सहरसा में जीविका दीदी का सिलाई घर: महिलाओं की आत्मनिर्भरता की नई कहानी

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सहरसा में जीविका दीदी का सिलाई घर: महिलाओं की आत्मनिर्भरता की नई कहानी

सारांश

बिहार के सहरसा जिले में जीविका दीदी का सिलाई घर महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है। यहां महिलाएं सिलाई के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। जानिए इस पहल से कैसे बदल रही हैं उनके जीवन की धारा।

Key Takeaways

  • महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास
  • सिलाई और उत्पादन के अवसर
  • आर्थिक स्थिति में सुधार
  • स्थानीय समुदाय में सकारात्मक बदलाव
  • राज्य सरकार की पहल से सक्षमता

सहरसा, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के सहरसा जिले में जीविका दीदी का सिलाई घर महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है। यहां पर जीविका समूह से जुड़ी महिलाएं शर्ट और पैंट सिलकर आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं।

सहरसा में राज्य सरकार की पहल पर 60 महिलाओं को नए रोजगार से जोड़ा गया है। इन महिलाओं को सहरसा शहर के शाहपुर वार्ड नंबर 7 में जीविका दीदी के सिलाई घर के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इस सिलाई सह उत्पादन केंद्र में उन्हें रोजगार के अवसर मिले हैं।

इनमें से एक, सत्तरकटैया प्रखंड की पटोरी पंचायत निवासी काजल कुमारी ने बताया कि उनके पति राजमिस्त्री हैं, लेकिन उनकी कमाई से परिवार का भरण-पोषण मुश्किल था। जीविका से जुड़ने के बाद और अपनी सिलाई-बुनाई की कला का उपयोग कर अब वह प्रतिदिन 10 से 15 कपड़े सिलकर 12 से 15 हजार रुपए प्रति महीने तक कमा लेती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जिला प्रशासन का धन्यवाद किया कि उन्हें जीविका समूह से जुड़ने का मौका मिला।

उन्होंने कहा कि वह खुद को काम करते हुए देखती हैं तो उन्हें अच्छा लगता है और उनकी कमाई से उनका परिवार भी अब अच्छे से चल रहा है। सिलाई का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्हें सिलाई घर में काम मिला है।

किरण देवी ने बताया कि वह पहले गांव में सिलाई-बुनाई का काम करती थीं, जिससे थोड़ी-बहुत कमाई होती थी। जीविका समूह से जुड़ने के बाद उन्हें नए रोजगार के अवसर मिले हैं। एक कपड़े की सिलाई पर उन्हें 45 रुपए तक की आमदनी होती है, जिससे दिनभर में 10 से 15 कपड़े तैयार कर अच्छी आय अर्जित कर लेती हैं। उन्होंने सीएम नीतीश कुमार का धन्यवाद किया और कहा कि जीविका समूह बहुत अच्छी पहल है। हम इससे जुड़कर आज यहां पर काम कर रहे हैं। पहले जो पूरा दिन घर पर बर्बाद होता था, अब काम करने से धन की प्राप्ति हो रही है। परिवार भी बहुत अच्छे से चल रहा है।

सहरसा नगर निगम के आयुक्त प्रभात कुमार झा ने कहा कि सरकार जीविका को उच्च प्राथमिकता देती है। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 7 शाहपुर में इन महिलाओं को सिलाई सेंटर से जोड़ा गया है और सिलाई मशीनें भी उपलब्ध कराई गई हैं। जीविका दीदियों द्वारा बच्चों के शर्ट, स्कर्ट और अन्य कपड़ों की सिलाई की जाएगी, और उनके उत्पादों को वहीं बेचा जाएगा, जिससे उन्हें सीधा लाभ मिलेगा।

Point of View

बल्कि यह सामाजिक बदलाव का भी प्रतीक है। इस प्रकार की योजनाएं देशभर में महिलाओं के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद करती हैं।
NationPress
18/03/2026

Frequently Asked Questions

जीविका दीदी का सिलाई घर क्या है?
यह एक सिलाई और उत्पादन केंद्र है, जहां महिलाओं को सिलाई के माध्यम से आत्मनिर्भरता हासिल करने का अवसर मिलता है।
यहां महिलाएं क्या-क्या बनाती हैं?
महिलाएं यहां शर्ट, पैंट, स्कर्ट और अन्य कपड़े बनाती हैं।
क्या इस पहल से महिलाओं का आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है?
हां, कई महिलाएं अब प्रतिमाह अच्छी आय कमा रही हैं, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण बेहतर हुआ है।
यह सिलाई घर कहां स्थित है?
यह सहरसा के शाहपुर वार्ड नंबर 7 में स्थित है।
क्या इस पहल में शामिल होने के लिए कोई विशेष योग्यता आवश्यक है?
नहीं, महिलाएं बिना किसी विशेष योग्यता के भी इस पहल में शामिल हो सकती हैं।
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