नीट आंदोलन पर कांग्रेस-भाजपा की राजनीति 'शर्मनाक': पंजाब आप ने लगाए झूठे आरोपों का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब आम आदमी पार्टी (AAP) ने 23 जुलाई को कड़े शब्दों में कहा कि नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में उठे छात्र आंदोलन पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा की जा रही राजनीति पूरी तरह 'शर्मनाक' है। पार्टी का आरोप है कि दोनों दल छात्रों के साथ खड़े होने के बजाय पंजाब सरकार पर बेबुनियाद निशाना साध रहे हैं।
आप का मुख्य आरोप
राज्य AAP के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने एक बयान में कहा कि जब लाखों छात्र न्याय और अपने भविष्य के लिए सड़कों पर उतरे हैं, तब कांग्रेस और BJP ने युवाओं का साथ देने की जगह पंजाब में AAP सरकार पर झूठे आरोप लगाने का रास्ता चुना। पन्नू के अनुसार, छात्रों का आंदोलन इतना व्यापक हो चुका है कि इसने दशकों तक देश पर राज करने वाली कांग्रेस को भी हिला दिया है।
फरीदकोट प्रकरण पर स्पष्टीकरण
पन्नू ने फरीदकोट में हुई घटना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह पेपर लीक का मामला नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के ज़रिए नकल करने का प्रकरण था। उन्होंने बताया कि संबंधित उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र पर ही रंगे हाथों पकड़ा गया और पुलिस ने तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की। उनका आरोप है कि कांग्रेस इस घटना को जानबूझकर पेपर लीक के रूप में प्रचारित कर जनता को गुमराह कर रही है।
पंजाब का रिकॉर्ड और केंद्र पर हमला
पन्नू ने दावा किया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के लगभग पाँच वर्षों के कार्यकाल में पंजाब में भर्ती परीक्षा का एक भी पेपर लीक नहीं हुआ। इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि BJP नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कार्यकाल में 90 से अधिक पेपर लीक की घटनाएँ हुईं, जिससे करोड़ों युवाओं का भविष्य संकट में पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि इन घटनाओं से आहत होकर 20 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या कर ली, फिर भी केंद्र सरकार ने न समय पर सख्त कार्रवाई की और न ही युवाओं का भरोसा बहाल करने की कोशिश की।
कांग्रेस से आत्म-मंथन की माँग
पन्नू ने कांग्रेस से अपील की कि वह पंजाब पर झूठे आरोप लगाने से पहले अपने शासनकाल में हुए पेपर लीक मामलों का जवाब दे। उन्होंने कहा कि झूठे बयानों से जनता का ध्यान भटकाना किसी भी जिम्मेदार विपक्ष को शोभा नहीं देता।
आगे की स्थिति
नीट पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्रों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा। यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक तीखा होता जा रहा है, जहाँ सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने में लगे हैं — जबकि लाखों छात्र अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता में हैं।