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दिल्ली कैबिनेट का बड़ा फैसला: फसल नुकसान पर ₹75,000 प्रति हेक्टेयर मुआवजा, 10 हजार किसानों को राहत

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दिल्ली कैबिनेट का बड़ा फैसला: फसल नुकसान पर ₹75,000 प्रति हेक्टेयर मुआवजा, 10 हजार किसानों को राहत

सारांश

दिल्ली कैबिनेट ने अगस्त-सितंबर 2025 की भारी बारिश से तबाह हुई फसलों के लिए मुआवजा दर ₹49,421 से बढ़ाकर ₹75,000 प्रति हेक्टेयर कर दी है। 10 हजार किसानों और 4,442 हेक्टेयर प्रभावित जमीन के साथ, यह 10 साल में पहला बड़ा संशोधन है।

मुख्य बातें

दिल्ली कैबिनेट ने 1 जून 2026 को फसल क्षति पर अनुग्रह सहायता बढ़ाकर ₹75,000 प्रति हेक्टेयर करने को मंजूरी दी।
यह राहत अगस्त-सितंबर 2025 की भारी वर्षा और जलभराव से प्रभावित लगभग 10 हजार किसानों को मिलेगी।
प्रभावित कृषि क्षेत्र 10,977.44 एकड़ (लगभग 4,442.41 हेक्टेयर ); फसल क्षति 100 प्रतिशत आँकी गई।
पुरानी दर 2015 में तय ₹49,421 प्रति हेक्टेयर थी — नई दर में लगभग 52% की वृद्धि।
कंपनियों की भूमि, ग्राम सभा भूमि और पक्के फार्महाउस इस सहायता के दायरे से बाहर रखे गए हैं।

दिल्ली सरकार ने 1 जून 2026 को कैबिनेट बैठक में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए फसल क्षति पर दी जाने वाली अनुग्रह सहायता राशि को बढ़ाकर ₹75,000 प्रति हेक्टेयर कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, यह राहत विशेष रूप से अगस्त-सितंबर 2025 के दौरान भारी वर्षा और खेतों में हुए जलभराव से प्रभावित किसानों को दी जाएगी। इस निर्णय से राजधानी के करीब 10 हजार किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

मुआवजे में कितनी हुई बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2015 में तत्कालीन सरकार ने वर्षा से फसल क्षति की स्थिति में किसानों को ₹20,000 प्रति एकड़ (लगभग ₹49,421 प्रति हेक्टेयर) की दर से अनुग्रह सहायता देने का प्रावधान किया था। अब दस वर्षों से अधिक समय में कृषि लागत में हुई वृद्धि को ध्यान में रखते हुए इस दर को बढ़ाकर ₹75,000 प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है। यह पुरानी दर की तुलना में लगभग 52% की वृद्धि है।

गौरतलब है कि पूर्व में लागू व्यवस्था के तहत 70 प्रतिशत तक फसल क्षति होने पर उसी अनुपात में और 70 प्रतिशत से अधिक क्षति होने पर पूर्ण सहायता देने का प्रावधान था। वर्तमान मामले में राजस्व विभाग के विस्तृत आकलन में फसल क्षति 100 प्रतिशत पाई गई, इसलिए कैबिनेट ने पूर्ण दर से सहायता देने का निर्णय लिया।

कितनी कृषि भूमि हुई प्रभावित

राजस्व विभाग के आकलन के अनुसार, दिल्ली में 10,977.44 एकड़ (लगभग 4,442.41 हेक्टेयर) कृषि क्षेत्र अगस्त-सितंबर 2025 की भारी वर्षा और प्राकृतिक नालों के उफान के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था। प्राकृतिक जल निकासी तंत्र के बाधित होने से खेतों में लंबे समय तक जलभराव की स्थिति बनी रही, जिससे फसलों को व्यापक नुकसान पहुँचा।

किन किसानों को मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री के अनुसार, यह सहायता केवल भूमि के अभिलेखित स्वामियों को दी जाएगी। हालाँकि, कुछ श्रेणियाँ इस सहायता के दायरे से बाहर रखी गई हैं — जिनमें कंपनियों के स्वामित्व वाली भूमि, ग्राम सभा में निहित भूमि और पक्की चारदीवारी वाले फार्महाउस शामिल हैं। यह स्पष्टीकरण यह सुनिश्चित करने के लिए है कि सहायता केवल वास्तविक कृषक परिवारों तक पहुँचे।

