मुंगेर की बबीता देवी बनीं 'लखपति दीदी': ₹50,000 के ऋण से शुरू किया दूध कारोबार, अब सालाना ₹10 लाख की आय
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुंगेर जिले के सदर प्रखंड की नौवागढ़ी दक्षिणी पंचायत निवासी बबीता देवी ने जीविका स्वयं सहायता समूह के सहयोग से दूध कारोबार खड़ा कर 'लखपति दीदी' का दर्जा हासिल किया है। मजदूरी पर निर्भर एक साधारण परिवार से उठकर बबीता आज प्रतिदिन 250 लीटर दूध की खरीद-बिक्री करती हैं और उनकी वार्षिक आय ₹10 लाख से अधिक हो चुकी है।
संघर्ष से शुरुआत
बजरंगबली नगर की रहने वाली बबीता देवी के परिवार में चार बेटियाँ हैं। परिवार की आमदनी मजदूरी तक सीमित थी और दिनभर की मेहनत के बाद भी बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घर-खर्च की जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण था। इसी दौर में बबीता विष्णु जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं, जो प्रेम जीविका महिला ग्राम संगठन और विश्वास जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ से संबद्ध है।
समूह की नियमित बैठकों में उन्होंने अन्य महिलाओं को छोटे व्यवसायों के जरिए आत्मनिर्भर बनते देखा। बचत की आदत, सामूहिक चर्चा और ऋण की सुलभ उपलब्धता ने उनके भीतर स्वरोजगार की ललक जगाई।
दूध कारोबार की नींव
बबीता ने अपने पति संजीव ठाकुर के साथ मिलकर आसपास के गाँवों में दूध की उपलब्धता और मुंगेर शहर में इसकी माँग का आकलन किया। दोनों ने दूध आपूर्ति का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। बबीता ने स्वयं सहायता समूह से ₹50,000 का ऋण लिया और किसानों व पशुपालकों से ₹37 प्रति लीटर की दर पर दूध खरीदकर मुंगेर शहर के बड़े दुकानदारों, मिठाई प्रतिष्ठानों और सुधा को ₹50 प्रति लीटर की दर पर आपूर्ति शुरू की।
प्रति लीटर ₹13 के अंतर से शुरू हुआ यह कारोबार समय की पाबंदी, गुणवत्ता और ग्राहकों के साथ विश्वसनीय संबंध के बल पर तेजी से बढ़ा।
आज का कारोबार
आज बबीता देवी और संजीव ठाकुर प्रतिदिन करीब 250 लीटर दूध की खरीद-बिक्री करते हैं। इससे उन्हें प्रतिदिन ₹3,000 से ₹3,500 तक का शुद्ध लाभ होता है। वार्षिक आय ₹10 लाख से अधिक पहुँच चुकी है — जो कभी मजदूरी पर निर्भर इस परिवार के लिए एक असाधारण बदलाव है।
परिवार और समाज पर असर
आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे गहरा असर चारों बेटियों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य पर पड़ा है। बबीता अब भविष्य के लिए बचत और कारोबार के विस्तार की योजना बना रही हैं। आत्मनिर्भरता ने उनके आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है।
गाँव की अन्य महिलाएँ अब बबीता की सफलता से प्रेरित होकर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ रही हैं और स्वरोजगार की राह पर कदम बढ़ा रही हैं। जीविका के सहयोग से बबीता देवी आधिकारिक रूप से 'लखपति दीदी' की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।
आगे की राह
बबीता की यह यात्रा दर्शाती है कि संस्थागत सहयोग, पारिवारिक साझेदारी और दृढ़ इच्छाशक्ति मिलकर किसी भी सामान्य परिवार की तस्वीर बदल सकते हैं। वे अब कारोबार का दायरा और विस्तृत करने की योजना में हैं, ताकि अधिक पशुपालकों को सीधा बाजार मिल सके और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हो।