चित्रांगदा सिंह: 'हजारों ख्वाहिशें ऐसी' की गीता से 'खाकी: द बंगाल चैप्टर' की दबंग नेता तक का सफर
सारांश
मुख्य बातें
चित्रांगदा सिंह हिंदी सिनेमा की उन विरल अभिनेत्रियों में हैं, जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से आलोचकों और दर्शकों दोनों का दिल जीत लिया। 30 अगस्त 1976 को जन्मी इस अभिनेत्री ने 2005 में बॉलीवुड में कदम रखा और दो दशकों के करियर में ग्लैमर से लेकर राजनीतिक किरदारों तक, हर रंग में खुद को साबित किया। 'खाकी: द बंगाल चैप्टर' (2025) में उनकी दमदार राजनीतिक भूमिका ने एक बार फिर यह स्थापित किया कि वह किसी एक साँचे में बंधने वाली अभिनेत्री नहीं हैं।
शुरुआती जीवन और मॉडलिंग की दुनिया
चित्रांगदा का बचपन मेरठ, कोटा और बरेली जैसे शहरों में बीता, क्योंकि उनके पिता सेना अधिकारी थे और परिवार को विभिन्न जगहों पर स्थानांतरित होना पड़ता था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मॉडलिंग में कदम रखा। विज्ञापनों और म्यूजिक वीडियो में काम करते-करते वह गुलजार के म्यूजिक वीडियो 'सनसेट प्वाइंट' में नजर आईं, जिसने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई और फिल्मों का दरवाजा खोला।
बॉलीवुड में धमाकेदार शुरुआत
निर्देशक सुधीर मिश्रा की फिल्म 'हजारों ख्वाहिशें ऐसी' (2005) ने चित्रांगदा को रातोंरात चर्चित कर दिया। फिल्म में उन्होंने कॉलेज छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता गीता का संवेदनशील किरदार इतनी स्वाभाविकता से जिया कि उन्हें बेस्ट फीमेल डेब्यू अवॉर्ड से नवाजा गया। यह ऐसे समय में आया जब बॉलीवुड में नई अभिनेत्रियों के लिए पहली ही फिल्म में इस स्तर की आलोचनात्मक सराहना पाना असामान्य था।
उतार-चढ़ाव और करियर की नई दिशा
पहली फिल्म की सफलता के बाद राह आसान नहीं रही। 'कल: यस्टरडे एंड टुमारो' और 2008 में 'सॉरी भाई!' बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाईं। लेकिन 2011 में सुधीर मिश्रा के साथ दोबारा काम करते हुए 'ये साली जिंदगी' में इरफान खान के साथ क्लब सिंगर प्रीति का किरदार निभाया, जो उनके पहले के किरदारों से बिल्कुल अलग था। इसी वर्ष अक्षय कुमार के साथ 'देसी बॉयज' ने उन्हें बड़े दर्शक वर्ग तक पहुँचाया।
इसके बाद 'इंकार' में महत्वाकांक्षी माया और 'आई, मी और मैं' में करियर-केंद्रित महिला के किरदार ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा को रेखांकित किया। गौरतलब है कि इस दौरान उन्होंने स्पेशल अपीयरेंस और डांस नंबरों से भी खुद को बाँधे नहीं रखा।
निर्माता की भूमिका और डिजिटल पर्दे पर छलांग
2018 में चित्रांगदा ने अभिनय से आगे बढ़कर निर्माता की भूमिका भी निभाई। भारतीय हॉकी खिलाड़ी संदीप सिंह की जीवनी पर आधारित स्पोर्ट्स ड्रामा 'सूरमा' को दर्शकों और समीक्षकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इसी वर्ष वह 'साहेब, बीवी और गैंगस्टर 3' में भी नजर आईं।
डिजिटल युग में चित्रांगदा ने खुद को सफलतापूर्वक ढाला। 2021 में 'बॉब बिस्वास' में मैरी बिस्वास का किरदार, 2022 में 'मॉडर्न लव मुंबई' और 2023 में 'गैसलाइट' में रहस्य और भावनाओं से भरी रुक्मिणी की भूमिका — हर बार उन्होंने खुद को नए सिरे से परिभाषित किया।
खाकी और आगे का सफर
2025 में 'खाकी: द बंगाल चैप्टर' में उनके प्रभावशाली राजनीतिक किरदार ने चर्चा बटोरी। पर्दे पर उनका आत्मविश्वास और राजनीतिक तेवर दर्शकों के बीच खासा सराहा गया। दो दशकों के करियर में चित्रांगदा ने यह सिद्ध किया है कि उनकी अभिनय-यात्रा अभी थमी नहीं है — हर नया किरदार उनके कैनवास को और विस्तृत करता है।