ई20 पेट्रोल नीति बरकरार: बीपीसीएल चेयरमैन संजय खन्ना ने किया स्पष्ट, पुराने वाहनों के लिए ई10 विकल्प पर चर्चा जारी
सारांश
मुख्य बातें
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संजय खन्ना ने 27 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि ई20 पेट्रोल को ई10 से प्रतिस्थापित करने का कोई प्रस्ताव सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है। कंपनी की वार्षिक आम बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि चर्चा केवल इस सीमित प्रश्न तक है कि 2023 से पूर्व निर्मित पुराने वाहनों के लिए कम एथेनॉल मिश्रण वाला ईंधन अलग से उपलब्ध कराया जाए या नहीं।
चेयरमैन का स्पष्टीकरण
खन्ना ने अपने शब्दों में कहा, 'मैंने कभी नहीं कहा कि ई20 को ई10 में बदला जाएगा। चर्चा केवल इस बात पर हो रही है कि क्या पुराने वाहनों को कम एथेनॉल मिश्रण वाला ईंधन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।' उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार की मौजूदा ई20 नीति को वापस लेने या संशोधित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
खन्ना ने यह भी जोड़ा कि यदि भविष्य में सरकार एथेनॉल मिश्रण नीति में कोई बदलाव करने का निर्णय लेती है, तो बीपीसीएल को परिचालन या लॉजिस्टिक स्तर पर कोई बड़ी बाधा नहीं दिखती। तथापि, उन्होंने माना कि एक साथ कई ग्रेड के पेट्रोल की आपूर्ति एवं वितरण में व्यावहारिक चुनौतियाँ अवश्य होंगी।
ई10 और ई20 में क्या अंतर है
ई10 पेट्रोल में 10% एथेनॉल और 90% पेट्रोल का मिश्रण होता है, जबकि ई20 पेट्रोल में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल शामिल होता है। केंद्र सरकार का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाने, किसानों की आय बढ़ाने और स्वच्छ ईंधन को प्रोत्साहित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब हाल ही में कुछ मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि 2023 से पहले निर्मित वाहन ई20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं हैं और वाहन निर्माता कंपनियाँ भी इस ईंधन को लेकर निजी तौर पर चिंतित हैं। इन दावों के बाद पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक आधिकारिक फैक्टशीट जारी कर ऐसी रिपोर्टों का खंडन किया था।
मंत्रालय ने अपनी फैक्टशीट में कहा था कि ई15 से अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग पिछले साढ़े तीन वर्षों से और ई19-ई20 ईंधन का उपयोग ढाई वर्षों से अधिक समय से किया जा रहा है। इस पूरी अवधि में एथेनॉल मिश्रण के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहनों में तकनीकी विफलता की कोई प्रमाणित घटना सामने नहीं आई।
वारंटी दावों का अभाव — सरकारी तर्क
फैक्टशीट के अनुसार, यदि एथेनॉल मिश्रण वास्तव में इंजनों या ईंधन प्रणालियों को व्यापक नुकसान पहुँचा रहा होता, तो वाहन निर्माताओं को बड़ी संख्या में वारंटी दावे, विशेष सेवा अभियान और उपभोक्ताओं की ओर से व्यापक शिकायतें दर्ज होतीं — लेकिन ऐसा कोई रुझान देखने को नहीं मिला। गौरतलब है कि यह तीसरी बार है जब सरकार को एथेनॉल मिश्रण नीति को लेकर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना पड़ा है।
आगे क्या
पुराने वाहनों के लिए ई10 विकल्प पर विचार-विमर्श जारी है, लेकिन बीपीसीएल चेयरमैन के अनुसार इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। आपूर्ति श्रृंखला में एक अतिरिक्त ग्रेड के पेट्रोल को समानांतर रूप से संभालने की व्यावहारिक जटिलता किसी भी नीतिगत बदलाव की गति तय करेगी।