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संजय सेठ की हेमंत सोरेन सरकार से माँग: ₹2,490 करोड़ जल मिशन विफलता पर तुरंत श्वेतपत्र जारी करें

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संजय सेठ की हेमंत सोरेन सरकार से माँग: ₹2,490 करोड़ जल मिशन विफलता पर तुरंत श्वेतपत्र जारी करें

सारांश

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने हेमंत सोरेन सरकार पर ₹2,490 करोड़ के जल जीवन मिशन को विफल करने, ₹18 करोड़ के ऑक्सीजन प्लांट फंड बर्बाद करने और 7 लाख घरों को पेयजल से वंचित रखने का आरोप लगाते हुए तत्काल श्वेतपत्र की माँग की।

मुख्य बातें

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 22 मई को रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल श्वेतपत्र जारी करने की माँग की।
₹2,490 करोड़ की लागत वाला जल जीवन मिशन विफल; राज्य के लगभग 7 लाख घर अभी भी शुद्ध पेयजल से वंचित।
कोरोना काल में ऑक्सीजन प्लांट के लिए दिए गए ₹18 करोड़ के केंद्रीय फंड के दुरुपयोग का आरोप।
राजधानी रांची में 10-10 घंटे की बिजली कटौती, सरकार से कोई स्पष्ट जवाब नहीं।
मानसून से पहले 15 दिनों के भीतर खुले नालों की सफाई और ढकने की माँग।

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 22 मई को रांची स्थित अपने संसदीय कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने राज्य की बिगड़ती आर्थिक स्थिति, बिजली संकट और जल संकट का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री से तत्काल श्वेतपत्र जारी करने की माँग की। उनके अनुसार, केंद्र से मिले अरबों रुपये के फंड का समुचित उपयोग नहीं हुआ और आम जनता इसकी कीमत चुका रही है।

आर्थिक स्थिति और श्वेतपत्र की माँग

सेठ ने कहा, 'झारखंड की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा चुकी है जिससे जनता को परेशानी हो रही है, लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। सरकार को जनता की समस्या पहले दूर करनी चाहिए, जो अभी तक नहीं हुई है।' उन्होंने आग्रह किया कि हेमंत सोरेन सरकार अपनी वित्तीय स्थिति पर श्वेतपत्र जारी कर जनता के सामने सच्चाई रखे, क्योंकि करदाताओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके टैक्स का उपयोग कहाँ और कैसे हो रहा है।

ऑक्सीजन प्लांट फंड दुरुपयोग का आरोप

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए ₹18 करोड़ आवंटित किए थे, लेकिन यह राशि बर्बाद हो गई। उन्होंने कहा कि इसका नतीजा यह है कि आज भी राज्य के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी बनी हुई है — एक ऐसी स्थिति जो सीधे मरीजों की जान पर असर डालती है।

जल जीवन मिशन: ₹2,490 करोड़ और फिर भी ७ लाख घर प्यासे

सेठ ने जल जीवन मिशन योजना पर भी तीखा हमला बोला। उनके अनुसार, ₹2,490 करोड़ की लागत से पाँच चरणों में चलाई गई इस योजना को हेमंत सोरेन सरकार ने पूरी तरह विफल कर दिया। आलोचना करते हुए उन्होंने बताया कि आज भी राज्य के लगभग 7 लाख घर शुद्ध पेयजल से वंचित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार 'हर घर जल' के लक्ष्य को राष्ट्रीय प्राथमिकता बता रही है।

बिजली संकट और मानसून की चेतावनी

केंद्रीय मंत्री ने राजधानी रांची सहित पूरे झारखंड में बिजली कटौती की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि रांची में 10-10 घंटे तक बिजली कट रही है, फिर भी सरकार कोई स्पष्ट जवाब देने में असमर्थ है। इसके साथ ही उन्होंने मानसून से पहले की तैयारियों पर भी चिंता जताई और माँग की कि सरकार 15 दिनों के भीतर सभी खुले नालों को ढकने और उनकी सफाई का काम पूरा करे। गौरतलब है कि बारिश के मौसम में जलभराव और बीमारियाँ झारखंड के शहरी इलाकों में हर साल बड़ी समस्या बनती हैं।

जवाबदेही का सवाल

सेठ ने पूछा कि केंद्र से मिले फंड की बर्बादी और बुनियादी सुविधाओं की विफलता की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा। उनका कहना है कि जब तक सरकार पारदर्शी श्वेतपत्र जारी नहीं करती, जनता को वास्तविक स्थिति का पता नहीं चलेगा। राज्य में आगामी मानसून और बढ़ते नागरिक असंतोष के बीच यह राजनीतिक दबाव हेमंत सोरेन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

490 करोड़ के जल जीवन मिशन में 7 लाख घरों तक पानी न पहुँचना और ₹18 करोड़ के ऑक्सीजन प्लांट फंड की बर्बादी, ये संख्याएँ जवाब माँगती हैं। असली सवाल यह है कि क्या श्वेतपत्र की माँग केवल विपक्षी दबाव की रणनीति है, या राज्य में वाकई वित्तीय अनुशासन की गंभीर कमी है। झारखंड में मानसून दस्तक देने वाला है और नालों की सफाई न होने से शहरी बाढ़ और बीमारी का खतरा हर साल की तरह फिर मँडरा रहा है — यह विफलता किसी एक सरकार की नहीं, बल्कि दीर्घकालिक प्रशासनिक उदासीनता की कहानी है जिसे हर दल ने अनदेखा किया है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय सेठ ने झारखंड सरकार से श्वेतपत्र क्यों माँगा?
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार ने केंद्र से मिले फंड का दुरुपयोग किया और राज्य की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। उनका कहना है कि करदाताओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके टैक्स का उपयोग कैसे हो रहा है।
जल जीवन मिशन झारखंड में कितना सफल रहा?
सेठ के अनुसार, ₹2,490 करोड़ की लागत से पाँच चरणों में चलाई गई जल जीवन मिशन योजना झारखंड में विफल रही। राज्य के लगभग 7 लाख घर अभी भी शुद्ध पेयजल से वंचित हैं।
ऑक्सीजन प्लांट फंड विवाद क्या है?
सेठ ने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए ₹18 करोड़ दिए थे, लेकिन यह राशि बर्बाद हो गई। नतीजतन आज भी राज्य के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी बनी हुई है।
रांची में बिजली संकट कितना गंभीर है?
केंद्रीय मंत्री के अनुसार राजधानी रांची सहित पूरे झारखंड में 10-10 घंटे तक बिजली कट रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इस पर कोई स्पष्ट जवाब देने में असमर्थ है।
मानसून को लेकर संजय सेठ ने क्या चेतावनी दी?
सेठ ने चेतावनी दी कि मानसून दस्तक देने वाला है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई तैयारी नजर नहीं आ रही। उन्होंने सरकार से 15 दिनों के भीतर सभी खुले नालों को ढकने और उनकी सफाई करने की माँग की।
राष्ट्र प्रेस
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