बेतिया में सतर्कता ब्यूरो का शिकंजा: डेटा एंट्री ऑपरेटर ₹15,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के सतर्कता जांच ब्यूरो ने मंगलवार, 16 जून 2026 को पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया स्थित सर्किल कार्यालय में एक डेटा एंट्री ऑपरेटर को ₹15,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। आरोपी ने कथित तौर पर एक भूमि अभिलेख को पुनः सक्रिय करने के एवज में यह राशि मांगी थी, जिसके बाद पीड़ित ने सतर्कता अधिकारियों से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
मामले की पृष्ठभूमि
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने मुफस्सिल पुलिस थाना क्षेत्र के बरवत प्रसारेन गांव निवासी बालेश्वर महतो की निष्क्रिय जमाबंदी (भूमि अभिलेख) को पुनः सक्रिय करने के बदले ₹15,000 की मांग रखी थी। इस कथित मांग से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने सतर्कता अधिकारियों के पास पहुंचकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
जाल बिछाकर की गई कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद जांच अधिकारी राहुल कुमार को मामले की प्रारंभिक जांच सौंपी गई, जिन्होंने आरोपों की पुष्टि की। इसके बाद सतर्कता दल ने सुनियोजित तरीके से जाल बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने सर्किल कार्यालय परिसर के भीतर आरोपी को ₹15,000 सौंपे, सतर्कता दल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।
छापेमारी और दस्तावेज़ जांच
गिरफ्तारी के तुरंत बाद सतर्कता दल ने कार्यालय में उपलब्ध दस्तावेजों की भी जांच-पड़ताल की। इस अचानक छापेमारी से सर्किल कार्यालय परिसर में हड़कंप मच गया और दिनभर कर्मचारियों के बीच इस घटना की चर्चा होती रही। इस अभियान का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक श्याम बाबू प्रसाद श्रीवास्तव ने किया। छापेमारी दल में देवीलाल श्रीवास्तव, आशीष चौबे, दिग्विजय सिंह, कृष्ण जीवन कुमार श्रीवास्तव, राहुल कुमार, कृष्ण सिंह, वसीम अहमद और हिमांशु सिंह के साथ-साथ सशस्त्र पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
आरोपी की पहचान
सतर्कता अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति प्रमोद मिश्रा का पुत्र है और चनपटिया थाना क्षेत्र के पाकदहार गांव का निवासी है। अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आरोपी को सतर्कता न्यायालय में पेश किया जाएगा।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह कार्रवाई बिहार में सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध सतर्कता ब्यूरो की चल रही मुहिम का हिस्सा मानी जा रही है। गौरतलब है कि भूमि अभिलेख से जुड़े मामलों में रिश्वतखोरी की शिकायतें बिहार में लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं। इस घटना ने राज्य में सार्वजनिक प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।