बिहार: रोसेरा डीसीएलआर कंचन कुमारी झा ₹2 लाख रिश्वत लेते गिरफ्तार, घर से ₹13 लाख नकद बरामद
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सतर्कता जांच ब्यूरो ने 27 अगस्त 2026 को समस्तीपुर जिले के रोसेरा में उप संग्राहक भूमि सुधार (डीसीएलआर) कंचन कुमारी झा को ₹2 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई एक भूमि विवाद मामले में शिकायत के आधार पर बिछाए गए जाल के तहत की गई, जो बिहार के राजस्व प्रशासन में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े अभियान का हिस्सा है।
मुख्य घटनाक्रम
आरोपों के अनुसार, विभूतिपुर निवासी मनोज कुमार महतो का एक भूमि विवाद डीसीएलआर कंचन कुमारी झा के समक्ष लंबित था। झा ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता के पक्ष में मामला निपटाने के बदले ₹2 लाख नकद और एक वाशिंग मशीन की माँग की। शिकायत मिलने पर सतर्कता विभाग ने पहले आरोपों की पुष्टि की, फिर जाल बिछाया।
गुरुवार सुबह करीब 9 बजे शिकायतकर्ता सतर्कता अधिकारियों के साथ रोसेरा स्थित डीसीएलआर के सरकारी आवास पर पहुँचा, जहाँ झा को कथित तौर पर ₹2 लाख स्वीकार करते हुए पकड़ा गया।
तलाशी में क्या मिला
गिरफ्तारी के तुरंत बाद सतर्कता अधिकारियों ने सरकारी आवास को घेरकर व्यापक तलाशी शुरू की। दस्तावेजों, अलमारियों और अन्य सामग्री की जाँच की गई। रिपोर्टों के अनुसार, तलाशी के दौरान परिसर से लगभग ₹13 लाख नकद बरामद किए गए। हालाँकि, इस बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि सतर्कता विभाग द्वारा अभी की जानी बाकी है। अधिकारी बरामद नकदी और दस्तावेजों के स्रोत की जाँच कर रहे हैं।
तलाशी के दौरान रोसेरा पुलिस के जवान परिसर के बाहर तैनात रहे। ऑपरेशन की खबर फैलते ही आवास के बाहर भीड़ जमा हो गई, लेकिन जाँच की सुरक्षा के लिए इलाके को सील कर दिया गया।
कौन हैं कंचन कुमारी झा
मूल रूप से मधुबनी जिले की निवासी कंचन कुमारी झा लगभग डेढ़ वर्ष से रोसेरा डीसीएलआर के पद पर कार्यरत थीं। डीसीएलआर बिहार के राजस्व प्रशासन में विशेष रूप से भूमि संबंधी विवादों और अपीलों की सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं — यह पद सीधे आम नागरिकों की ज़मीनी समस्याओं से जुड़ा होता है।
प्रशासनिक हलकों में हलचल
इस गिरफ्तारी ने समस्तीपुर के प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ है जब बिहार सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख का दावा कर रही है। आलोचकों का कहना है कि राजस्व विभाग में रिश्वतखोरी की यह कोई पहली घटना नहीं है, और ऐसे मामले ज़मीनी स्तर पर शासन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं।
आगे की जाँच
सतर्कता विभाग कथित रिश्वतखोरी, बरामद नकदी और आवास से मिले दस्तावेजों की जाँच जारी रखे हुए है। आने वाले दिनों में मामले में और खुलासे हो सकते हैं।