जयराम रमेश का पलटवार: 'राहुल गांधी के खुलासों से घबराई सरकार', NTA और नीट-यूजी 2026 पर उठाए गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने 23 जुलाई 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की नीट मुद्दे पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के जवाब में तीखा पलटवार किया। रमेश ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के सीधे खुलासों ने सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में धकेल दिया है और यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उसी बौखलाहट का प्रमाण है।
एक्स पर जयराम रमेश का सीधा हमला
जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, जेपी नड्डा की देर शाम आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस राहुल गांधी के सीधे खुलासों के जवाब में आई है — यह सरकार की बढ़ती घबराहट का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने माँग की कि नड्डा 'बचकानी उंगली उठाने की राजनीति' छोड़कर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री की 'अभूतपूर्व विफलताओं' को पहले स्वीकार करें।
NTA की स्थापना और केंद्रीकरण पर सवाल
रमेश ने तर्क दिया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की स्थापना मौजूदा सरकार ने स्वयं की थी और जानबूझकर परीक्षा प्रणाली का केंद्रीकरण किया। पहले से चली आ रही व्यवस्था को समाप्त कर NTA को खड़ा किया गया और विश्वविद्यालयों व राज्यों पर इसे अपनाने का दबाव बनाया गया। उनके अनुसार, NTA अपनी स्थापना के बाद से ही 'पूरी तरह कॉम्प्रोमाइज़' और अपने दायित्वों के निर्वहन में 'पूरी तरह अक्षम' साबित हुई है।
9 बार पेपर लीक और सुधारों की अनदेखी
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि NTA के कार्यकाल में अब तक कम-से-कम 9 बार पेपर लीक हो चुके हैं, जिनमें 2024 की वे घटनाएँ भी शामिल हैं जब अनियमितताओं के कारण कई परीक्षाएँ रद्द करनी पड़ी थीं। रमेश ने कहा कि 2024 की विफलता के बाद के. राधाकृष्णन समिति ने NTA सुधार के लिए 101 सिफारिशें दीं, लेकिन मंत्री प्रधान ने उन्हें गंभीरता से लागू करने के बजाय 'टालमटोल और अहंकार' का परिचय दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि NTA में महानिदेशक का पद — जो इसका सर्वोच्च कार्यकारी पद है — 2024 के पेपर लीक से लेकर 2026 के पेपर लीक तक लगातार 'अतिरिक्त प्रभार' के रूप में ही भरा रहा।
संसदीय समिति की अवहेलना और नए लीक के आरोप
रमेश ने आरोप लगाया कि नीट-यूजी 2026 का पेपर लीक होने के बाद भी NTA और उच्च शिक्षा विभाग ने संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति के समक्ष 'बेशर्मी से' दावा किया कि कोई लीक नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री प्रधान ने समिति की NTA सुधार संबंधी सिफारिशें केवल इसलिए खारिज कर दीं क्योंकि उस समिति में विपक्ष के सदस्य शामिल थे। इसके अतिरिक्त, यूजीसी-नेट समाजशास्त्र 2026 और यूजीसी-नेट अंग्रेजी 2026 परीक्षाओं में भी क्रमशः पेपर लीक और अनियमितताओं की खबरें सामने आईं।
छात्र प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई और आगे की राह
रमेश ने आरोप लगाया कि जब छात्र पेपर लीक और सरकार की शिक्षा नीतियों के विरोध में सड़कों पर उतरे, तो उन पर लाठीचार्ज, वॉटर कैनन, आंसू गैस और खबरों के अनुसार पेलेट गन तथा शॉक बैटन तक का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने अंत में कहा कि 'नीट-यूजी 2026 का पेपर लीक सिर्फ एक लक्षण है — बीमारी इससे कहीं अधिक गहरी है' और छात्रों का गुस्सा मंत्री प्रधान की 'व्यापक अक्षमता' तथा मोदी सरकार की 'बेहद खराब शिक्षा नीतियों' के खिलाफ है। यह राजनीतिक टकराव तब तक जारी रहने की संभावना है जब तक नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा की तारीख और NTA सुधार की ठोस रूपरेखा सामने नहीं आती।