जीविका योजना से बदली बिहार की महिलाओं की जिंदगी, ₹1.46 लाख करोड़ का बाज़ार दिया दीदियों ने
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की जीविका योजना से जुड़ी महिलाओं ने 27 अगस्त 2026 को पटना में आयोजित 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' कार्यक्रम में अपने अनुभव साझा किए और बताया कि इस योजना ने उनके परिवारों की आर्थिक तस्वीर बदल दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जीविका दीदियाँ शामिल हुईं।
मुख्यमंत्री का संबोधन
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 'एक महिला का आत्मविश्वास बढ़ता है तो एक परिवार बदलता है — लाखों बहनों का आत्मविश्वास बढ़ता है तो यह बिहार बदलता है।' उन्होंने इस बदलाव का श्रेय 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तत्कालीन वित्त मंत्री सुशील मोदी की दूरदर्शिता को दिया।
चौधरी ने रेखांकित किया कि 2005 से पहले बिहार की महिलाएँ उद्योग और अर्थव्यवस्था से लगभग कटी हुई थीं। 2005-06 में शुरू हुए जीविका अभियान ने यह स्थिति पलट दी। उन्होंने बताया कि आज जीविका दीदियों ने बिहार की अर्थव्यवस्था में ₹1 लाख 46 हजार करोड़ का बाज़ार तैयार करने में योगदान दिया है।
जीविका दीदी मंजू देवी का अनुभव
जीविका से जुड़ी मंजू देवी ने बताया कि योजना से जुड़ने के बाद उन्होंने ऋण लेकर दूध उत्पादन सहित कई छोटे व्यवसाय शुरू किए। इससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई और वे अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा का खर्च उठाने में सक्षम हो गईं।
मंजू देवी ने बताया कि उनके समूह में बड़ी संख्या में महिलाएँ जुड़ी हैं और अलग-अलग तरह के रोजगार कर रही हैं। उन्होंने अन्य महिलाओं से भी जीविका से जुड़ने और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।
कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी
मंजू देवी ने यह भी बताया कि वे कृषि विभाग से जुड़कर किसानों को कृषि संबंधी जानकारियाँ देती हैं। कृषि क्षेत्र में 500 से अधिक महिलाएँ जीविका के माध्यम से सक्रिय हैं। इनमें से कई महिलाएँ नर्सरी लगाने और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों के ज़रिए स्वरोजगार चला रही हैं।
गौरतलब है कि जीविका योजना बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन सोसायटी के तहत संचालित होती है और इसे विश्व बैंक के सहयोग से चलाया जाता रहा है। यह बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) के विस्तार का सबसे बड़ा मंच बन चुका है।
आम महिलाओं पर असर
जीविका से जुड़ी महिलाओं के अनुसार, इस योजना ने उन्हें न केवल आर्थिक बल दिया, बल्कि सामाजिक पहचान और आत्मविश्वास भी दिया। महिलाओं का कहना है कि योजना से मिले ऋण और प्रशिक्षण ने उन्हें परिवार में निर्णय लेने की स्थिति में ला खड़ा किया है।
आने वाले समय में सरकार का लक्ष्य और अधिक महिलाओं को जीविका नेटवर्क से जोड़ना और उन्हें बाज़ार से सीधे संपर्क में लाना है — जो बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मज़बूत कर सकता है।