कोंकण आम-काजू किसानों का मुआवजा: महाराष्ट्र विधानसभा में विधायकों ने कृषि मंत्री भरणे को घेरा, ₹209 करोड़ NDRF पैकेज पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र विधानसभा में 25 जून 2026 को उस समय तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जब कोंकण क्षेत्र के विधायकों ने कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे को बेमौसम बारिश और जलवायु परिवर्तन से प्रभावित आम और काजू किसानों के लिए घोषित ₹209 करोड़ के राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) पैकेज को नाकाफी बताते हुए घेर लिया। विधायकों का कहना था कि इतनी बड़ी संख्या में प्रभावित किसानों में यह राशि बाँटने पर प्रत्येक किसान को मिलने वाली रकम अपमानजनक रूप से कम होगी।
मुख्य घटनाक्रम
विवाद की शुरुआत तब हुई जब शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक निलेश राणे ने सदन में कृषि मंत्री की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सीधे पूछा, 'क्या आप हमें कुछ भी बता देंगे और हम चुपचाप सुनते रहेंगे? क्या आप किसानों को प्रति हेक्टेयर बहुत कम राशि देकर उन्हें धोखा दे रहे हैं?' राणे ने आम किसानों के लिए ₹1,70,000 प्रति हेक्टेयर और काजू किसानों के लिए ₹1,20,000 प्रति हेक्टेयर मुआवजे की माँग की — जबकि NDRF नियमों के तहत निर्धारित सहायता मात्र ₹22,500 प्रति हेक्टेयर है।
राणे ने यह भी आरोप लगाया कि नकली कीटनाशकों ने फसल नुकसान को और बढ़ाया है, तथा सर्वे रिपोर्ट की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि दस्तावेज विधानसभा सत्र के करीब आने पर ही सामने लाए गए हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
कृषि मंत्री भरणे ने जवाब दिया कि कृषि विभाग और बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार फसल नुकसान का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन और अनियमित मौसम है। उन्होंने जिलावार राहत राशि का ब्यौरा दिया: रत्नागिरी को ₹98.45 करोड़ (52,628 किसान), सिंधुदुर्ग को ₹79.05 करोड़ (42,322 किसान), रायगढ़ को ₹20.28 करोड़ (17,000 किसान), पालघर को ₹6.83 करोड़ (17,712 किसान) और ठाणे को ₹4.84 करोड़ (4,669 किसान)।
मंत्री ने यह भी बताया कि मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत किसानों को अतिरिक्त ₹217 करोड़ की सहायता दी जाएगी और अगले 15 दिनों में NDRF सहायता एवं बीमा राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा कर दी जाएगी।
आम जनता और किसानों पर असर
विधायक शेखर निकम ने बताया कि रत्नागिरी की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट 10 जून को ही सौंपी जा चुकी है, जिसमें भारी नुकसान की पुष्टि हुई है। उन्होंने NDRF राशि को अपर्याप्त बताते हुए कम से कम ₹1,00,000 प्रति हेक्टेयर सहायता की माँग की। साथ ही उन्होंने कृषि ऋण को मध्यम अवधि से सीधे फसल ऋण में बदलने और कर्ज माफी की भी माँग की। गौरतलब है कि कोंकण क्षेत्र के कुल 1,34,331 से अधिक किसान इस राहत पैकेज के दायरे में हैं।
विशेषज्ञ और राजनीतिक दबाव
हंगामा बढ़ने पर कोंकण के विधायकों ने सदन की कार्यवाही रोकने की चेतावनी दी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मत्स्य पालन मंत्री नितेश राणे ने हस्तक्षेप किया और कहा कि सरकार नुकसान की असाधारण स्थिति को समझती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार मानक NDRF सीमा से आगे जाकर सहायता देगी और कोंकण के आम तथा काजू किसानों को अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय पैकेज दिया जाएगा। इसके बाद विरोध कर रहे विधायकों का आक्रोश शांत हुआ और चर्चा समाप्त हुई।
क्या होगा आगे
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में कृषि संकट लगातार गहरा रहा है और मानसून की अनिश्चितता किसानों के लिए नई चुनौतियाँ पैदा कर रही है। सरकार के आश्वासन के बाद अब नज़रें इस पर टिकी हैं कि NDRF से परे अतिरिक्त पैकेज की घोषणा कब और किस रूप में होती है — और क्या वह विधायकों की माँग के अनुरूप होगी।