झारखंड में जल जीवन मिशन की रियल टाइम मॉनिटरिंग शुरू, हेमंत सोरेन ने दिए जल संरक्षण के कड़े निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार ने जल जीवन मिशन की योजनाओं की निगरानी को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार, 9 जून को रांची में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की समीक्षा बैठक हुई, जिसमें ग्रामीण पेयजल आपूर्ति, भू-जल संरक्षण और स्वच्छता से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए।
रियल टाइम मॉनिटरिंग का निर्देश
बैठक में तय किया गया कि जल जीवन मिशन के तहत चल रही बड़ी योजनाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके लिए ठेकेदारों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर प्रतिदिन कार्य प्रगति की रिपोर्ट ली जाएगी। इसके साथ ही योजनाओं के पूर्ण होने के बाद उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) समय पर प्राप्त करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब देशभर में जल जीवन मिशन की प्रगति की गति और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। झारखंड में इस कदम को क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है।
भू-जल संरक्षण और जल पुनर्भरण पर जोर
समीक्षा के दौरान जल संरक्षण और भू-जल स्तर में सुधार को प्रमुख प्राथमिकता दी गई। अधिकारियों को वर्षा जल संचयन, सोक पिट निर्माण और अन्य जल पुनर्भरण उपायों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए।
गौरतलब है कि भू-जल स्तर गिरने के कारण अनुपयोगी हो चुके चापाकलों के बोरिंग का उपयोग अब रिचार्ज पिट के रूप में किया जाएगा, ताकि वर्षा जल का संचयन कर भू-जल स्तर को पुनः बढ़ाया जा सके। यह एक दीर्घकालिक जल संरक्षण रणनीति का हिस्सा है।
जल सहियाओं को मिलेगा तकनीकी प्रशिक्षण
ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के रखरखाव को मजबूत बनाने के लिए जल सहियाओं को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में समूहवार प्लंबर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा खराब चापाकलों की मरम्मत और सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति योजनाओं के रखरखाव में उनकी भूमिका बढ़ाई जाएगी।
बेहतर काम करने वाली जल सहियाओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक पुरस्कार योजना भी शुरू करने का निर्देश दिया गया है। यह कदम ज़मीनी स्तर पर जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों तक शुद्ध पेयजल और जल गुणवत्ता निगरानी
बैठक में प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र तक शुद्ध पेयजल पहुँचाने, जल गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने और पेयजल संकट वाले क्षेत्रों की विशेष निगरानी पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को प्लास्टिक मुक्त गाँवों के लिए जागरूकता अभियान चलाने और बेहतर प्रदर्शन करने वाले गाँवों को प्रोत्साहित करने की कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।
कौन-कौन सी योजनाओं की हुई समीक्षा
इस बैठक में जल जीवन मिशन, हर घर जल योजना, बहु ग्रामीण एवं एकल ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएँ, स्वच्छ भारत मिशन, ओडीएफ प्लस गाँव, ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन तथा गोबरधन योजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। आने वाले समय में इन योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक दीर्घकालिक ढाँचा तैयार किया जाएगा।