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एमएमडीआर बिल 2026: संजय सेठ का हेमंत सरकार पर हमला, अवैध खनन रोके तो झारखंड कमाएगा ₹3 लाख करोड़

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एमएमडीआर बिल 2026: संजय सेठ का हेमंत सरकार पर हमला, अवैध खनन रोके तो झारखंड कमाएगा ₹3 लाख करोड़

सारांश

केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने रांची में दावा किया कि अवैध खनन रोकने पर झारखंड ₹3 लाख करोड़ कमा सकता है — और ओडिशा के 1,051% राजस्व उछाल का उदाहरण देकर हेमंत सोरेन सरकार से पूछा: जब ओडिशा कर सकता है, तो झारखंड क्यों नहीं?

मुख्य बातें

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 21 अगस्त 2026 को रांची में हेमंत सोरेन सरकार पर एमएमडीआर बिल विरोध को लेकर हमला बोला।
सेठ का दावा — अवैध खनन पूरी तरह रोका जाए तो झारखंड का राजस्व ₹3 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है।
झारखंड में अब तक केवल 11 खदानों की नीलामी, चालू खदानें शून्य ; ओडिशा में 79 नीलामी , 35 सक्रिय ।
यूपीए काल में झारखंड का 10 वर्षीय खनन राजस्व ₹4,662 करोड़ ; मोदी सरकार में ₹33,494 करोड़ ।
ओडिशा में भाजपा सरकार के बाद खनन राजस्व में 1,051% की वृद्धि का हवाला।
सेठ ने कहा — हेमंत सोरेन राजनीतिक कारणों से बिल का विरोध कर रहे हैं, जबकि यह झारखंड के हित में है।

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 21 अगस्त 2026 को रांची में माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 — जिसे एमएमडीआर संशोधन बिल 2026 कहा जा रहा है — का विरोध करने पर झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा प्रहार किया। सेठ ने दावा किया कि यदि राज्य में अवैध खनन पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाए, तो झारखंड का खनन राजस्व ₹3 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है।

मुख्य घटनाक्रम

सेठ ने कहा कि एमएमडीआर बिल का मूल उद्देश्य राज्य की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना, बुनियादी ढाँचे को गति देना और खनन क्षेत्र में पारदर्शिता लाना है। उन्होंने कहा कि संसद में इस बिल पर हुई चर्चा के बाद यह पारित हो गया और इससे राज्यों को अधिक आर्थिक अधिकार मिलेंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार राजनीतिक कारणों से इस बिल का विरोध कर रही है, जबकि वास्तव में यह बिल झारखंड के हित में है।

झारखंड बनाम ओडिशा: खनन राजस्व की तुलना

सेठ ने झारखंड और ओडिशा के खनन प्रदर्शन की तुलना करते हुए कहा कि झारखंड में अब तक केवल 11 खदानों की नीलामी हुई है और चालू खदानों की संख्या शून्य रही है। इसके विपरीत, ओडिशा में 79 खदानों की नीलामी हो चुकी है और उनमें से 35 खदानें सक्रिय हैं।

राजस्व के आँकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि यूपीए शासनकाल में झारखंड ने 10 वर्षों में लगभग ₹4,662 करोड़ का खनन राजस्व अर्जित किया, जबकि मोदी सरकार के 10 वर्षों में यह आँकड़ा बढ़कर ₹33,494 करोड़ हो गया। ओडिशा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के आने के बाद वहाँ खनन राजस्व में 1,051 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

सरकार की दलील और इच्छाशक्ति का सवाल

सेठ ने कहा, 'झारखंड भी करीब ₹3 लाख करोड़ का राजस्व जेनरेट कर सकता है, उसके लिए सिर्फ इच्छाशक्ति चाहिए। ईश्वर ने झारखंड को बहुत कुछ दिया है। मुख्यमंत्री को आंदोलन करना है तो वो करें, लेकिन अवैध खनन के खिलाफ आंदोलन करें, मैं उनके साथ खड़ा रहूँगा। अवैध खनन होगा तो राजस्व कहाँ से आएगा।'

