कांग्रेस ने गरीबों-पिछड़ों को हमेशा वोट-बैंक समझा: हरियाणा CM नायब सिंह सैनी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार, 4 अगस्त को चंडीगढ़ में कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने दशकों तक गरीबों, पिछड़े वर्गों और अनुसूचित जातियों को महज राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की वोट-बैंक केंद्रित सोच ने इन वर्गों के वास्तविक उत्थान को हमेशा पीछे धकेला।
चन्नी प्रकरण: दलित नेतृत्व को दरकिनार करने का आरोप
सैनी ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का उदाहरण देते हुए कहा कि जो नेता संकट की घड़ी में पंजाब कांग्रेस के साथ डटकर खड़ा रहा, उसे आज उसकी अपनी ही पार्टी हाशिये पर धकेल रही है। उन्होंने इसे दलितों और समाज के वंचित तबकों के प्रति कांग्रेस के रवैये का 'दुर्भाग्यपूर्ण' प्रतिबिंब बताया।
सैनी के अनुसार, यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि कांग्रेस सत्ता में आने के लिए पिछड़े और दलित चेहरों का उपयोग तो करती है, किंतु नीतिगत और संगठनात्मक महत्व देने में पीछे रह जाती है।
नीट पेपर लीक: केंद्र की कार्रवाई बनाम विपक्ष की राजनीति
नीट पेपर लीक विवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस मामले में निर्णायक कदम उठाए हैं — दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की गई, भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया और पेपर लीक से निपटने के लिए सख्त कानून बनाए गए। इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन ने इस मुद्दे पर युवाओं को लगातार भटकाने का काम किया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता का हवाला देते हुए कहा, 'किसी को भी युवाओं की उम्मीदों और भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं है। पीएम मोदी ने इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से लिया और यह स्पष्ट कर दिया कि देश के युवाओं के भविष्य को खतरे में डालने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।'
कांग्रेस शासन काल से तुलना
सैनी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी ने कांग्रेस सरकारों के दौर की वह स्थिति नहीं देखी जब भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का सर्वथा अभाव था। उन्होंने कहा, 'उस दौर में उम्मीदवारों को परीक्षा देने के लिए बसों की छतों पर यात्रा करनी पड़ती थी। जब प्रश्न पत्र लीक होते थे तो शायद ही कोई जवाबदेही तय होती थी और युवा उम्मीदवारों को ही इसके नतीजे भुगतने पड़ते थे।' उन्होंने कहा कि वोट-बैंक की राजनीति के चक्कर में कांग्रेस ने वर्षों तक युवाओं के भविष्य को नजरअंदाज किया।
पंजाब सरकार पर निशाना: फार्मेसी पेपर लीक और भर्ती विवाद
पंजाब विधानसभा द्वारा पेपर लीक की निंदा में पारित प्रस्ताव पर सैनी ने पलटवार करते हुए पूछा कि क्या पंजाब सरकार ने राज्य में हाल ही में हुई फार्मेसी परीक्षा के पेपर लीक पर भी इसी तरह का कोई प्रस्ताव अपनाया था। उन्होंने पंजाब में हाल घोषित भर्ती परीक्षा के नतीजों पर भी सवाल उठाए और कहा कि सफल उम्मीदवारों के नामों ने ही भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर संदेह पैदा कर दिए हैं।
आम आदमी पार्टी (AAP) नेता मनीष सिसोदिया के उस पुराने बयान — कि पंजाब में पेपर लीक होने पर शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस इस्तीफा देंगे — का उल्लेख करते हुए सैनी ने कहा कि हाल की घटनाओं पर पार्टी की चुप्पी उसकी कथनी और करनी के बीच की खाई को उजागर करती है। उन्होंने कांग्रेस और AAP दोनों से युवाओं को जवाब देने की माँग की।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब हरियाणा में विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और पेपर लीक तथा भर्ती पारदर्शिता युवा मतदाताओं के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।