27 अगस्त 2026
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जीविका योजना से बदली बिहार की महिलाओं की जिंदगी, ₹1.46 लाख करोड़ का बाज़ार दिया दीदियों ने

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जीविका योजना से बदली बिहार की महिलाओं की जिंदगी, ₹1.46 लाख करोड़ का बाज़ार दिया दीदियों ने

सारांश

बिहार की जीविका दीदियों ने साबित किया कि ग्रामीण महिलाएँ बदलाव की सबसे बड़ी ताकत हो सकती हैं। पटना के कार्यक्रम में सामने आए आँकड़े चौंकाते हैं — सिर्फ जीविका दीदियों ने राज्य की अर्थव्यवस्था में ₹1.46 लाख करोड़ का बाज़ार खड़ा किया है।

मुख्य बातें

27 अगस्त 2026 को पटना में 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शामिल हुए।
जीविका दीदियों ने बिहार की अर्थव्यवस्था में ₹1 लाख 46 हजार करोड़ का बाज़ार तैयार करने में योगदान दिया।
जीविका योजना की शुरुआत 2005-06 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तत्कालीन वित्त मंत्री सुशील मोदी के नेतृत्व में हुई थी।
कृषि क्षेत्र में 500 से अधिक महिलाएँ जीविका के माध्यम से नर्सरी और कृषि आधारित रोजगार कर रही हैं।
जीविका दीदी मंजू देवी ने बताया कि ऋण लेकर दूध उत्पादन शुरू करने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया।

बिहार की जीविका योजना से जुड़ी महिलाओं ने 27 अगस्त 2026 को पटना में आयोजित 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' कार्यक्रम में अपने अनुभव साझा किए और बताया कि इस योजना ने उनके परिवारों की आर्थिक तस्वीर बदल दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जीविका दीदियाँ शामिल हुईं।

मुख्यमंत्री का संबोधन

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 'एक महिला का आत्मविश्वास बढ़ता है तो एक परिवार बदलता है — लाखों बहनों का आत्मविश्वास बढ़ता है तो यह बिहार बदलता है।' उन्होंने इस बदलाव का श्रेय 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तत्कालीन वित्त मंत्री सुशील मोदी की दूरदर्शिता को दिया।

चौधरी ने रेखांकित किया कि 2005 से पहले बिहार की महिलाएँ उद्योग और अर्थव्यवस्था से लगभग कटी हुई थीं। 2005-06 में शुरू हुए जीविका अभियान ने यह स्थिति पलट दी। उन्होंने बताया कि आज जीविका दीदियों ने बिहार की अर्थव्यवस्था में ₹1 लाख 46 हजार करोड़ का बाज़ार तैयार करने में योगदान दिया है।

जीविका दीदी मंजू देवी का अनुभव

जीविका से जुड़ी मंजू देवी ने बताया कि योजना से जुड़ने के बाद उन्होंने ऋण लेकर दूध उत्पादन सहित कई छोटे व्यवसाय शुरू किए। इससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई और वे अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा का खर्च उठाने में सक्षम हो गईं।

मंजू देवी ने बताया कि उनके समूह में बड़ी संख्या में महिलाएँ जुड़ी हैं और अलग-अलग तरह के रोजगार कर रही हैं। उन्होंने अन्य महिलाओं से भी जीविका से जुड़ने और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।

कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी

मंजू देवी ने यह भी बताया कि वे कृषि विभाग से जुड़कर किसानों को कृषि संबंधी जानकारियाँ देती हैं। कृषि क्षेत्र में 500 से अधिक महिलाएँ जीविका के माध्यम से सक्रिय हैं। इनमें से कई महिलाएँ नर्सरी लगाने और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों के ज़रिए स्वरोजगार चला रही हैं।

गौरतलब है कि जीविका योजना बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन सोसायटी के तहत संचालित होती है और इसे विश्व बैंक के सहयोग से चलाया जाता रहा है। यह बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) के विस्तार का सबसे बड़ा मंच बन चुका है।

आम महिलाओं पर असर

जीविका से जुड़ी महिलाओं के अनुसार, इस योजना ने उन्हें न केवल आर्थिक बल दिया, बल्कि सामाजिक पहचान और आत्मविश्वास भी दिया। महिलाओं का कहना है कि योजना से मिले ऋण और प्रशिक्षण ने उन्हें परिवार में निर्णय लेने की स्थिति में ला खड़ा किया है।

आने वाले समय में सरकार का लक्ष्य और अधिक महिलाओं को जीविका नेटवर्क से जोड़ना और उन्हें बाज़ार से सीधे संपर्क में लाना है — जो बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मज़बूत कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह 'बाज़ार' कुल लेन-देन है, ऋण वितरण है, या वास्तविक आय सृजन — और यही अंतर नीति की सफलता को परखने के लिए सबसे ज़रूरी है। बिहार में महिला श्रम भागीदारी दर अभी भी राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है, जो दर्शाता है कि जीविका की पहुँच व्यापक होने के बावजूद संरचनात्मक बाधाएँ बनी हुई हैं। सरकारी कार्यक्रमों में लाभार्थियों के अनुभव अक्सर सकारात्मक रूप से चुने जाते हैं — स्वतंत्र मूल्यांकन यह बताएगा कि औसत जीविका सदस्य की आय में वास्तव में कितना बदलाव आया है। राजनीतिक श्रेय की होड़ के बीच असली सवाल यह है कि जो महिलाएँ अभी भी योजना से बाहर हैं, उन तक पहुँचने की रणनीति क्या है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीविका योजना क्या है और यह बिहार में कैसे काम करती है?
जीविका योजना बिहार सरकार की ग्रामीण महिला सशक्तिकरण पहल है, जो महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) के ज़रिए महिलाओं को ऋण, प्रशिक्षण और बाज़ार से जोड़ती है। इसकी शुरुआत 2005-06 में हुई थी और यह बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन सोसायटी के तहत संचालित होती है।
जीविका दीदियों ने बिहार की अर्थव्यवस्था में कितना योगदान दिया है?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अनुसार, जीविका दीदियों ने बिहार की अर्थव्यवस्था में ₹1 लाख 46 हजार करोड़ का बाज़ार तैयार करने में योगदान दिया है। यह आँकड़ा 27 अगस्त 2026 को पटना में आयोजित 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' कार्यक्रम में सामने आया।
जीविका योजना से जुड़ने के बाद महिलाओं की जिंदगी में क्या बदलाव आया?
जीविका से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि ऋण लेकर दूध उत्पादन और अन्य छोटे व्यवसाय शुरू करने से उनकी आमदनी बढ़ी और बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना संभव हुआ। इसके अलावा, कृषि क्षेत्र में 500 से अधिक महिलाएँ नर्सरी और कृषि आधारित गतिविधियों से जुड़कर स्वरोजगार कर रही हैं।
जीविका योजना की शुरुआत किसने और कब की थी?
जीविका योजना की शुरुआत 2005-06 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तत्कालीन वित्त मंत्री सुशील मोदी के नेतृत्व में हुई थी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे बिहार की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदलने वाला ऐतिहासिक कदम बताया।
क्या बिहार की अन्य महिलाएँ भी जीविका से जुड़ सकती हैं?
हाँ, जीविका दीदियों ने अन्य महिलाओं से भी योजना से जुड़ने और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में और अधिक महिलाओं को जीविका नेटवर्क से जोड़ना और उन्हें सीधे बाज़ार से संपर्क में लाना है।
राष्ट्र प्रेस
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