लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 पास: BJP का राहुल गांधी पर पलटवार, 'युवाओं के लिए हर कदम उठाया'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा ने 30 जुलाई 2026 को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया, जिसका उद्देश्य नीट सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर अंकुश लगाना है। विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, और अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों पर कड़ा पलटवार किया है।
सदन में क्या हुआ
बुधवार को विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बर्बरता की गई और इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जिम्मेदार हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि छात्रों पर पेलेट गन चलाने का आदेश दिया गया था। BJP ने इन आरोपों को तथ्यों से परे और राजनीति से प्रेरित करार दिया।
BJP सांसद की तीखी प्रतिक्रिया
BJP के राज्यसभा सांसद अजीत माधवराव गोपचडे ने कहा, 'राहुल गांधी की हरकतें बचकानी हैं। विपक्ष के नेता के तौर पर अब उनकी कोई विश्वसनीयता नहीं बची है। हम रचनात्मक कामों का समर्थन करते हैं। जब नीट पर चर्चा की मांग उठी, तो हमने चर्चा कराई। हमने छात्रों के भले के लिए नीट पर एक कड़ा कानून भी बनाया। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मोदी सरकार ने छात्रों और देश के युवाओं के भविष्य के लिए हर जरूरी कदम उठाया है। राहुल गांधी यह बात पचा नहीं पा रहे हैं।'
गोपचडे ने आगे कहा, 'जनता उन्हें पूरी तरह से नकार देगी। कांग्रेस के पास अब बस कुछ ही राज्य बचे हैं और वे भी कांग्रेस-मुक्त हो जाएंगे। राहुल गांधी झूठी बातें और गलत जानकारी फैलाने में माहिर हैं।'
संजय राउत की अमित शाह से इस्तीफे की मांग पर BJP का जवाब
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत द्वारा गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग पर भी गोपचडे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष को पहले अपने राजनीतिक हालात और कार्यशैली पर आत्ममंथन करना चाहिए। उनके अनुसार, महाराष्ट्र में राउत की पार्टी की स्थिति पहले से ही कमजोर हो चुकी है।
गोपचडे ने कहा कि अमित शाह के नेतृत्व में देश की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है, नक्सलवाद पर प्रभावी कार्रवाई हुई है, पूर्वोत्तर राज्यों में शांति स्थापित हुई है और आतंकी गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आई है।
विधेयक का महत्व
गौरतलब है कि नीट पेपर लीक विवाद ने पिछले वर्ष लाखों छात्रों को प्रभावित किया था और देशभर में व्यापक आंदोलन हुए थे। यह विधेयक उसी पृष्ठभूमि में लाया गया है। यह ऐसे समय में पारित हुआ है जब प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करना सरकार की प्राथमिकता बताई जा रही है। विधेयक में अनुचित साधनों के उपयोग पर कठोर दंड का प्रावधान है।
आगे क्या
विधेयक को अब राज्यसभा में भेजा जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, परीक्षा सुधार का यह मुद्दा आगामी राज्य चुनावों में भी प्रमुख भूमिका निभा सकता है। सरकार के लिए यह साबित करना अहम होगा कि नया कानून केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि क्रियान्वयन के स्तर पर भी प्रभावी हो।