एमएमडीआर संशोधन बिल: नवीन पटनायक ने ओडिशा के BJP सांसदों को लिखा कड़ा पत्र, ₹12,000 करोड़ सालाना नुकसान का दावा
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता और बीजू जनता दल (BJD) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने 29 अगस्त 2026 को ओडिशा से निर्वाचित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सभी सांसदों को एक कड़ा पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2026 — जिसे 13 अगस्त को लोकसभा में 10 मिनट से भी कम की चर्चा में पारित किया गया — के समर्थन पर गहरी नाराज़गी जताई है। पटनायक के अनुसार यह कानून ओडिशा के लिए प्रतिवर्ष ₹12,000 करोड़ से अधिक के राजस्व नुकसान का कारण बनेगा।
पत्र में क्या कहा पटनायक ने
नवीन पटनायक ने अपने पत्र में सांसदों को याद दिलाया कि संसद भारतीय लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और ओडिशा की जनता ने उन्हें राज्य के हितों की रक्षा के लिए चुना है। उन्होंने लिखा कि 13 अगस्त का दिन ओडिशा के लिए 'काला दिन' था, जब राज्य के सांसदों के समर्थन से यह विधेयक पारित हुआ।
पटनायक ने तर्क दिया कि एक ऐसे विधेयक को, जिसके प्रावधानों का ओडिशा की जनता पर दूरगामी और व्यापक असर पड़ने वाला है, महज़ दस मिनट की चर्चा में पास करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
ओडिशा की खनिज संपदा पर संकट
पटनायक ने रेखांकित किया कि ओडिशा के पास भारत की लगभग 44 प्रतिशत खनिज संपदा है। दशकों से राज्य ने अपने खनिज संसाधनों के ज़रिये देश के इस्पात, बिजली, खनन और बुनियादी ढाँचा क्षेत्रों के विकास में अहम भूमिका निभाई है।
उनके अनुसार इस संशोधन के लागू होने से न केवल राज्य को सालाना ₹12,000 करोड़ से अधिक का नुकसान होगा, बल्कि समय के साथ यह राशि लाखों करोड़ रुपये तक पहुँच सकती है। इससे भी बड़ी चिंता यह है कि राज्य का अपने खनिजों और खनिज भूमि पर नियंत्रण एक झटके में छिन जाएगा।
युवाओं और विस्थापितों पर असर
पटनायक ने कहा कि यह कानून ओडिशा के बच्चों और युवाओं के साथ अन्याय है, जिनका भविष्य राज्य के संसाधनों और अवसरों से सीधे जुड़ा है। साथ ही, यह उन लोगों के साथ भी अन्याय है जो खनन की वजह से प्रदूषण, विस्थापन और पर्यावरण क्षरण जैसी कठिनाइयाँ झेलते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में खनन-प्रभावित समुदायों के पुनर्वास और पर्यावरणीय मुआवज़े के मुद्दे पहले से ही विवाद का विषय रहे हैं।
सांसदों से अपील और ऐतिहासिक दायित्व
पटनायक ने सभी BJP सांसदों से अपील की कि वे अपनी अंतरात्मा की सुनें और एमएमडीआर अधिनियम में किए गए संशोधन को चुनौती देते हुए उसे वापस लेने की माँग करें। उन्होंने लिखा कि इतिहास उन लोगों को सम्मान देता है जो अपने लोगों के साथ अन्याय होने पर आवाज़ उठाते हैं।
गौरतलब है कि पटनायक ने स्पष्ट किया कि इतिहास सांसदों को इस आधार पर नहीं आँकेगा कि वे किस पार्टी के साथ खड़े थे, बल्कि इस आधार पर आँकेगा कि जब सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तब वे ओडिशा के लिए खड़े हुए या नहीं। आने वाले दिनों में BJD और सत्तारूढ़ BJP के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज़ होने की संभावना है।