संजय सेठ की हेमंत सोरेन सरकार से माँग: ₹2,490 करोड़ जल मिशन विफलता पर तुरंत श्वेतपत्र जारी करें
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 22 मई को रांची स्थित अपने संसदीय कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने राज्य की बिगड़ती आर्थिक स्थिति, बिजली संकट और जल संकट का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री से तत्काल श्वेतपत्र जारी करने की माँग की। उनके अनुसार, केंद्र से मिले अरबों रुपये के फंड का समुचित उपयोग नहीं हुआ और आम जनता इसकी कीमत चुका रही है।
आर्थिक स्थिति और श्वेतपत्र की माँग
सेठ ने कहा, 'झारखंड की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा चुकी है जिससे जनता को परेशानी हो रही है, लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। सरकार को जनता की समस्या पहले दूर करनी चाहिए, जो अभी तक नहीं हुई है।' उन्होंने आग्रह किया कि हेमंत सोरेन सरकार अपनी वित्तीय स्थिति पर श्वेतपत्र जारी कर जनता के सामने सच्चाई रखे, क्योंकि करदाताओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके टैक्स का उपयोग कहाँ और कैसे हो रहा है।
ऑक्सीजन प्लांट फंड दुरुपयोग का आरोप
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए ₹18 करोड़ आवंटित किए थे, लेकिन यह राशि बर्बाद हो गई। उन्होंने कहा कि इसका नतीजा यह है कि आज भी राज्य के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी बनी हुई है — एक ऐसी स्थिति जो सीधे मरीजों की जान पर असर डालती है।
जल जीवन मिशन: ₹2,490 करोड़ और फिर भी ७ लाख घर प्यासे
सेठ ने जल जीवन मिशन योजना पर भी तीखा हमला बोला। उनके अनुसार, ₹2,490 करोड़ की लागत से पाँच चरणों में चलाई गई इस योजना को हेमंत सोरेन सरकार ने पूरी तरह विफल कर दिया। आलोचना करते हुए उन्होंने बताया कि आज भी राज्य के लगभग 7 लाख घर शुद्ध पेयजल से वंचित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार 'हर घर जल' के लक्ष्य को राष्ट्रीय प्राथमिकता बता रही है।
बिजली संकट और मानसून की चेतावनी
केंद्रीय मंत्री ने राजधानी रांची सहित पूरे झारखंड में बिजली कटौती की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि रांची में 10-10 घंटे तक बिजली कट रही है, फिर भी सरकार कोई स्पष्ट जवाब देने में असमर्थ है। इसके साथ ही उन्होंने मानसून से पहले की तैयारियों पर भी चिंता जताई और माँग की कि सरकार 15 दिनों के भीतर सभी खुले नालों को ढकने और उनकी सफाई का काम पूरा करे। गौरतलब है कि बारिश के मौसम में जलभराव और बीमारियाँ झारखंड के शहरी इलाकों में हर साल बड़ी समस्या बनती हैं।
जवाबदेही का सवाल
सेठ ने पूछा कि केंद्र से मिले फंड की बर्बादी और बुनियादी सुविधाओं की विफलता की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा। उनका कहना है कि जब तक सरकार पारदर्शी श्वेतपत्र जारी नहीं करती, जनता को वास्तविक स्थिति का पता नहीं चलेगा। राज्य में आगामी मानसून और बढ़ते नागरिक असंतोष के बीच यह राजनीतिक दबाव हेमंत सोरेन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।