटनायक ने सभी BJP सांसदों से अपील की कि वे अपनी अंतरात्मा की सुनें और एमएमडीआर अधिनियम में किए गए संशोधन को चुनौती देते हुए उसे वापस लेने की माँग करें। उन्होंने लिखा कि इतिहास उन लोगों को सम्मान देता है जो अपने लोगों के साथ अन्याय होने पर आवाज़ उठाते हैं।

गौरतलब है कि पटनायक ने स्पष्ट किया कि इतिहास सांसदों को इस आधार पर नहीं आँकेगा कि वे किस पार्टी के साथ खड़े थे, बल्कि इस आधार पर आँकेगा कि जब सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तब वे ओडिशा के लिए खड़े हुए या नहीं। आने वाले दिनों में BJD और सत्तारूढ़ BJP के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या ₹12,000 करोड़ का आँकड़ा राजनीतिक रूप से प्रेरित अनुमान है — इसकी स्वतंत्र पड़ताल अभी बाकी है। गौरतलब है कि खनिज-समृद्ध राज्यों और केंद्र के बीच राजस्व-बँटवारे का विवाद नया नहीं है; झारखंड और छत्तीसगढ़ भी इसी तरह की शिकायतें उठाते रहे हैं। लेकिन 10 मिनट में पारित एक ऐसे विधेयक पर संसदीय बहस की अनुपस्थिति — जिसका असर करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है — यह सवाल ज़रूर उठाती है कि विधायी प्रक्रिया की गुणवत्ता से समझौता हो रहा है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमएमडीआर संशोधन बिल 2026 क्या है और इसे कब पारित किया गया?
माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2026 को लोकसभा में 13 अगस्त 2026 को 10 मिनट से भी कम की चर्चा में पारित किया गया। यह खनन और खनिज विकास से संबंधित मौजूदा कानून में संशोधन करता है, जिसके प्रावधानों का खनिज-समृद्ध राज्यों — विशेष रूप से ओडिशा — पर व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
नवीन पटनायक ने BJP सांसदों को पत्र क्यों लिखा?
नवीन पटनायक ने 29 अगस्त 2026 को यह पत्र इसलिए लिखा क्योंकि ओडिशा के BJP सांसदों ने एमएमडीआर संशोधन बिल के पक्ष में मतदान किया। पटनायक का कहना है कि यह बिल ओडिशा के खनिज संसाधनों पर राज्य के नियंत्रण को कमज़ोर करता है और प्रतिवर्ष ₹12,000 करोड़ से अधिक के राजस्व नुकसान का कारण बनेगा।
ओडिशा को इस कानून से कितना नुकसान होगा?
नवीन पटनायक के अनुमान के अनुसार इस कानून से ओडिशा को प्रतिवर्ष ₹12,000 करोड़ से अधिक का नुकसान होगा, जो समय के साथ लाखों करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है। ओडिशा के पास भारत की लगभग 44 प्रतिशत खनिज संपदा है, इसलिए इस कानून का सबसे बड़ा असर इसी राज्य पर पड़ने की आशंका है।
पटनायक ने सांसदों से क्या माँग की है?
पटनायक ने ओडिशा के सभी BJP सांसदों से अपील की है कि वे एमएमडीआर अधिनियम में किए गए संशोधन को चुनौती दें और इसे वापस लेने की माँग उठाएँ। उन्होंने सांसदों से कहा कि वे पार्टी लाइन से ऊपर उठकर ओडिशा के हितों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए आवाज़ उठाएँ।
इस विवाद का ओडिशा की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
2024 के विधानसभा चुनाव में सत्ता गँवाने के बाद BJD के लिए यह मुद्दा 'ओडिशा अस्मिता' की राजनीति को पुनर्जीवित करने का अवसर है। BJP और BJD के बीच इस मुद्दे पर टकराव आने वाले समय में और तेज़ होने की संभावना है, विशेषकर खनन-प्रभावित ज़िलों में जनमत को प्रभावित करने के लिहाज़ से।
राष्ट्र प्रेस
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