सरकार की प्रतिक्रिया और प्राथमिकता

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार किसानों के परिश्रम, उनकी आजीविका और कृषि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा, 'प्राकृतिक आपदाओं, अत्यधिक वर्षा अथवा अन्य विपरीत परिस्थितियों के कारण जब किसानों की फसलें प्रभावित होती हैं, तब सरकार का दायित्व है कि वह उनके साथ मजबूती से खड़ी रहे और उन्हें समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए।'

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और संकट की घड़ी में उन्हें सुरक्षा कवच प्रदान करने की दिशा में कार्यरत है, और दिल्ली सरकार उसी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ा रही है।

आगे क्या होगा

यह अनुग्रह सहायता किसानों को आर्थिक संबल देने के साथ-साथ उन्हें अगली फसल की तैयारी में सक्षम बनाएगी और कृषि गतिविधियों की निरंतरता सुनिश्चित करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में शहरीकरण के दबाव के बीच कृषि क्षेत्र पहले से ही सिकुड़ रहा है, और प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे किसानों के लिए समय पर मुआवजा उनकी आजीविका बचाए रखने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी उतना ही सच है कि ₹75,000 प्रति हेक्टेयर की दर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की अनुशंसित दरों से अभी भी कम है। असली सवाल यह है कि क्या यह राशि वास्तव में किसानों की उत्पादन लागत की भरपाई करती है, या महज राजनीतिक संदेश है। दिल्ली में कृषि भूमि तेजी से घट रही है और शहरी दबाव के बीच जो किसान बचे हैं, उनके लिए मुआवजे की समयबद्ध और पारदर्शी वितरण व्यवस्था घोषणा से कहीं ज्यादा मायने रखती है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली सरकार ने फसल क्षति पर कितना मुआवजा तय किया है?
दिल्ली कैबिनेट ने 1 जून 2026 को फसल क्षति पर अनुग्रह सहायता बढ़ाकर ₹75,000 प्रति हेक्टेयर कर दी है। यह राशि 2015 में तय ₹49,421 प्रति हेक्टेयर की तुलना में लगभग 52% अधिक है।
यह मुआवजा किन किसानों को मिलेगा?
यह सहायता उन किसानों को मिलेगी जिनकी फसलें अगस्त-सितंबर 2025 की भारी वर्षा और जलभराव से क्षतिग्रस्त हुई हैं और जो भूमि के अभिलेखित स्वामी हैं। कंपनियों की भूमि, ग्राम सभा भूमि और पक्की चारदीवारी वाले फार्महाउस इस सहायता के दायरे से बाहर हैं।
दिल्ली में कितनी कृषि भूमि प्रभावित हुई थी?
राजस्व विभाग के आकलन के अनुसार दिल्ली में 10,977.44 एकड़ (लगभग 4,442.41 हेक्टेयर) कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ था और फसल क्षति 100 प्रतिशत आँकी गई। इससे करीब 10 हजार किसान प्रभावित हुए।
पुरानी मुआवजा दर क्या थी और इसे क्यों बदला गया?
2015 में तत्कालीन सरकार ने ₹20,000 प्रति एकड़ (लगभग ₹49,421 प्रति हेक्टेयर) की दर तय की थी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, दस वर्षों में कृषि लागत में आई वृद्धि को देखते हुए इसे संशोधित कर ₹75,000 प्रति हेक्टेयर किया गया है।
क्या पहले फसल क्षति की मात्रा के आधार पर अलग-अलग मुआवजा मिलता था?
हाँ, पूर्व में 70 प्रतिशत तक फसल क्षति पर उसी अनुपात में और 70 प्रतिशत से अधिक क्षति पर पूर्ण सहायता का प्रावधान था। चूँकि वर्तमान मामले में क्षति 100 प्रतिशत आँकी गई है, इसलिए पूर्ण दर से ₹75,000 प्रति हेक्टेयर देने का निर्णय लिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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