जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सियासी संग्राम: विपक्ष ने सरकार पर, भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की 22 जुलाई को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने एक-दूसरे पर हमले बोले। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज़ दबाने और जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने कांग्रेस पर छात्र आंदोलन का राजनीतिक फ़ायदा उठाने का इल्ज़ाम लगाया।
राजद का हमला: लाठीचार्ज और पेपर लीक पर सवाल
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि क्या देश में आंदोलन होगा या नहीं, राजनीति होगी या नहीं — यह भी अब सरकार ही तय करेगी। उन्होंने सवाल किया कि जब लाखों छात्र अपनी माँगों को लेकर जंतर-मंतर पहुँचते हैं तो सरकार संवाद के बजाय बल प्रयोग क्यों करती है।
सिंह ने आरोप लगाया कि छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, लेकिन सरकार ने न माफ़ी माँगी और न ही समस्याओं का समाधान किया। उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार पेपर लीक होने और सीबीआई जाँच दर्ज होने के बावजूद किसी आरोपी को सज़ा नहीं मिली। नीट मामले के कथित मुख्य आरोपी संजीव मुखिया के खिलाफ भी समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं हो सकी, यह उन्होंने रेखांकित किया।
सुधाकर सिंह ने यह भी कहा कि आंदोलनरत छात्र किसी दल विशेष के नहीं, बल्कि देश के आम परिवारों के बच्चे हैं। उनके अनुसार, विपक्ष को संसद में बोलने का अवसर न देना और नागरिकों पर बल प्रयोग करना आपातकाल जैसी स्थिति की याद दिलाता है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया: करोड़ों छात्रों का भविष्य दाँव पर
कांग्रेस नेता सुखदेव भगत ने कहा कि पेपर लीक से करोड़ों छात्र प्रभावित हुए हैं — कई का भविष्य अधर में लटक गया, कई की आयु सीमा समाप्त हो गई और बार-बार परीक्षाएँ आयोजित करनी पड़ रही हैं। उनके अनुसार, इन मुद्दों को उठाना राजनीति नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य का सवाल है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले दो वर्षों से इन मुद्दों को उठाते रहे हैं, लेकिन सरकार संवेदनहीन बनी हुई है।
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने तीखा सवाल उठाया कि जब आंदोलन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ चल रहा है तो प्रेस कॉन्फ्रेंस में जवाब स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा क्यों दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकार जिम्मेदारी तय करने के बजाय अलग-अलग मंत्रियों से जवाब दिलवाती है, जबकि प्रधानमंत्री चुप रहते हैं।
खेड़ा ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसे एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था बनाया जाना चाहिए था, लेकिन इसे सोसाइटी के रूप में संचालित किया जा रहा है।
भाजपा का पलटवार: कांग्रेस पर राजनीति का आरोप
भाजपा नेता आरपी सिंह ने कहा कि पेपर लीक जैसे गंभीर विषय को राजनीतिक नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार वर्ष 2024 में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून लेकर आई थी, जिसे संसद ने पारित भी किया था। उनके अनुसार, उस समय राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने इस कानून पर कोई सुझाव नहीं दिया और अब वही लोग इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब नीट और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों को लेकर देशभर में छात्र आंदोलनरत हैं। गौरतलब है कि यह विवाद संसद सत्र के दौरान और तेज़ हुआ है, जहाँ विपक्ष इस मुद्दे को बार-बार उठाने की कोशिश कर रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ता यह टकराव आने वाले दिनों में संसदीय कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है।