ओणम 2025: केरल में दूध-दही से लेकर शराब तक, मिल्मा की बिक्री ₹771 करोड़ पार
सारांश
मुख्य बातें
केरल में ओणम 2025 के दौरान उपभोग के आंकड़ों ने त्योहारी अर्थव्यवस्था की एक अनूठी तस्वीर पेश की है — एक तरफ मिल्मा ने 20 से 25 अगस्त (उथरादम) के बीच 1.46 करोड़ लीटर दूध बेचकर 5.61 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, तो दूसरी तरफ बीईवीसीओ और कंज्यूमरफेड के ज़रिए शराब की बिक्री उथरादम से पहले के आठ दिनों में ₹771.29 करोड़ तक पहुँच गई। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी अवधि के ₹694.96 करोड़ की तुलना में लगभग 11 प्रतिशत अधिक है।
दूध और दही की बिक्री में त्योहारी उछाल
मिल्मा के आंकड़ों के अनुसार, 20 से 25 अगस्त के बीच दही की बिक्री और भी प्रभावशाली रही — 9.68 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 18 लाख किलोग्राम से अधिक दही बिका। क्षेत्रवार देखें तो तिरुवनंतपुरम क्षेत्रीय संघ में दूध की बिक्री 5.86 प्रतिशत और दही की बिक्री 7.94 प्रतिशत बढ़ी।
एर्नाकुलम संघ में दूध की बिक्री 4.2 प्रतिशत और दही की बिक्री 16.44 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि के साथ आगे रही। मालाबार क्षेत्र में दूध और दही की बिक्री में क्रमशः 6.03 प्रतिशत और 8.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
घी की बिक्री — साद्या की रीढ़
ओणम के पारंपरिक भोज साद्या का अनिवार्य घटक घी भी खूब बिका। तिरुवनंतपुरम संघ ने 1 से 25 अगस्त के बीच 297.85 टन घी की बिक्री दर्ज की। एर्नाकुलम संघ ने 172.58 टन और मालाबार संघ ने सर्वाधिक 358.35 टन घी बेचा।
गौरतलब है कि पायसम, अवियल और साद्या जैसे पारंपरिक व्यंजनों की तैयारी में दूध, दही और घी की खपत बड़े पैमाने पर होती है, जो इन आंकड़ों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
शराब की बिक्री — उथरादम पर रिकॉर्ड
उथरादम का दिन केरल के शराब विक्रेताओं के लिए विशेष रूप से व्यस्त रहा। इस एक दिन की बिक्री ₹126.31 करोड़ तक पहुँची, जिसमें अकेले कंज्यूमरफेड के आउटलेट्स का योगदान लगभग ₹20 करोड़ रहा। त्योहारी खरीदारी के लिए उमड़े मलयाली परिवारों की भारी भीड़ के कारण दोनों नेटवर्क के प्रमुख स्टोरों पर लंबी कतारें देखी गईं।
मिल्मा की आपूर्ति रणनीति और चेयरमैन का आभार
मिल्मा ने अपनी वृद्धि का श्रेय अग्रिम योजना, विस्तारित खरीद क्षमता और मौसमी माँग को संभालने के लिए सावधानीपूर्वक आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन को दिया। मिल्मा के चेयरमैन के.एस. मणि ने इस मौसम में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में योगदान देने वाले उपभोक्ताओं, दुग्ध उत्पादकों, कर्मचारियों, वितरकों और सभी संबद्ध पक्षों का आभार व्यक्त किया।
यह ऐसे समय में आया है जब केरल में त्योहारी उपभोग लगातार बढ़ रहा है और ओणम की अर्थव्यवस्था अब केवल पारंपरिक रसोई तक सीमित नहीं रही — यह राज्य के खुदरा, डेयरी और आबकारी क्षेत्रों का एक बड़ा वार्षिक पड़ाव बन चुकी है।