कलकत्ता हाई कोर्ट का TMC को झटका: चार फ्रीज बैंक खातों पर अंतरिम राहत देने से इनकार
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 27 अगस्त 2026 को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट को किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से स्पष्ट इनकार कर दिया। यह मामला एक सरकारी बैंक की हरीश मुखर्जी रोड शाखा में पार्टी के चार बैंक खातों पर डेबिट रोक से जुड़ा है, जो पश्चिम बंगाल पुलिस के निर्देश पर लगाई गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
बैंक अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल पुलिस के निर्देशों के बाद इन चार खातों पर डेबिट की रोक लगाई। यह मामला नॉर्थ 24 परगना जिले में बिधाननगर सिटी पुलिस के अंतर्गत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी से जुड़ा है। उसी मामले के संदर्भ में राज्य पुलिस ने बैंक को डेबिट रोकने का निर्देश दिया था।
TMC गुट की दलीलें
TMC गुट ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में तर्क दिया कि पार्टी के 215 पूर्णकालिक कर्मचारियों का वेतन और रोजमर्रा के खर्च रुक जाने के कारण खातों को डी-फ्रीज करना अपरिहार्य है। याचिका में साइबर क्राइम मामले पर रोक लगाने की भी माँग की गई थी।
अदालत का रुख
यह मामला जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। उन्होंने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद ममता गुट को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का अवसर मिलेगा, और दोनों दस्तावेज़ प्राप्त होने के बाद ही अदालत मामले की विस्तृत सुनवाई करेगी।
पूर्व मिसाल और वर्तमान स्थिति
गौरतलब है कि इसी पीठ ने पूर्व में एक निजी क्षेत्र के बैंक में TMC के चार खातों को आंशिक और सशर्त रूप से डी-फ्रीज करने की अनुमति दी थी। हालाँकि, जस्टिस भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि वर्तमान मामले में अभी कोई ऐसा निर्देश नहीं दिया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता-परिवर्तन के बाद TMC के विभिन्न गुटों के बीच संसाधनों और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर कानूनी विवाद बढ़ते जा रहे हैं।
आगे क्या होगा
अदालत ने हलफनामा और जवाबी हलफनामा दाखिल होने तक मामले की अगली सुनवाई स्थगित कर दी है। तब तक चारों बैंक खातों पर डेबिट की रोक जारी रहेगी, जिससे पार्टी के कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर अनिश्चितता बनी रहेगी।