27 अगस्त 2026
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ग्रेटर नोएडा किसानों को राहत: मुआवजा दर ₹4,125 से बढ़कर ₹6,415 प्रति वर्ग मीटर, 55.5% की बढ़ोतरी

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ग्रेटर नोएडा किसानों को राहत: मुआवजा दर ₹4,125 से बढ़कर ₹6,415 प्रति वर्ग मीटर, 55.5% की बढ़ोतरी

सारांश

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने किसानों की भूमि मुआवजा दर में 55.5% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी को मंजूरी दी — नई दर ₹6,415 प्रति वर्ग मीटर। साथ ही दस साल बाद छह फीसदी आबादी भूखंड की व्यवस्था भी बहाल, जो किसानों को शहरी विकास में स्थायी हिस्सेदारी देगी।

मुख्य बातें

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने 27 अगस्त 2026 को भूमि मुआवजा दर ₹4,125 से बढ़ाकर ₹6,415 प्रति वर्ग मीटर करने की मंजूरी दी — 55.5% की वृद्धि।
प्रति वर्ग मीटर ₹2,290 की एकमुश्त बढ़ोतरी, जो ग्रेटर नोएडा के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी एकल वृद्धि बताई जा रही है।
2016 में समाप्त किया गया छह फीसदी आबादी भूखंड का प्रावधान लगभग दस वर्ष बाद पुनः लागू; इस विकल्प पर मुआवजा ₹5,725 प्रति वर्ग मीटर होगा।
आबादी भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल 40 वर्ग मीटर और अधिकतम 2,500 वर्ग मीटर तय।
जमीन रजिस्ट्री के समय ही किसानों को आरक्षण पत्र जारी होगा; मुआवजा सीधे बैंक खाते में।
एसीईओ की अध्यक्षता में भूमि अधिग्रहण सेल गठित होगा, जो एकल-खिड़की सहायता देगा।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने 27 अगस्त 2026 को किसानों की भूमि अधिग्रहण के लिए मुआवजा दर में ऐतिहासिक बढ़ोतरी को मंजूरी दी — नई दर ₹6,415 प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई है, जो पूर्व की ₹4,125 प्रति वर्ग मीटर की दर से 55.5 फीसदी अधिक है। प्राधिकरण के अनुसार, यह ग्रेटर नोएडा के इतिहास में मुआवजा दर में अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त वृद्धि है।

मुआवजा दर में क्या बदला

नई व्यवस्था के तहत किसानों को प्रति वर्ग मीटर ₹2,290 की सीधी बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा। जो किसान छह फीसदी आबादी भूखंड का विकल्प चुनेंगे, उन्हें ₹5,725 प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया जाएगा। मुआवजे की पूरी राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इसके अतिरिक्त, भूमि पर मौजूद परिसंपत्तियों — जैसे मकान या फसल — के लिए अलग से अतिरिक्त मुआवजा भी देय होगा।

दस साल बाद लौटी आबादी भूखंड की व्यवस्था

इस निर्णय का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वर्ष 2016 में समाप्त किए गए छह फीसदी आबादी भूखंड के प्रावधान को लगभग दस वर्ष बाद पुनः लागू किया गया है। इन भूखंडों के लिए पृथक सेक्टर विकसित किए जाएंगे, जिनका ढाँचा आवासीय, औद्योगिक और बिल्डर्स सेक्टर की तर्ज पर होगा। आबादी भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल 40 वर्ग मीटर और अधिकतम 2,500 वर्ग मीटर तय किया गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में तेज़ी से हो रहे शहरीकरण के बीच किसान भूमि अधिग्रहण की शर्तों और मुआवजे को लेकर लंबे समय से असंतोष जताते रहे हैं। गौरतलब है कि 2014-15 से 2021-22 तक मुआवजा दर मात्र ₹3,500 प्रति वर्ग मीटर थी, 2022-23 में ₹3,750 और 2023-24 में ₹4,125 की गई — और अब 2026-27 में सीधे ₹6,415 कर दी गई है।