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड सरकार ने केंद्र के एमएमडीआर संशोधन को राज्य के अधिकारों पर अतिक्रमण बताते हुए इसका विरोध किया है। गौरतलब है कि खनिज संपदा से भरपूर होने के बावजूद झारखंड लंबे समय से खनन राजस्व के अपेक्षित लाभ से वंचित रहा है।

आम जनता और रोजगार पर असर

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, एमएमडीआर संशोधन बिल 2026 से पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया लागू होगी, अवैध खनन पर सख्त नियंत्रण होगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने कहा कि इस बिल से राज्य सरकार को अधिक अधिकार और आर्थिक ताकत मिलेगी, जिससे विकास कार्यों को गति मिलेगी।

क्या होगा आगे

एमएमडीआर संशोधन बिल 2026 के संसद में पारित होने के बाद अब इसे लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर होगी। झारखंड सरकार का रुख इस मामले में निर्णायक होगा — यदि राज्य अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई करता है, तो विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह आँकड़ा किस आधार पर निकाला गया, इसका कोई विस्तृत ब्यौरा सामने नहीं आया है। झारखंड और ओडिशा की तुलना सतह पर तार्किक लगती है, पर दोनों राज्यों की भूगर्भीय संरचना, खनिज प्रकार और प्रशासनिक क्षमता में बुनियादी फर्क है — जिसे यह बहस नजरअंदाज करती है। असली सवाल यह है कि केंद्र सरकार ने खुद झारखंड में अवैध खनन रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं, जबकि खनन नियंत्रण की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य और केंद्र दोनों की है। बिना स्वतंत्र ऑडिट और पारदर्शी नीलामी तंत्र के, ये आँकड़े चुनावी बयानबाजी से अधिक कुछ साबित करना मुश्किल है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमएमडीआर संशोधन बिल 2026 क्या है?
माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल 2026 एक केंद्रीय विधेयक है, जो खनन क्षेत्र में पारदर्शी नीलामी, अवैध खनन पर सख्त नियंत्रण और राज्यों को अधिक आर्थिक अधिकार देने का प्रावधान करता है। यह बिल संसद में पारित हो चुका है।
संजय सेठ ने ₹3 लाख करोड़ राजस्व का दावा किस आधार पर किया?
केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कहा कि यदि झारखंड में अवैध खनन पूरी तरह रोक दिया जाए, तो राज्य का खनन राजस्व ₹3 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है। उन्होंने ओडिशा में भाजपा सरकार के बाद 1,051% राजस्व वृद्धि का उदाहरण दिया, हालाँकि इस दावे का विस्तृत आधार सार्वजनिक नहीं किया गया।
झारखंड और ओडिशा के खनन राजस्व में क्या अंतर है?
सेठ के अनुसार, झारखंड में अब तक केवल 11 खदानों की नीलामी हुई और चालू खदानें शून्य हैं, जबकि ओडिशा में 79 नीलामी और 35 सक्रिय खदानें हैं। यूपीए काल में झारखंड का 10 वर्षीय राजस्व ₹4,662 करोड़ था, जो मोदी सरकार में बढ़कर ₹33,494 करोड़ हुआ।
हेमंत सोरेन सरकार एमएमडीआर बिल का विरोध क्यों कर रही है?
झारखंड सरकार ने एमएमडीआर संशोधन को राज्य के अधिकारों पर अतिक्रमण बताते हुए इसका विरोध किया है। संजय सेठ ने इस विरोध को राजनीतिक करार दिया और कहा कि यह बिल वास्तव में झारखंड के हित में है।
एमएमडीआर बिल से झारखंड की आम जनता को क्या फायदा होगा?
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, इस बिल से पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया, अवैध खनन पर नियंत्रण और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही राज्य सरकार को अधिक आर्थिक अधिकार मिलने से विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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