नीट पेपर लीक: कांग्रेस की माँग — धर्मेंद्र प्रधान दें इस्तीफा, संसद में हो चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 22 जुलाई को कांग्रेस नेताओं ने नीट पेपर लीक विवाद पर केंद्र सरकार के खिलाफ तीखा मोर्चा खोलते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की और कहा कि इस मुद्दे पर संसद में तत्काल चर्चा होनी चाहिए। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, हुसैन दलवई और सुरेंद्र राजपूत ने देशभर में हो रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच यह बयान दिए।
पवन खेड़ा की मुख्य माँगें
कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने स्पष्ट किया कि उनका प्रदर्शन देश के नौजवानों और उनके भविष्य की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा, 'हमारा प्रदर्शन नौजवानों और उनके भविष्य की रक्षा के लिए है, और इनका प्रदर्शन कांग्रेस पर हमला बोलने के लिए हो रहा है। बात भाजपा या कांग्रेस की नहीं है; अब बात हमारे नौजवानों के भविष्य की है।' खेड़ा ने यह भी कहा कि दिल्ली में छात्रों पर पुलिस की ओर से कठोर कार्रवाई की जा रही है, जो अस्वीकार्य है।
खेड़ा ने तीन सूत्री माँगें रखीं — धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, संसद में पेपर लीक पर विस्तृत चर्चा, और छात्रों के विरुद्ध दर्ज सभी मामलों की वापसी। उन्होंने कहा, 'नौजवानों के लिए हम सड़क पर हैं और रहेंगे।'
लोकतंत्र पर सवाल
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के उस बयान पर, जिसमें कथित तौर पर राहुल गांधी की भूमिका पर टिप्पणी की गई थी, खेड़ा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'सरकार तय करेगी कि विपक्ष को क्या कहना चाहिए या क्या नहीं कहना चाहिए? यह कैसा लोकतंत्र है।' यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच संसद के मानसून सत्र में टकराव की आशंका बढ़ती जा रही है।
दलवई और राजपूत का पक्ष
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लिए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पूर्व में कांग्रेस सरकारों के दौर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान सरकार की ओर से बातचीत के लिए शिष्टमंडल भेजा जाता था, जबकि मौजूदा सरकार का रवैया इस परंपरा के विपरीत है।
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा, 'असली मुद्दे से बात भटकाई जा रही है। यह स्टूडेंट्स से जुड़ा मुद्दा है। बच्चों के भविष्य के मामले में छोटी सोच वाली राजनीति की कोई जगह नहीं है।' उन्होंने जोर दिया कि जरूरत पड़ने पर देशभर में और अधिक विरोध प्रदर्शन होने चाहिए।
पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि नीट-यूजी 2024 पेपर लीक का मामला पिछले कई हफ्तों से राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है। लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य पर उठे सवालों के बीच विपक्ष ने इसे शासन की विफलता बताया है। आलोचकों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक आवश्यकता बन चुकी है।
आगे की राह
संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे की पूरी संभावना है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी तीनों माँगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार छात्रों की चिंताओं और विपक्ष के दबाव के बीच क्या रुख अपनाती है।