प्रक्रिया में पारदर्शिता और सरलीकरण

किसानों की सुविधा के लिए प्राधिकरण ने एसीईओ की अध्यक्षता में एक भूमि अधिग्रहण सेल गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह सेल जमीन क्रय की पूरी प्रक्रिया में किसानों को एकल-खिड़की सहायता प्रदान करेगा, जिससे उन्हें अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके साथ ही, प्राधिकरण के पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री होते ही किसानों को आबादी भूखंड का आरक्षण पत्र तत्काल जारी किया जाएगा — जो पहले एक लंबी और अनिश्चित प्रतीक्षा प्रक्रिया थी।

प्रमुख मार्गों से लगी भूमि के किसानों को आबादी भूखंड आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी।

आम किसान पर असर

प्राधिकरण का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल भूमि का उचित मूल्य दिलाना नहीं, बल्कि किसानों को ग्रेटर नोएडा के दीर्घकालिक आर्थिक विकास में भागीदार बनाना भी है। आबादी भूखंड की पुनर्बहाली से किसानों को संपत्ति के रूप में एक स्थायी आस्ति मिलेगी, जो भविष्य में उनकी आजीविका का आधार बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भूमि अधिग्रहण के प्रति किसानों के विरोध को कम करने में सहायक हो सकता है और विकास परियोजनाओं की गति बढ़ा सकता है।

आगे क्या होगा

बोर्ड की मंजूरी के बाद अब नई दर और आबादी भूखंड की व्यवस्था को क्रियान्वित करने की प्रक्रिया शुरू होगी। भूमि अधिग्रहण सेल के गठन और आरक्षण पत्र जारी करने की प्रणाली के संचालन की समयसीमा प्राधिकरण द्वारा जल्द घोषित किए जाने की उम्मीद है। यह निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार के शासन के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्रियान्वयन कितना तेज़ और पारदर्शी होगा — क्योंकि ग्रेटर नोएडा में किसानों की शिकायतें अक्सर दर से नहीं, बल्कि भुगतान में देरी और कार्यालयों के चक्करों से जुड़ी रही हैं। छह फीसदी आबादी भूखंड की बहाली एक सकारात्मक कदम है, पर 2016 में इसे बंद करने के कारण — जो कथित तौर पर प्रशासनिक जटिलताएँ थीं — अभी भी प्रासंगिक हैं। नवगठित भूमि अधिग्रहण सेल और रजिस्ट्री के साथ आरक्षण पत्र की व्यवस्था सही दिशा में है, लेकिन इनकी सफलता ज़मीनी अमल पर निर्भर करेगी, न कि केवल बोर्ड के प्रस्तावों पर।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेटर नोएडा में नई भूमि मुआवजा दर क्या है?
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने 27 अगस्त 2026 को मुआवजा दर ₹4,125 से बढ़ाकर ₹6,415 प्रति वर्ग मीटर करने की मंजूरी दी है — यह 55.5% की बढ़ोतरी है। जो किसान छह फीसदी आबादी भूखंड का विकल्प चुनेंगे, उन्हें ₹5,725 प्रति वर्ग मीटर मिलेगा।
छह फीसदी आबादी भूखंड योजना क्या है और यह क्यों बंद हुई थी?
छह फीसदी आबादी भूखंड योजना के तहत जमीन देने वाले किसानों को अधिग्रहीत भूमि के छह फीसदी के बराबर आवासीय भूखंड दिया जाता है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने 2016 में इस प्रावधान को समाप्त कर दिया था, जो अब लगभग दस वर्ष बाद पुनः लागू किया गया है।
किसानों को मुआवजा कैसे मिलेगा?
पूरी मुआवजा राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। भूमि पर मौजूद परिसंपत्तियों — जैसे मकान या फसल — के लिए भूमि मुआवजे से अलग अतिरिक्त मुआवजा भी देय होगा।
आबादी भूखंड के लिए किसानों को कितनी प्रतीक्षा करनी होगी?
नई व्यवस्था के तहत प्राधिकरण के पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री होते ही किसानों को आबादी भूखंड का आरक्षण पत्र तत्काल जारी किया जाएगा। इससे पहले की तरह लंबे इंतज़ार या अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
ग्रेटर नोएडा में मुआवजा दर का इतिहास क्या रहा है?
2014-15 से 2021-22 तक दर ₹3,500 प्रति वर्ग मीटर थी, 2022-23 में ₹3,750 और 2023-24 में ₹4,125 हुई। अब 2026-27 में इसे सीधे ₹6,415 प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है, जो प्राधिकरण के इतिहास में सबसे बड़ी एकमुश्त वृद्धि बताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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