पेपर लीक पर भूपिंदर हुड्डा का केंद्र को कड़ा संदेश: युवाओं से माफी माँगे सरकार, 75 लाख उम्मीदवार प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने 25 जुलाई को चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए माँग की कि केंद्र सरकार देशभर के युवाओं से सार्वजनिक रूप से माफी माँगे — उन्हें विरोध प्रदर्शनों के दौरान लाठीचार्ज और बर्बरता का शिकार बनाने के लिए। हुड्डा ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्र आंदोलन की बड़ी जीत बताया और कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अंततः इस जनदबाव के आगे झुकना पड़ा।
पेपर लीक: देशव्यापी महामारी
हुड्डा ने आरोप लगाया कि पेपर लीक की समस्या अब पूरे देश में महामारी का रूप ले चुकी है। उनके अनुसार, BJP सरकार के कार्यकाल में 152 से अधिक परीक्षा पत्र लीक हो चुके हैं, जिससे लगभग 75 लाख उम्मीदवार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा पत्रों और नौकरियों की तस्करी करने वाला एक संगठित गिरोह हरियाणा समेत पूरे देश में सक्रिय है।
हरियाणा बना पेपर लीक का केंद्र
हुड्डा ने विशेष रूप से हरियाणा की स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि राज्य में BJP सरकार के कार्यकाल में 30 से अधिक पेपर लीक की घटनाएँ दर्ज हो चुकी हैं। इनमें प्रमुख हैं — हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा (2023), CET (2023), सब-इंस्पेक्टर भर्ती (मार्च 2022), दंत सर्जन भर्ती (दिसंबर 2021), PGI रोहतक परीक्षा (2025), पुलिस कांस्टेबल भर्ती (अगस्त 2021), ग्राम सचिव भर्ती (12 जनवरी 2021) और क्लर्क भर्ती (दिसंबर 2016)।
बेरोज़गारी और आत्महत्या की त्रासदी
हुड्डा ने बेरोज़गारी संकट की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि प्रतिवर्ष 9 करोड़ युवा केवल 6 लाख नौकरियों के लिए आवेदन करते हैं — यह आँकड़ा अपने आप में व्यवस्था की विफलता का प्रमाण है। उन्होंने यह भी कहा कि अकेले NEET परीक्षा पत्र लीक से आहत होकर देशभर में 26 उम्मीदवारों ने आत्महत्या कर ली है — एक ऐसी त्रासदी जिसे उन्होंने सीधे सरकार की उदासीनता से जोड़ा।
कांग्रेस की माँग: जवाबदेही और पारदर्शिता
हुड्डा ने बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने 'छात्रों की गूंज' अभियान के ज़रिए देशव्यापी आंदोलन खड़ा किया, जिसने BJP को पीछे हटने पर मजबूर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अब संसद में पेपर लीक मामले में सरकार से पूर्ण जवाबदेही की माँग करेगी। साथ ही उन्होंने जोर दिया कि परीक्षा प्रणाली को इतना पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए कि भविष्य में पेपर लीक की कोई संभावना न रहे।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक विरोधी आंदोलन पूरे देश में नई ऊर्जा के साथ उभरा है। गौरतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही पर सवाल और तेज़ होंगे। आलोचकों का कहना है कि जब तक परीक्षा तंत्र में संरचनात्मक सुधार नहीं होते, केवल मंत्री बदलने से समस्या हल नहीं होगी।