चैनत गांव जलसंकट: दीपेंद्र हुड्डा ने 24 दिन से जारी धरने को दिया समर्थन, BJP सरकार से तत्काल समाधान की मांग
सारांश
मुख्य बातें
रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने 8 जून 2026 को हांसी के चैनत गांव में पेयजल संकट के विरोध में चल रहे धरने के 24वें दिन प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता जताई और हरियाणा की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार से ग्रामीणों की मांगों का तुरंत समाधान करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने शीघ्र कदम नहीं उठाए तो यह मुद्दा विधानसभा और लोकसभा दोनों में उठाया जाएगा।
मुख्य घटनाक्रम
चैनत गांव के ग्रामीण पिछले 24 दिनों से पेयजल की पर्याप्त और समान आपूर्ति की माँग को लेकर लगातार धरने पर बैठे हैं। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पानी उपलब्ध कराना सबसे बड़ी मानवीय जिम्मेदारी है और यह हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेने की भी माँग की।
सरकार से क्या माँग
हुड्डा ने कहा, 'हरियाणा के नागरिक और विपक्ष के प्रतिनिधि के रूप में मैं सरकार से कहना चाहता हूँ कि वह चैनत गांव की जायज़ मांगों का तुरंत समाधान करे और गांव को उसके अधिकार के अनुसार पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि समाधान ऐसा होना चाहिए जिससे चैनत समेत क्षेत्र के सभी गांव संतुष्ट रहें और सभी को बराबरी के आधार पर पानी मिले।
NEET पेपर लीक और राजनीतिक प्रहार
इसी अवसर पर हुड्डा ने NEET पेपर लीक मामले पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में इस मुद्दे पर प्रदर्शन के दौरान उन्हें चिह्नित कर निशाना बनाया गया और अपमानित किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। उनके शब्दों में, 'मुझे नहीं, बल्कि प्रजातंत्र को निशाने पर लिया गया था।' उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से राजधर्म का पालन करते हुए इस्तीफा देने की माँग की।
आगे की रणनीति
हुड्डा ने घोषणा की कि युवाओं को न्याय मिलने तक सड़क से लेकर संसद तक लड़ाई जारी रहेगी। अगला पड़ाव 12 जून को पानीपत में निर्धारित है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस एसआईआर प्रक्रिया पर कड़ी नज़र रख रही है और किसी भी अनियमितता का विरोध करेगी।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब हरियाणा के कई ग्रामीण इलाकों में गर्मियों के दौरान पेयजल की किल्लत एक बारंबार की समस्या बन चुकी है। गौरतलब है कि चैनत जैसे गांवों में पानी की असमान आपूर्ति लंबे समय से विवाद का विषय रही है। यदि सरकार शीघ्र हस्तक्षेप नहीं करती, तो विपक्ष इसे विधानसभा सत्र में प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाने के लिए तैयार है।