नीट पेपर लीक पर जेपी नड्डा का राहुल गांधी से सवाल: 'इंडिया अलायंस की सरकारों पर चुप क्यों?'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने 22 जुलाई को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सीधे सवाल पूछे। नड्डा ने स्पष्ट कहा कि छात्रों के आंदोलन का राजनीतिकरण करना और उससे राजनीतिक लाभ उठाना उचित नहीं है — इस गंभीर मुद्दे पर संसद में गहन चर्चा होनी चाहिए।
राहुल गांधी पर 'चयनात्मकता' का आरोप
नड्डा ने कहा कि उसी दिन शाम 4 बजे राहुल गांधी ने संसद में प्रस्तुतीकरण देते हुए 150 पेपर लीक का उल्लेख किया। नड्डा ने इस पर तीखा पलटवार करते हुए पूछा, 'आप चयनात्मक क्यों हैं? आपने इंडिया अलायंस की सरकारों के बारे में चर्चा क्यों नहीं की? आपने उन्हें अलग क्यों रखा?' उन्होंने तर्क दिया कि यह चयनात्मकता साफ दर्शाती है कि राहुल गांधी का उद्देश्य छात्रों का हित या शिक्षा में सुधार नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ लेना है।
विपक्ष-शासित राज्यों में पेपर लीक के आरोप
नड्डा ने विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब, केरल और कर्नाटक का नाम लेते हुए कहा कि इन राज्यों में पेपर लीक की घटनाएँ हुई हैं और यहाँ कांग्रेस तथा विपक्षी दलों के समर्थन वाली सरकारें हैं। उन्होंने कहा, 'ये तो कुछ ही मामले हैं।' उनका यह बयान विपक्ष की उस रणनीति पर सीधा प्रहार था जो केंद्र सरकार को अकेले घेरने की कोशिश कर रही है।
संसद में चर्चा का आह्वान
नड्डा ने कहा कि यह समय आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि समाधान खोजने का है। उन्होंने विपक्ष को खुला न्योता देते हुए कहा, 'विपक्ष समय तय करे, हम चर्चा के लिए तैयार हैं।' उनके अनुसार चर्चा के लिए सबसे उचित मंच संसद है, जहाँ इस मामले पर गहनता से विचार हो और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि चर्चा के बाद एक ठोस और स्थायी नीति बनाई जानी चाहिए।
सरकार की गंभीरता और आगे की राह
नड्डा ने कहा कि पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने जो कदम उठाए, उस पर भी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार को 'जिम्मेदार' बताते हुए कहा कि यह सरकार हमेशा सदन में हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तत्पर रहती है। उन्होंने जोर दिया कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनके साथ न्याय सुनिश्चित करना सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्र आंदोलनरत हैं और संसद के मानसून सत्र में विपक्ष इस मुद्दे को केंद्र में रखे हुए है।