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वित्तीय समावेशन सूचकांक 2026: भारत का स्कोर 53.9 से बढ़कर 67, जन धन खाते 59 करोड़ पार

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वित्तीय समावेशन सूचकांक 2026: भारत का स्कोर 53.9 से बढ़कर 67, जन धन खाते 59 करोड़ पार

सारांश

भारत का वित्तीय समावेशन सूचकांक आठ वर्षों में 53.9 से 67 पर पहुँचा — जन धन खाते चार गुना और जमा राशि 20 गुना बढ़ी। 59 करोड़ खाते और 32.92 करोड़ महिला लाभार्थियों के साथ, यह आँकड़ा बताता है कि औपचारिक बैंकिंग अब हाशिये के वर्गों तक पहुँच रही है।

मुख्य बातें

भारत का वित्तीय समावेशन सूचकांक 2018 के 53.9 से बढ़कर 2026 में 67 पर पहुँचा।
PM जन धन योजना के तहत कुल 59.09 करोड़ बैंक खाते — 2015 की तुलना में लगभग चार गुना वृद्धि।
खातों में जमा राशि ₹15,670 करोड़ (मार्च 2015) से बढ़कर ₹3,16,514 करोड़ (19 अगस्त 2026) — करीब 20 गुना इज़ाफा।
45.95 करोड़ खाते ग्रामीण व अर्ध-शहरी और 13.14 करोड़ खाते शहरी व महानगरीय क्षेत्रों में।
32.92 करोड़ महिला लाभार्थी पंजीकृत; 41.29 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड जारी।
पात्र खाताधारकों को ₹10,000 तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा छह माह के सफल संचालन के बाद उपलब्ध।

भारत का वित्तीय समावेशन सूचकांक वर्ष 2018 के 53.9 के स्तर से उल्लेखनीय रूप से बढ़कर वर्ष 2026 में 67 पर पहुँच गया है। 27 अगस्त 2026 को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, यह प्रगति देश में ऋण, बीमा, बचत और डिजिटल भुगतान जैसी औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक आम नागरिकों की पहुँच में आए व्यापक सुधार को रेखांकित करती है। इस उपलब्धि में प्रधानमंत्री जन धन योजना (PM-JDY) की केंद्रीय भूमिका रही है।

जन धन योजना: आँकड़ों में बड़ी छलांग

प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खोले गए बैंक खातों की संख्या वर्ष 2015 की तुलना में लगभग चार गुना बढ़कर 59.09 करोड़ हो गई है। इससे भी अधिक उल्लेखनीय यह है कि इन खातों में जमा राशि करीब 20 गुना बढ़कर मार्च 2015 के ₹15,670 करोड़ से 19 अगस्त 2026 तक ₹3,16,514 करोड़ हो गई है। यह वृद्धि निम्न आय वर्ग के परिवारों में बचत की बढ़ती प्रवृत्ति और औपचारिक बैंकिंग प्रणाली पर बढ़ते भरोसे का प्रमाण है।

ग्रामीण और शहरी विस्तार

आँकड़ों के अनुसार, कुल जन धन खातों में से 45.95 करोड़ खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं, जबकि 13.14 करोड़ खाते शहरी और महानगरीय क्षेत्रों में खोले गए हैं। यह वितरण स्पष्ट करता है कि बैंकिंग सेवाओं का विस्तार देश के दूरदराज और आर्थिक रूप से कम विकसित इलाकों तक भी प्रभावी ढंग से हुआ है। गौरतलब है कि योजना की शुरुआत में लक्ष्य प्रत्येक परिवार को बैंकिंग सुविधा देना था, जिसे बाद में विस्तारित कर प्रत्येक उस वयस्क तक पहुँचाया गया जिसके पास बैंक खाता नहीं था।

महिला सशक्तिकरण में योगदान

19 अगस्त 2026 तक जन धन योजना के तहत 32.92 करोड़ महिला लाभार्थी पंजीकृत थीं। महिला खाताधारकों की संख्या में यह निरंतर वृद्धि इस बात का संकेत है कि योजना महिलाओं को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने और उनके आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हो रही है। यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण है जब महिला वित्तीय स्वायत्तता नीतिगत प्राथमिकताओं में शामिल है।

