केंद्रीय बजट 2027-28 की तैयारी शुरू, 12 अक्टूबर से पूर्व-बजट बैठकें; 6 अक्टूबर तक मंत्रालयों को देने होंगे प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
वित्त मंत्रालय ने 29 अगस्त 2026 को बजट परिपत्र (बजट सर्कुलर) जारी करते हुए केंद्रीय बजट 2027-28 की औपचारिक तैयारी प्रक्रिया शुरू कर दी है। सभी मंत्रालयों और विभागों को 6 अक्टूबर 2026 तक अपने व्यय अनुमान और वित्तीय प्रस्ताव जमा करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद 12 अक्टूबर 2026 से पूर्व-बजट परामर्श बैठकों का दौर शुरू होगा। यह प्रक्रिया हर वर्ष की उस परंपरागत समयसारणी का हिस्सा है जो फरवरी में बजट पेश होने से महीनों पहले शुरू होती है।
बजट परिपत्र में क्या है
वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग द्वारा जारी इस परिपत्र में मंत्रालयों से कहा गया है कि वे वित्त वर्ष 2026-27 के संशोधित अनुमान और वित्त वर्ष 2027-28 के बजट अनुमान तैयार करें। परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि केवल उन्हीं योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए बजटीय प्रावधान प्रस्तावित किए जाएं जिन्हें सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी प्राप्त हो।
सभी अनुदान मांगें यूनियन बजट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (UBIS) के माध्यम से तैयार की जाएंगी। वित्तीय सलाहकारों को UBIS में दर्ज आंकड़ों और दस्तावेजों की गोपनीयता निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
पूर्व-बजट बैठकों में क्या होगा
12 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाली इन बैठकों में विभिन्न मंत्रालयों की वित्तीय जरूरतों, चल रही परियोजनाओं और भविष्य की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इन्हीं चर्चाओं के आधार पर आगामी बजट का समग्र ढांचा तैयार होगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब सरकार 'विकसित भारत @2047' के विजन को नीतिगत प्राथमिकताओं के केंद्र में रखे हुए है।
व्यय अनुशासन पर जोर
परिपत्र में वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मंत्रालयों को यथासंभव सटीक और यथार्थवादी वित्तीय आकलन प्रस्तुत करने होंगे। वित्तीय वर्ष के दौरान अतिरिक्त संसाधनों की मांग को न्यूनतम रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि सार्वजनिक वित्त प्रबंधन अधिक अनुशासित और प्रभावी बना रहे।
सरकार ने यह भी कहा है कि बजटीय संसाधनों का उपयोग पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख तरीके से होना चाहिए। जारी योजनाओं के लिए स्वीकृत व्यय योजनाओं का विस्तृत विवरण भी उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
विकास प्राथमिकताएं और राजकोषीय संतुलन
बजट परिपत्र के अनुसार, सरकार उन व्यय प्रस्तावों को प्राथमिकता देगी जो दीर्घकालिक आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार, रोजगार सृजन, डिजिटल परिवर्तन और सामाजिक विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में सहायक हों। माना जा रहा है कि आगामी बजट में विकास संबंधी प्राथमिकताओं और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
बजट परिपत्र जारी होने के साथ ही वित्त वर्ष 2027-28 के लिए सरकार की पहली बड़ी वित्तीय योजना प्रक्रिया सक्रिय हो गई है, और आने वाले हफ्तों में मंत्रालय-स्तरीय विमर्श का दौर तेज होने की उम्मीद है।