डिजिटल भुगतान और सेवाओं का विस्तार

डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करने के लिए जन धन खाताधारकों को रुपे डेबिट कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। अब तक 41.29 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिनका उपयोग देशभर के एटीएम और पॉइंट ऑफ सेल मशीनों पर किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, जन धन खाताधारक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना और मुद्रा योजना जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ भी उठा सकते हैं। प्रत्येक पात्र परिवार के एक खाताधारक को संतोषजनक खाता संचालन के छह महीने बाद ₹10,000 तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी उपलब्ध है।

आगे की राह

वित्तीय समावेशन सूचकांक में यह सुधार भारत की व्यापक डिजिटल और वित्तीय अवसंरचना के विस्तार का हिस्सा है। विशेषज्ञों के अनुसार, असली परीक्षा अब खाता स्वामित्व से आगे जाकर सक्रिय उपयोग — यानी नियमित बचत, ऋण और बीमा तक पहुँच — सुनिश्चित करने की है। आँकड़ों में यह प्रगति उत्साहजनक है, लेकिन वित्तीय साक्षरता और सेवा की गुणवत्ता अगले पड़ाव की चुनौती बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन खाता खुलना और खाते का सक्रिय उपयोग दो अलग कहानियाँ हैं। करोड़ों खाते 'जीरो-बैलेंस' श्रेणी में रहे हैं और जमा राशि की वृद्धि बड़े हिस्से में DBT हस्तांतरण से प्रेरित है, न कि स्वतःस्फूर्त बचत से। असली कसौटी यह है कि इनमें से कितने खाताधारक ऋण, बीमा और पेंशन जैसी उच्च-मूल्य सेवाओं तक पहुँच रहे हैं — जो अभी भी निम्न आय वर्ग के लिए दूर की कौड़ी बनी हुई है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का वित्तीय समावेशन सूचकांक 2026 में कितना है?
आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, भारत का वित्तीय समावेशन सूचकांक वर्ष 2026 में 67 पर पहुँच गया है, जो 2018 में 53.9 था। यह सूचकांक ऋण, बीमा, बचत और डिजिटल भुगतान जैसी औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुँच को मापता है।
प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत अब तक कितने खाते खुले हैं?
19 अगस्त 2026 तक PM जन धन योजना के तहत 59.09 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जो 2015 की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है। इनमें से 45.95 करोड़ खाते ग्रामीण व अर्ध-शहरी और 13.14 करोड़ खाते शहरी व महानगरीय क्षेत्रों में हैं।
जन धन खातों में जमा राशि कितनी बढ़ी है?
जन धन खातों में जमा राशि मार्च 2015 के ₹15,670 करोड़ से बढ़कर 19 अगस्त 2026 तक ₹3,16,514 करोड़ हो गई है — यानी करीब 20 गुना की वृद्धि। यह बढ़ोतरी निम्न आय वर्ग में बचत की प्रवृत्ति और औपचारिक बैंकिंग पर भरोसे में वृद्धि को दर्शाती है।
जन धन योजना से महिलाओं को क्या फायदा हुआ है?
19 अगस्त 2026 तक जन धन योजना के तहत 32.92 करोड़ महिला लाभार्थी पंजीकृत हैं। यह योजना महिलाओं को औपचारिक बैंकिंग, DBT, बीमा और पेंशन सेवाओं से जोड़कर उनके आर्थिक सशक्तिकरण में सहायक बन रही है।
जन धन खाताधारकों को कौन-कौन सी सुविधाएँ मिलती हैं?
जन धन खाताधारकों को बुनियादी बैंकिंग के साथ-साथ DBT, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना और मुद्रा योजना का लाभ मिलता है। इसके अलावा, पात्र खाताधारकों को छह माह के सफल संचालन के बाद ₹10,000 तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी उपलब्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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